कुछ आवाज़ें सिर्फ कानों तक नहीं, सीधे दिल तक पहुँचती हैं...
आवाज़ सुनते ही याद आ गया गाँव, बचपन और अपना पहाड़
"जब इस भुलि ने गाया नेगी जी का गीत, भावुक हो उठे हजारों पहाड़ी
सुर ऐसे कि सीधे दिल में उतर जाएँ, पहाड़ की मिट्टी की खुशबू है इसकी आवाज़ में
जब यह भुलि गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी जी के गीत गाती है, तो लगता है जैसे पूरा पहाड़ बोल रहा हो। इसकी आवाज़ में गाँव की मिट्टी की खुशबू है, बचपन की यादें हैं और अपनी संस्कृति के प्रति अपार प्रेम है।
आज जब हमारी बोली-भाषा और लोक संस्कृति को सहेजने की ज़रूरत है, तब ऐसी युवा प्रतिभाएँ उम्मीद की नई किरण हैं। इनके सुर आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
ईश्वर इस बेटी को और ऊँचाइयाँ दे तथा इसकी मधुर आवाज़ यूँ ही उत्तराखंड की लोक संस्कृति का गौरव बढ़ाती रहे। 🙏🌺
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