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बेटी की मौत के बाद न्याय को दर-दर भटक रहा पिता, एक माह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
**जीरो एफआईआर दर्ज होने के बावजूद जालौन पुलिस पर लापरवाही के आरोप, सहायक पुलिस अधीक्षक ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

#जालौन 
जालौन। विवाहिता पुत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद न्याय की गुहार लगा रहा एक पिता पिछले एक माह से पुलिस अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है। पीड़ित का आरोप है कि महाराष्ट्र में जीरो एफआईआर दर्ज होने के बावजूद जालौन पुलिस ने अब तक आरोपियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की है।
ग्राम बरियापुर निवासी संतोष चौधरी ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उन्होंने अपनी पुत्री हिना का विवाह 20 नवंबर 2025 को ग्राम धनतौली निवासी सोनू के साथ किया था। आरोप है कि विवाह के बाद से ही पति, सास, ससुर, देवर एवं देवरानी द्वारा दहेज में मोटरसाइकिल की मांग को लेकर लगातार मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना दी जाती रही। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह मोटरसाइकिल उपलब्ध नहीं करा सके, जिसके चलते उनकी पुत्री को लगातार प्रताड़ित किया गया।
पीड़ित के अनुसार कई बार पंचायत हुई, पुलिस में शिकायत भी की गई, लेकिन समझौते के भरोसे बेटी को फिर ससुराल भेज दिया गया। आरोप है कि 14 जून 2026 को बेटी को गंभीर हालत में उसके पति और देवर महाराष्ट्र स्थित पिता के घर छोड़कर चले गए। अस्पताल में उपचार के दौरान हिना ने अपने परिजनों को बताया कि ससुराल पक्ष ने लाठी-डंडों से उसकी बेरहमी से पिटाई की थी। इलाज के बावजूद 23 जून 2026 की शाम उसकी मृत्यु हो गई।
मामले में महाराष्ट्र के शिवाजी नगर थाने में 25 जून 2026 को जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जबकि पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार भी महाराष्ट्र में हुआ। इसके बाद मामला जालौन स्थानांतरित किया गया, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि एक माह बीत जाने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
न्याय की मांग को लेकर पीड़ित पिता लगातार पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है। इस संबंध में सहायक पुलिस अधीक्षक ने पीड़ित को मामले में नियमानुसार जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पीड़ित ने मांग की है कि जीरो एफआईआर के आधार पर पति, सास, ससुर, देवर एवं देवरानी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई कर दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए, ताकि उसकी मृतक पुत्री को न्याय मिल सके।

बेटी की मौत के बाद न्याय को दर-दर भटक रहा पिता, एक माह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई **जीरो एफआईआर दर्ज होने के बावजूद जालौन पुलिस पर लापरवाही के आरोप, सहायक पुलिस अधीक्षक ने दिया कार्रवाई का आश्वासन #जालौन जालौन। विवाहिता पुत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद न्याय की गुहार लगा रहा एक पिता पिछले एक माह से पुलिस अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है। पीड़ित का आरोप है कि महाराष्ट्र में जीरो एफआईआर दर्ज होने के बावजूद जालौन पुलिस ने अब तक आरोपियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की है। ग्राम बरियापुर निवासी संतोष चौधरी ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उन्होंने अपनी पुत्री हिना का विवाह 20 नवंबर 2025 को ग्राम धनतौली निवासी सोनू के साथ किया था। आरोप है कि विवाह के बाद से ही पति, सास, ससुर, देवर एवं देवरानी द्वारा दहेज में मोटरसाइकिल की मांग को लेकर लगातार मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना दी जाती रही। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह मोटरसाइकिल उपलब्ध नहीं करा सके, जिसके चलते उनकी पुत्री को लगातार प्रताड़ित किया गया। पीड़ित के अनुसार कई बार पंचायत हुई, पुलिस में शिकायत भी की गई, लेकिन समझौते के भरोसे बेटी को फिर ससुराल भेज दिया गया। आरोप है कि 14 जून 2026 को बेटी को गंभीर हालत में उसके पति और देवर महाराष्ट्र स्थित पिता के घर छोड़कर चले गए। अस्पताल में उपचार के दौरान हिना ने अपने परिजनों को बताया कि ससुराल पक्ष ने लाठी-डंडों से उसकी बेरहमी से पिटाई की थी। इलाज के बावजूद 23 जून 2026 की शाम उसकी मृत्यु हो गई। मामले में महाराष्ट्र के शिवाजी नगर थाने में 25 जून 2026 को जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जबकि पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार भी महाराष्ट्र में हुआ। इसके बाद मामला जालौन स्थानांतरित किया गया, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि एक माह बीत जाने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न्याय की मांग को लेकर पीड़ित पिता लगातार पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है। इस संबंध में सहायक पुलिस अधीक्षक ने पीड़ित को मामले में नियमानुसार जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पीड़ित ने मांग की है कि जीरो एफआईआर के आधार पर पति, सास, ससुर, देवर एवं देवरानी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई कर दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए, ताकि उसकी मृतक पुत्री को न्याय मिल सके।

Orai, Jalaun | Jul 30, 2026

Orai, Jalaun | Jul 30, 2026

थाने में कुर्सी पर बैठने से रोकने और दुर्व्यवहार का आरोप, शिकायत पहुंची एसपी व डीआईजी तक

कोंच कोतवाली में फरियादी से अभद्रता का आरोप, सामाजिक कार्यकर्ता ने उच्च अधिकारियों से लगाई जांच की गुहार

जितेंद्र गुप्ता ✍️। जालौन 

जनपद की कोंच कोतवाली से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उरई निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सुशील चौधरी ने आरोप लगाया है कि मुकदमे की जानकारी लेने के दौरान उनके साथ थाने में अनुचित व्यवहार किया गया और उन्हें फरियादियों के लिए रखी कुर्सी पर बैठने से रोक दिया गया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, वह अपने परिचित से जुड़े एक प्रकरण की जानकारी लेने कोंच कोतवाली पहुंचे थे। उनका कहना है कि कोतवाल के उपलब्ध न होने पर वह बाहर रखी कुर्सी पर बैठ गए। इसी दौरान एक उपनिरीक्षक मौके पर पहुंचे और उन्हें कुर्सी से उठने के लिए कहा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान उनके साथ अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया गया और उन्हें थाने से बाहर जाने के लिए कहा गया।
इस मामले को लेकर सुशील चौधरी ने क्षेत्राधिकारी (सीओ) कोंच, पुलिस अधीक्षक जालौन, डीआईजी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता के हैं। अभी तक संबंधित पुलिस अधिकारी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस विभाग जांच में क्या तथ्य सामने लाता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

#orai #jalaun #कोंच #jalaunpolice #jalaunnews #spjalaun #boldobharat

थाने में कुर्सी पर बैठने से रोकने और दुर्व्यवहार का आरोप, शिकायत पहुंची एसपी व डीआईजी तक कोंच कोतवाली में फरियादी से अभद्रता का आरोप, सामाजिक कार्यकर्ता ने उच्च अधिकारियों से लगाई जांच की गुहार जितेंद्र गुप्ता ✍️। जालौन जनपद की कोंच कोतवाली से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उरई निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सुशील चौधरी ने आरोप लगाया है कि मुकदमे की जानकारी लेने के दौरान उनके साथ थाने में अनुचित व्यवहार किया गया और उन्हें फरियादियों के लिए रखी कुर्सी पर बैठने से रोक दिया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, वह अपने परिचित से जुड़े एक प्रकरण की जानकारी लेने कोंच कोतवाली पहुंचे थे। उनका कहना है कि कोतवाल के उपलब्ध न होने पर वह बाहर रखी कुर्सी पर बैठ गए। इसी दौरान एक उपनिरीक्षक मौके पर पहुंचे और उन्हें कुर्सी से उठने के लिए कहा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान उनके साथ अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया गया और उन्हें थाने से बाहर जाने के लिए कहा गया। इस मामले को लेकर सुशील चौधरी ने क्षेत्राधिकारी (सीओ) कोंच, पुलिस अधीक्षक जालौन, डीआईजी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता के हैं। अभी तक संबंधित पुलिस अधिकारी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस विभाग जांच में क्या तथ्य सामने लाता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। #orai #jalaun #कोंच #jalaunpolice #jalaunnews #spjalaun #boldobharat

Orai, Jalaun | Jul 30, 2026

जालौन में जांच ट्रांसफर होने के बावजूद मनमाने ढंग से उरई नगर पालिका की जांच करने पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही

भारी संख्या में प्राइवेट लड़को को लेकर नगर पालिका पहुंचे थे रिंकू सिंह राही

प्राइवेट लड़के बना रहे थे वीडियो और सोशल मीडिया पर कर रहे थे ट्रेंड

जांच के नाम पर सोशल मीडिया पर किया जा रहा प्रचार प्रसार

एक दर्जन प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर और 40 पत्रकारों के साथ नगर पालिका पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही

उरई नगर पालिका ईओ पर घूस की पेशकश का आरोप

लगभग 4 घंटे तक नगर पालिका के विभिन्न कक्षाओं में कागज पलटते रहे रिंकू सिंह राही 

जांच के दौरान मीडिया के कैमरो से बचते नजर आए जॉइंट मैजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही और टी एस नगर पालिका गणेश प्रसाद

जाँच के दौरान उरई नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी राम अचल कुरील और राही की हुई हॉट टॉक

अधिशाषी अधिकारी ने कागज दिखाने से किया साफ साफ मना

जॉइंट मैजिस्ट्रेट ने अधिशासी अधिकारी के ऊपर लगाए सेटिंग गेटिंग करने का आरोप

उरई नगर पालिका में हाई-प्रोफाइल जांच से हड़कंप, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के गंभीर आरोपों से मचा बवाल

रिपोर्ट :अंकुर श्रीवास्तव ✍️ 

जनपद जालौन की उरई नगर पालिका परिषद में पिछले कई दिनों से चल रही जांच बुधवार को उस समय सुर्खियों में आ गई, जब ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही एक दर्जन कंप्यूटर ऑपरेटरों और लगभग 40 पत्रकारों की मौजूदगी में नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। जांच के दौरान उन्होंने अधिशासी अधिकारी (ईओ) राम अचल कुरील पर न केवल जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाया, बल्कि घूस देने की पेशकश किए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया। पूरे घटनाक्रम के दौरान नगर पालिका कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और कई अधिकारी कथित रूप से कार्यालय छोड़कर चले गए।

जानकारी के अनुसार, नगर पालिका के सभासदों द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायत जिलाधिकारी से की गई थी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लगभग 15 दिन पहले तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति के अध्यक्ष अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद मौर्य बनाए गए, जबकि उप जिलाधिकारी सदर उत्तम तिवारी और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही को सदस्य नामित किया गया।

बताया जा रहा है कि जांच प्रक्रिया के दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने नगर पालिका प्रशासन से कई बार पत्राचार कर आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। आरोप है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद अधिशासी अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए और जांच में सहयोग करने से लगातार बचा जाता रहा। इसके बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने पूर्व निर्धारित तिथि घोषित करते हुए कहा था कि यदि नगर पालिका प्रशासन सहयोग नहीं करेगा तो 29 जुलाई को कंप्यूटर ऑपरेटरों की टीम के साथ रिकॉर्ड की स्क्रीनिंग की जाएगी तथा पूरी कार्रवाई मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की जाएगी, ताकि जांच में पारदर्शिता बनी रहे।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अपने दल के साथ नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। उनके साथ बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि भी मौजूद थे। सबसे पहले उन्होंने अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील के कक्ष में पहुंचकर पिछले तीन वर्षों से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने की मांग की। आरोप है कि अधिशासी अधिकारी ने रिकॉर्ड उपलब्ध कराने से साफ इनकार कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिशासी अधिकारी ने कहा कि जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार ज्वाइंट मजिस्ट्रेट जांच का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए उन्हें रिकॉर्ड नहीं दिया जा सकता। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही ने जवाब दिया कि यदि जिलाधिकारी स्वयं ऐसा निर्देश देंगे तो वह उसका अक्षरशः पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने पद और जांच समिति के सदस्य के रूप में रिकॉर्ड देखने के लिए अधिकृत हैं। इसके बावजूद आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।

इसके बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कर अधिकारी एवं लेखा अधिकारी के कक्ष में पहुंचे। शुरुआत में कक्ष बंद मिला। कुछ देर बाद अधिकारी पहुंचे तो उनसे चेक बुक, भुगतान संबंधी अभिलेख और अन्य वित्तीय दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने यह कहते हुए रिकॉर्ड देने से मना कर दिया कि यह गोपनीय दस्तावेज हैं और इनकी स्क्रीनिंग नहीं कराई जा सकती।

इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा कि जो दस्तावेज सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के दायरे में आते हैं, उनकी रिकॉर्डिंग और स्क्रीनिंग पूरी तरह वैधानिक है। उनका कहना था कि जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और भविष्य में किसी प्रकार के विवाद से बचने के लिए रिकॉर्डिंग कराई जा रही है।

BOL DO BHARAT 🇮🇳

#jalaun #orainagarpalika #jalaunnews #iasrinkusinghrahi

जालौन में जांच ट्रांसफर होने के बावजूद मनमाने ढंग से उरई नगर पालिका की जांच करने पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही भारी संख्या में प्राइवेट लड़को को लेकर नगर पालिका पहुंचे थे रिंकू सिंह राही प्राइवेट लड़के बना रहे थे वीडियो और सोशल मीडिया पर कर रहे थे ट्रेंड जांच के नाम पर सोशल मीडिया पर किया जा रहा प्रचार प्रसार एक दर्जन प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर और 40 पत्रकारों के साथ नगर पालिका पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही उरई नगर पालिका ईओ पर घूस की पेशकश का आरोप लगभग 4 घंटे तक नगर पालिका के विभिन्न कक्षाओं में कागज पलटते रहे रिंकू सिंह राही जांच के दौरान मीडिया के कैमरो से बचते नजर आए जॉइंट मैजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही और टी एस नगर पालिका गणेश प्रसाद जाँच के दौरान उरई नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी राम अचल कुरील और राही की हुई हॉट टॉक अधिशाषी अधिकारी ने कागज दिखाने से किया साफ साफ मना जॉइंट मैजिस्ट्रेट ने अधिशासी अधिकारी के ऊपर लगाए सेटिंग गेटिंग करने का आरोप उरई नगर पालिका में हाई-प्रोफाइल जांच से हड़कंप, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के गंभीर आरोपों से मचा बवाल रिपोर्ट :अंकुर श्रीवास्तव ✍️ जनपद जालौन की उरई नगर पालिका परिषद में पिछले कई दिनों से चल रही जांच बुधवार को उस समय सुर्खियों में आ गई, जब ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही एक दर्जन कंप्यूटर ऑपरेटरों और लगभग 40 पत्रकारों की मौजूदगी में नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। जांच के दौरान उन्होंने अधिशासी अधिकारी (ईओ) राम अचल कुरील पर न केवल जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाया, बल्कि घूस देने की पेशकश किए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया। पूरे घटनाक्रम के दौरान नगर पालिका कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और कई अधिकारी कथित रूप से कार्यालय छोड़कर चले गए। जानकारी के अनुसार, नगर पालिका के सभासदों द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायत जिलाधिकारी से की गई थी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लगभग 15 दिन पहले तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति के अध्यक्ष अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद मौर्य बनाए गए, जबकि उप जिलाधिकारी सदर उत्तम तिवारी और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही को सदस्य नामित किया गया। बताया जा रहा है कि जांच प्रक्रिया के दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने नगर पालिका प्रशासन से कई बार पत्राचार कर आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। आरोप है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद अधिशासी अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए और जांच में सहयोग करने से लगातार बचा जाता रहा। इसके बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने पूर्व निर्धारित तिथि घोषित करते हुए कहा था कि यदि नगर पालिका प्रशासन सहयोग नहीं करेगा तो 29 जुलाई को कंप्यूटर ऑपरेटरों की टीम के साथ रिकॉर्ड की स्क्रीनिंग की जाएगी तथा पूरी कार्रवाई मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की जाएगी, ताकि जांच में पारदर्शिता बनी रहे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अपने दल के साथ नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। उनके साथ बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि भी मौजूद थे। सबसे पहले उन्होंने अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील के कक्ष में पहुंचकर पिछले तीन वर्षों से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने की मांग की। आरोप है कि अधिशासी अधिकारी ने रिकॉर्ड उपलब्ध कराने से साफ इनकार कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिशासी अधिकारी ने कहा कि जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार ज्वाइंट मजिस्ट्रेट जांच का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए उन्हें रिकॉर्ड नहीं दिया जा सकता। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही ने जवाब दिया कि यदि जिलाधिकारी स्वयं ऐसा निर्देश देंगे तो वह उसका अक्षरशः पालन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने पद और जांच समिति के सदस्य के रूप में रिकॉर्ड देखने के लिए अधिकृत हैं। इसके बावजूद आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कर अधिकारी एवं लेखा अधिकारी के कक्ष में पहुंचे। शुरुआत में कक्ष बंद मिला। कुछ देर बाद अधिकारी पहुंचे तो उनसे चेक बुक, भुगतान संबंधी अभिलेख और अन्य वित्तीय दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने यह कहते हुए रिकॉर्ड देने से मना कर दिया कि यह गोपनीय दस्तावेज हैं और इनकी स्क्रीनिंग नहीं कराई जा सकती। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा कि जो दस्तावेज सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के दायरे में आते हैं, उनकी रिकॉर्डिंग और स्क्रीनिंग पूरी तरह वैधानिक है। उनका कहना था कि जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और भविष्य में किसी प्रकार के विवाद से बचने के लिए रिकॉर्डिंग कराई जा रही है। BOL DO BHARAT 🇮🇳 #jalaun #orainagarpalika #jalaunnews #iasrinkusinghrahi

Orai, Jalaun | Jul 30, 2026

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