किस आधार पर रौशन आनंद सर को जेल भेजा जा रहा है, जबकि CCTV फुटेज से यह स्पष्ट बताया जा रहा है कि वह घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे? अगर सिर्फ किसी एक व्यक्ति के आरोप या बयान के आधार पर किसी को जेल भेज दिया जाएगा, तो कल कोई भी किसी निर्दोष व्यक्ति का नाम लेकर उसे फंसा सकता है। कानून का काम तथ्यों, सबूतों और निष्पक्ष जांच के आधार पर निर्णय लेना है, न कि केवल आरोपों के आधार पर।
अगर रौशन आनंद सर को वास्तव में इस घटना से कोई लेना-देना होता, तो वह खुलेआम पटना में क्यों रहते? इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं उनके खिलाफ कोई सुनियोजित साजिश तो नहीं रची जा रही।
आज सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर बिना जांच पूरी हुए किसी को दोषी ठहराना बेहद गलत है। किसी भी व्यक्ति की वर्षों की मेहनत, प्रतिष्ठा और करियर को केवल आरोपों के आधार पर बर्बाद नहीं किया जा सकता।