छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के सामने आमतौर पर सामाजिक बहिष्कार, प्रताड़ना और अधिकारों से जुड़े मामले पहुंचते हैं. लेकिन एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसका संदर्भ त्रेता युग से जुड़ा है. आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक ने बताया कि दशहरा पर रावण के पुतला दहन को मानवाधिकार के नजरिए से देखने का सवाल उठाया गया.
मामले में सवाल किया गया कि हर साल रावण का पुतला जलाया जाता है, तो क्या इसे मानवाधिकार के संदर्भ में देखा जा सकता है. साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि अगर रावण को लेकर ऐसा सवाल है, तो द्वापर युग के दुर्योधन के संदर्भ में ऐसा क्यों नहीं है? यानी आयोग के सामने एक ओर वर्तमान समय के सामाजिक बहिष्कार जैसे गंभीर मामले हैं. तो दूसरी ओर पौराणिक पात्रों और आधुनिक मानवाधिकार की अवधारणा को जोड़कर देखा गया एक बेहद अलग सवाल भी सामने आया है.
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