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होटल एसोसिएशन उदयपुर ने नारायण सेवा संस्थान के निःशुल्क सेवा प्रकल्पों का किया अवलोकन #nss #narayanseva #narayansevasan...

Girwa, Udaipur | Feb 19, 2026

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खैरथल रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास से यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
खैरथल की अनाज़ मंडी और सब्जी मंडी आने वाले व्यापारियों का आवागमन होगा सुगम
@followers @top fans News 24 Udaipur North Western Railway Ministry of Railways, Government of India
#RailwayNews #railwaystation #viralpost #nonfollowers
खैरथल रेलवे स्टेशन आसपास के क्षेत्रों जैसे किशनगढ बास, तिजारा और खैरथल के यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी पॉइंट है। साथ ही खैरथल अलवर जिले का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। खैरथल रेलवे स्टेशन पर कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव दिया गया है। यहां से हजारों यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत खैरथल स्टेशन का लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया गया है जिससे स्टेशन को आधुनिक और यात्री-अनुकूल बनाया गया है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन के अनुसार खैरथल रेलवे स्टेशन के भवन को पुर्ण रूप ये नवीनीकृत किया गया है । अब यह स्टेशन स्थानीय कला और आधुनिक डिजाइन का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करता है तथा स्टेशन भवन में पोर्च का निर्माण  किया गया है। सर्कुलेटिंग क्षेत्र में सुविधा क्षेत्र को 1200 वर्ग मीटर से बढाकर 3600 वर्ग मीटर किया गया है तथा अलग- अलग प्रवेश और निकास द्वार का प्रावधान किया गया है। दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए पृथक पार्किंग का प्रावधान किया गया है। 4.19 करोड़ रुपये की लागत से 12 मीटर चौड़ा ऊपरी पैदल पुल (एफओबी) का निर्माण किया गया है जिसमें रेम्प और कवरिंग शेड़ का भी प्रावधान किया गया है। मौजूदा प्लेटफ़ॉर्म शेल्टरों मे 150 वर्ग मीटर का विस्तार किया गया है। प्लेटफॉर्मों के 4197 वर्ग मीटर सतह को नवीनीकृत किया गया है। स्टेशन भवन के अन्दर 300 वर्ग मीटर में कलात्मक चित्र बनाये गये है।
खैरथल रेलवे स्टेशन पर नये प्रतीक्षा कक्ष बनाये गये हैं । आधुनिक फिटिंग के साथ मौजूदा शौचालय ब्लॉकों का नवीनीकरण किया गया है। दिव्यांग जनों के लिए विशेष प्रावधान किये गये है जिसमें हेल्प बूथ, शौचालय, वाटर बूथ, रेम्प, टिकट विंडो, साईनेज, कुर्सीयां आदि शामिल हैं।  

खैरथल रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास से यहां आनेवाले यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी। अब आसपास के क्षेत्र की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने में मदद मिलेगी और इस तरह के परिवहन केंद्र के विकास से आर्थिक अवसरों में और अधिक वृद्धि होगी तथा सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुख्य विशेषताएँ
सर्कुलेटिंग एरिया का विकास
अलग-अलग प्रवेश व निकास द्वार
समुचित और पर्याप्त पार्किंग 
प्रवेश हाल 
साइनेज की सुविधा
वेटिंग रूम 
स्टेशन बिल्डिंग का नया स्वरूप 
प्लेटफार्म शेल्टर 
दिव्यांगजन सुविधाएं
फुट ओवर ब्रिज

खैरथल रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास से यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं खैरथल की अनाज़ मंडी और सब्जी मंडी आने वाले व्यापारियों का आवागमन होगा सुगम @followers @top fans News 24 Udaipur North Western Railway Ministry of Railways, Government of India #RailwayNews #railwaystation #viralpost #nonfollowers खैरथल रेलवे स्टेशन आसपास के क्षेत्रों जैसे किशनगढ बास, तिजारा और खैरथल के यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी पॉइंट है। साथ ही खैरथल अलवर जिले का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। खैरथल रेलवे स्टेशन पर कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव दिया गया है। यहां से हजारों यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत खैरथल स्टेशन का लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया गया है जिससे स्टेशन को आधुनिक और यात्री-अनुकूल बनाया गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन के अनुसार खैरथल रेलवे स्टेशन के भवन को पुर्ण रूप ये नवीनीकृत किया गया है । अब यह स्टेशन स्थानीय कला और आधुनिक डिजाइन का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करता है तथा स्टेशन भवन में पोर्च का निर्माण किया गया है। सर्कुलेटिंग क्षेत्र में सुविधा क्षेत्र को 1200 वर्ग मीटर से बढाकर 3600 वर्ग मीटर किया गया है तथा अलग- अलग प्रवेश और निकास द्वार का प्रावधान किया गया है। दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए पृथक पार्किंग का प्रावधान किया गया है। 4.19 करोड़ रुपये की लागत से 12 मीटर चौड़ा ऊपरी पैदल पुल (एफओबी) का निर्माण किया गया है जिसमें रेम्प और कवरिंग शेड़ का भी प्रावधान किया गया है। मौजूदा प्लेटफ़ॉर्म शेल्टरों मे 150 वर्ग मीटर का विस्तार किया गया है। प्लेटफॉर्मों के 4197 वर्ग मीटर सतह को नवीनीकृत किया गया है। स्टेशन भवन के अन्दर 300 वर्ग मीटर में कलात्मक चित्र बनाये गये है। खैरथल रेलवे स्टेशन पर नये प्रतीक्षा कक्ष बनाये गये हैं । आधुनिक फिटिंग के साथ मौजूदा शौचालय ब्लॉकों का नवीनीकरण किया गया है। दिव्यांग जनों के लिए विशेष प्रावधान किये गये है जिसमें हेल्प बूथ, शौचालय, वाटर बूथ, रेम्प, टिकट विंडो, साईनेज, कुर्सीयां आदि शामिल हैं। खैरथल रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास से यहां आनेवाले यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी। अब आसपास के क्षेत्र की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने में मदद मिलेगी और इस तरह के परिवहन केंद्र के विकास से आर्थिक अवसरों में और अधिक वृद्धि होगी तथा सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। मुख्य विशेषताएँ सर्कुलेटिंग एरिया का विकास अलग-अलग प्रवेश व निकास द्वार समुचित और पर्याप्त पार्किंग प्रवेश हाल साइनेज की सुविधा वेटिंग रूम स्टेशन बिल्डिंग का नया स्वरूप प्लेटफार्म शेल्टर दिव्यांगजन सुविधाएं फुट ओवर ब्रिज

Girwa, Udaipur | Jul 14, 2026

मुलभुत सुविधाओं को तरसता उदयपुर का यह गांव - क्या भारत देश इस प्रकार बनेगा विकाशशील ? आखिर कौन समझेगा इन नन्हें मुने बच्चों का दर्द?
Government of Rajasthan District Collector & Magistrate - Udaipur @topfans News 24 Udaipur Mannalal Rawat Phool Singh Meena MLA CMO Rajasthan Bhajanlal Sharma Department of Education, Rajasthan BSNL India 
#education #mobilenetwork #BSNL #viralpost #udaipur #nonfollowers #सड़क #viralreels

मुलभुत सुविधाओं को तरसता उदयपुर का यह गांव - क्या भारत देश इस प्रकार बनेगा विकाशशील ? आखिर कौन समझेगा इन नन्हें मुने बच्चों का दर्द? Government of Rajasthan District Collector & Magistrate - Udaipur @topfans News 24 Udaipur Mannalal Rawat Phool Singh Meena MLA CMO Rajasthan Bhajanlal Sharma Department of Education, Rajasthan BSNL India #education #mobilenetwork #BSNL #viralpost #udaipur #nonfollowers #सड़क #viralreels

Girwa, Udaipur | Jul 14, 2026

उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय पर संरक्षा एवं कार्य समीक्षा बैठक का आयोजन’

महाप्रबंधक, श्री पंकज शर्मा ने संरक्षा एवं यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता पर रखते हुए की कार्याे की समीक्षा

संरक्षा हेतु उत्कृष्ट कार्य करने वाले रेल कर्मियों को भी महाप्रबंधक श्री पंकज शर्मा ने किया पुरस्कृत 
@followers @top fans Ministry of Railways, Government of India North Western Railway News 24 Udaipur
#RailwayNews #viralpost #nonfollowers
श्री पंकज शर्मा, महाप्रबंधक-उत्तर पश्चिम रेलवे की अध्यक्षता में प्रधान कार्यालय में मंगलवार, दिनांक 14 जुलाई 2026 को उत्तर पश्चिम रेलवे पर संरक्षा एवं कार्य समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में सभी विभागाध्यक्ष, चारों मंडलो के मंडल रेल प्रबन्धक (विडियों कॉन्फ्रेंस के माध्यम से) एवं अन्य अधिकारीगण सम्मलित हुए। बैठक में संरक्षा ,यात्री सुविधाओं, ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता, इंफ्रास्ट्रक्चर, कार्य निष्पादन, निर्माण कार्य, पूंजीगत आय, रेलवे ट्रैक की फेसिंग तथा आय बढ़ाने इत्यादि विषयों पर चर्चा की गई। 

श्री पंकज शर्मा ने उपस्थित सभी अधिकारियों को कहा कि संरक्षित रेल संचालन को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। संरक्षा एवं यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए सामंजस्य और समन्वय के साथ सभी कार्यो को लक्ष्यानुसार समय पर पूरा करने पर ध्यान देना है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि निर्माण परियोजनाओं और यात्री सुविधाओं के कार्यों को भी प्राथमिकता के साथ पूरा करना है। तथा कवच के कार्य को भी अतिशीघ्र पूरा किया जाए । ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता हेतु विशेष ध्यान रखना है। इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्यों के निष्पादन को गति तथा संरक्षा को प्राथमिकता पर रखते हुए सतर्कता और सजगता से कार्य करने पर भी बल दिया।

श्री पंकज शर्मा ने सभी विभागाध्यक्षों को नियमित निरीक्षण करने और संरक्षित रेल संचालन के लिए अधीनस्थ कर्मचारियों की समय समय पर काउंसलिंग कर संरक्षा अभियान चलाये जाने के निर्देश भी दिए। उन्होने मानसून के मौसम में ट्रैक की सुरक्षा व नियमित पेट्रोलिंग के साथ साथ विद्युत व संकेत उपकरणों पर विशेष निगरानी कर समुचित मेन्टेनेंस करने के निर्देश प्रदान किये ।

संरक्षा एवं कार्य समीक्षा बैठक के दौरान संरक्षा हेतु उत्कृष्ट कार्य करने वाले रेल कर्मियों को भी पुरुस्कृत किया गया । 

पुरस्कृत रेल कर्मियों में जयपुर मंडल के श्री संदीप कुमार, ट्रैक मेंटेनर- 1, अधीन वरि. अनुभाग इंजीनियर (रे.प.) झुंझुनू ने दिनांक 09.07.26 को गैंग न. 43 में चाबीवाले की ड्यूटी के दौरान 07.48 बजे किमी. 275/12-13 पर वेल्डिंग जोड़ फ्रैक्चर देखा। इन्होंने तुरंत जोड़ पर लगे Joggled फिश प्लेट बोल्ट को टाइट किया तथा लकड़ी के गुटके की पेकिंग की तथा एस एस ई (पी वे) झुंझुनू को सूचित कर लोकेशन पर तुरंत SR10 KMPH Stop Dead लगवाया। इस प्रकार इन्होंने सजगता एवं तत्परता दिखाते हुए एक संभावित गंभीर दुर्घटना को बचाया। 

जयपुर मंडल के ही श्री पवन सिंह गुर्जर, सहायक तकनीशियन (कै. एवं वै.) बांदीकुई ने दिनांक 09.07.26 को अपनी ड्यूटी के दौरान गाड़ी स. 12016 के बांदीकुई स्टेशन पर आगमन पर 19.08 बजे रोलिंग-इन परीक्षण करते समय कोच न. 251335 LWLRRM (रियर पॉवर कार) के 1.V. कपलर को लटकता हुआ पाया। इन्होंने तुरंत एस.एस.ई. (कै.एवं वै.) बांदीकुई तथा सी सी आर/जयपुर को सूचित किया, जिस पर तुरंत एस्कोर्टिंग विधुत स्टाफ एवं के. एवं वै. स्टाफ बांदीकुई ने इसे अटेंड कर सुरक्षित किया। इस प्रकार इन्होंने सजगता एवं तत्परता दिखाते हुए एक संभावित गंभीर दुर्घटना को बचाया।

जोधपुर मंडल के श्री कालूराम बैरवा, लोको पायलेट/जोधपुर  एवं श्री गोविंद राम, सहायक लोको पायलेट/जोधपुर  दिनांक 11.07.2026 को ट्रेन संख्या UP/IISD लोको नम्बर 32486+32743/ROUE में सोनू स्टेशन से लालगढ़ स्टेशन तक के लिए कार्यरत थे। चालक दल द्वारा सोनू स्टेशन पर लोको का चार्ज ग्रहण करने के उपरांत लोको के आवश्यक निरीक्षण के दौरान इन्होंने पाया कि ट्रेलिंग लोको संख्या 32743/ROUE के पहिया संख्या 10 का सेकेंडरी सस्पेंशन स्प्रिंग टूटा हुआ है। इस गंभीर खराबी की सूचना तत्काल कंट्रोल कार्यालय को दी गई। तत्पश्चात शेड की सलाह के अनुसार उक्त लोको को वहीं विफल (Failed) घोषित कर दिया गया। इस प्रकार इन्होंने सजगता एवं तत्परता दिखाते हुए एक संभावित गंभीर दुर्घटना को बचा कर उत्कृष्ट कार्य किया है।

बैठक में महाप्रबंधक श्री पंकज शर्मा ने सभी अधिकारियों को  कार्य निष्पादन को निर्धारित लक्ष्यानुसार पूरा करने के लिए दिशा-निर्देश प्रदान किए ताकि समयानुसार रेल उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सके तथा आश्वस्त किया कि मुख्यालय स्तर पर अनुमोदित होने वाले कार्यों के निष्पादन में पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा

उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय पर संरक्षा एवं कार्य समीक्षा बैठक का आयोजन’ महाप्रबंधक, श्री पंकज शर्मा ने संरक्षा एवं यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता पर रखते हुए की कार्याे की समीक्षा संरक्षा हेतु उत्कृष्ट कार्य करने वाले रेल कर्मियों को भी महाप्रबंधक श्री पंकज शर्मा ने किया पुरस्कृत @followers @top fans Ministry of Railways, Government of India North Western Railway News 24 Udaipur #RailwayNews #viralpost #nonfollowers श्री पंकज शर्मा, महाप्रबंधक-उत्तर पश्चिम रेलवे की अध्यक्षता में प्रधान कार्यालय में मंगलवार, दिनांक 14 जुलाई 2026 को उत्तर पश्चिम रेलवे पर संरक्षा एवं कार्य समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में सभी विभागाध्यक्ष, चारों मंडलो के मंडल रेल प्रबन्धक (विडियों कॉन्फ्रेंस के माध्यम से) एवं अन्य अधिकारीगण सम्मलित हुए। बैठक में संरक्षा ,यात्री सुविधाओं, ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता, इंफ्रास्ट्रक्चर, कार्य निष्पादन, निर्माण कार्य, पूंजीगत आय, रेलवे ट्रैक की फेसिंग तथा आय बढ़ाने इत्यादि विषयों पर चर्चा की गई। श्री पंकज शर्मा ने उपस्थित सभी अधिकारियों को कहा कि संरक्षित रेल संचालन को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। संरक्षा एवं यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए सामंजस्य और समन्वय के साथ सभी कार्यो को लक्ष्यानुसार समय पर पूरा करने पर ध्यान देना है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि निर्माण परियोजनाओं और यात्री सुविधाओं के कार्यों को भी प्राथमिकता के साथ पूरा करना है। तथा कवच के कार्य को भी अतिशीघ्र पूरा किया जाए । ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता हेतु विशेष ध्यान रखना है। इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्यों के निष्पादन को गति तथा संरक्षा को प्राथमिकता पर रखते हुए सतर्कता और सजगता से कार्य करने पर भी बल दिया। श्री पंकज शर्मा ने सभी विभागाध्यक्षों को नियमित निरीक्षण करने और संरक्षित रेल संचालन के लिए अधीनस्थ कर्मचारियों की समय समय पर काउंसलिंग कर संरक्षा अभियान चलाये जाने के निर्देश भी दिए। उन्होने मानसून के मौसम में ट्रैक की सुरक्षा व नियमित पेट्रोलिंग के साथ साथ विद्युत व संकेत उपकरणों पर विशेष निगरानी कर समुचित मेन्टेनेंस करने के निर्देश प्रदान किये । संरक्षा एवं कार्य समीक्षा बैठक के दौरान संरक्षा हेतु उत्कृष्ट कार्य करने वाले रेल कर्मियों को भी पुरुस्कृत किया गया । पुरस्कृत रेल कर्मियों में जयपुर मंडल के श्री संदीप कुमार, ट्रैक मेंटेनर- 1, अधीन वरि. अनुभाग इंजीनियर (रे.प.) झुंझुनू ने दिनांक 09.07.26 को गैंग न. 43 में चाबीवाले की ड्यूटी के दौरान 07.48 बजे किमी. 275/12-13 पर वेल्डिंग जोड़ फ्रैक्चर देखा। इन्होंने तुरंत जोड़ पर लगे Joggled फिश प्लेट बोल्ट को टाइट किया तथा लकड़ी के गुटके की पेकिंग की तथा एस एस ई (पी वे) झुंझुनू को सूचित कर लोकेशन पर तुरंत SR10 KMPH Stop Dead लगवाया। इस प्रकार इन्होंने सजगता एवं तत्परता दिखाते हुए एक संभावित गंभीर दुर्घटना को बचाया। जयपुर मंडल के ही श्री पवन सिंह गुर्जर, सहायक तकनीशियन (कै. एवं वै.) बांदीकुई ने दिनांक 09.07.26 को अपनी ड्यूटी के दौरान गाड़ी स. 12016 के बांदीकुई स्टेशन पर आगमन पर 19.08 बजे रोलिंग-इन परीक्षण करते समय कोच न. 251335 LWLRRM (रियर पॉवर कार) के 1.V. कपलर को लटकता हुआ पाया। इन्होंने तुरंत एस.एस.ई. (कै.एवं वै.) बांदीकुई तथा सी सी आर/जयपुर को सूचित किया, जिस पर तुरंत एस्कोर्टिंग विधुत स्टाफ एवं के. एवं वै. स्टाफ बांदीकुई ने इसे अटेंड कर सुरक्षित किया। इस प्रकार इन्होंने सजगता एवं तत्परता दिखाते हुए एक संभावित गंभीर दुर्घटना को बचाया। जोधपुर मंडल के श्री कालूराम बैरवा, लोको पायलेट/जोधपुर एवं श्री गोविंद राम, सहायक लोको पायलेट/जोधपुर दिनांक 11.07.2026 को ट्रेन संख्या UP/IISD लोको नम्बर 32486+32743/ROUE में सोनू स्टेशन से लालगढ़ स्टेशन तक के लिए कार्यरत थे। चालक दल द्वारा सोनू स्टेशन पर लोको का चार्ज ग्रहण करने के उपरांत लोको के आवश्यक निरीक्षण के दौरान इन्होंने पाया कि ट्रेलिंग लोको संख्या 32743/ROUE के पहिया संख्या 10 का सेकेंडरी सस्पेंशन स्प्रिंग टूटा हुआ है। इस गंभीर खराबी की सूचना तत्काल कंट्रोल कार्यालय को दी गई। तत्पश्चात शेड की सलाह के अनुसार उक्त लोको को वहीं विफल (Failed) घोषित कर दिया गया। इस प्रकार इन्होंने सजगता एवं तत्परता दिखाते हुए एक संभावित गंभीर दुर्घटना को बचा कर उत्कृष्ट कार्य किया है। बैठक में महाप्रबंधक श्री पंकज शर्मा ने सभी अधिकारियों को कार्य निष्पादन को निर्धारित लक्ष्यानुसार पूरा करने के लिए दिशा-निर्देश प्रदान किए ताकि समयानुसार रेल उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सके तथा आश्वस्त किया कि मुख्यालय स्तर पर अनुमोदित होने वाले कार्यों के निष्पादन में पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा

Girwa, Udaipur | Jul 14, 2026

यूसीसी के मसौदे पर लिया जनभावनाओं का फीडबैक
समान नागरिक संहिता प्रारूप समिति  की संभाग स्तरीय जनसुनवाई
डूंगरपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, सलूम्बर के प्रतिनिधियों ने भी वर्चुअली दिए सुझाव
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#viralpost #udaipur #nonfollowers #UCC
उदयपुर, 14 जुलाई। राज्य सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे पर जनसहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय संभाग स्तरीय जनसुनवाई मंगलवार को संपन्न हुई। यूसीसी प्रारूप समिति सदस्य एवं राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर बेंच के अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री बसंत सिंह छाबड़ा की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट मिनी सभागार में आयोजित जनसुनवाई में उदयपुर सहित डूंगरपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ और सलूम्बर जिलों के प्रतिनिधियों ने भी सुझाव दिए। समिति जनसुनवाई में प्राप्त सुझावों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर सरकार को प्रस्तुत करेगी।

कलक्ट्रेट मिनी सभागार में मंगलवार को संभागीय आयुक्त सुश्री प्रज्ञा केवलरमानी की उपस्थिति में जनसुनवाई प्रारंभ हुई। प्रारूप समिति सदस्य श्री छाबड़ा ने वर्चुअल माध्यम से संवाद करते हुए सुझाव आमंत्रित किए। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौडगढ, प्रतापगढ़ और सलूम्बर जिलों से बड़ी संख्या में विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधि वर्चुअल माध्यम से जुडे। उन्होंने युसीसी मसौदे को लेकर बहु विवाह पंरपरा, लीव इन रिलेशनशिप के पंजीयन की अनिवार्यता, भरण-पोषण संबंधी प्रावधानों, पैतृक संपत्ति पर अधिकार जैसे प्रावधानों को लेकर सुझाव दिए। वहीं उदयपुर के स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी खुल कर अपनी राय व्यक्त की।  इस दौरान गृह विभाग के प्रतिनिधि के रूप में प्रारूप समिति के सदस्य और संयुक्त शासन सचिव श्री मनीष गोयल , एडीएम सिटी जितेंद्र ओझा, एएसपी हर्ष कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों, के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

यूसीसी के मसौदे पर लिया जनभावनाओं का फीडबैक समान नागरिक संहिता प्रारूप समिति की संभाग स्तरीय जनसुनवाई डूंगरपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, सलूम्बर के प्रतिनिधियों ने भी वर्चुअली दिए सुझाव @followers @top fans News 24 Udaipur #viralpost #udaipur #nonfollowers #UCC उदयपुर, 14 जुलाई। राज्य सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे पर जनसहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय संभाग स्तरीय जनसुनवाई मंगलवार को संपन्न हुई। यूसीसी प्रारूप समिति सदस्य एवं राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर बेंच के अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री बसंत सिंह छाबड़ा की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट मिनी सभागार में आयोजित जनसुनवाई में उदयपुर सहित डूंगरपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ और सलूम्बर जिलों के प्रतिनिधियों ने भी सुझाव दिए। समिति जनसुनवाई में प्राप्त सुझावों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर सरकार को प्रस्तुत करेगी। कलक्ट्रेट मिनी सभागार में मंगलवार को संभागीय आयुक्त सुश्री प्रज्ञा केवलरमानी की उपस्थिति में जनसुनवाई प्रारंभ हुई। प्रारूप समिति सदस्य श्री छाबड़ा ने वर्चुअल माध्यम से संवाद करते हुए सुझाव आमंत्रित किए। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौडगढ, प्रतापगढ़ और सलूम्बर जिलों से बड़ी संख्या में विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधि वर्चुअल माध्यम से जुडे। उन्होंने युसीसी मसौदे को लेकर बहु विवाह पंरपरा, लीव इन रिलेशनशिप के पंजीयन की अनिवार्यता, भरण-पोषण संबंधी प्रावधानों, पैतृक संपत्ति पर अधिकार जैसे प्रावधानों को लेकर सुझाव दिए। वहीं उदयपुर के स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी खुल कर अपनी राय व्यक्त की। इस दौरान गृह विभाग के प्रतिनिधि के रूप में प्रारूप समिति के सदस्य और संयुक्त शासन सचिव श्री मनीष गोयल , एडीएम सिटी जितेंद्र ओझा, एएसपी हर्ष कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों, के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Girwa, Udaipur | Jul 14, 2026

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के माल ढुलाई ऑपरेशन को मज़बूत करने के लिए ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत आठ और स्ट्रक्चरल सुधारों का ऐलान किया।
Ashwini Vaishnaw Ministry of Railways, Government of India @followers @top fans News 24 Udaipur
#nonfollowers #RailwayNews #viralpost #nonfollowers #RajasthanNews
लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने, सप्लाई चेन को बेहतर बनाने, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने और साफ़ माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए नई पॉलिसी।

रेलवे इकोसिस्टम में तेज़ी से प्रोजेक्ट पूरे करने और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए सुधार: अश्विनी वैष्णव

‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को जारी रखते हुए, केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज भारतीय रेलवे को मॉडर्न बनाने के लिए आठ और स्ट्रक्चरल सुधारों का ऐलान किया। इसके साथ ही, इस पहल के तहत लागू किए गए सुधारों की कुल संख्या 17 हो गई है। नए सुधारों से माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स, कंस्ट्रक्शन के तरीके, प्रोजेक्ट पूरा करने, वैगन डिज़ाइन, स्किलिंग और बिज़नेस करने में आसानी में बड़े बदलाव आएंगे।

नई दिल्ली के रेल भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए, श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे भविष्य के लिए तैयार रेलवे सिस्टम बनाने के लिए कई सुधार कर रहा है। ये सुधार मंत्रालय के उस टारगेट का हिस्सा हैं जिसके तहत 52 हफ़्तों में 52 सुधार लागू किए जाएंगे ताकि एफिशिएंसी बढ़ाई जा सके, इनोवेशन को बढ़ावा दिया जा सके और रेलवे इकोसिस्टम को मज़बूत किया जा सके। श्री वैष्णव ने कहा कि रिफॉर्म एक्सप्रेस पहल के तहत पहले घोषित सुधारों के अच्छे नतीजे मिलने शुरू हो गए हैं।

रिफॉर्म 10: फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टेशन

श्री वैष्णव ने कहा कि भारत हर साल लगभग 340 मिलियन टन फ्लाई ऐश पैदा करता है, जिसमें से लगभग 96 मिलियन टन सीमेंट इंडस्ट्री इस्तेमाल करती है। भारतीय रेलवे ने FY 2025-26 के दौरान लगभग 13 मिलियन टन फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्ट किया, जो देश के कुल फ्लाई ऐश जेनरेशन का लगभग चार परसेंट है।

उन्होंने कहा कि फ्लाई ऐश को पारंपरिक रूप से खुले वैगनों से ट्रांसपोर्ट किया जाता रहा है, जिससे लोडिंग, ट्रांसपोर्टेशन और अनलोडिंग के दौरान धूल प्रदूषण होता है। थर्मल पावर प्लांट में बड़े ऐश तालाबों में स्टोर करने पर फ्लाई ऐश एक बड़ी एनवायरनमेंटल चुनौती भी बन जाती है।

इन समस्याओं को हल करने के लिए, भारतीय रेलवे ने फ्लाई ऐश के लिए एक नया कंटेनर वाला ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम शुरू किया है। नई पॉलिसी के तहत, ट्रांसपोर्टेशन के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किए गए ISO-स्टैंडर्ड कंटेनरों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन कंटेनरों को सीधे पावर प्लांट से टॉप-लोडिंग अरेंजमेंट के ज़रिए लोड किया जा सकता है और बिना धूल प्रदूषण पैदा किए साइड-डिस्चार्ज या न्यूमेटिक सिस्टम का इस्तेमाल करके अनलोड किया जा सकता है।

श्री वैष्णव ने कहा कि क्लोज्ड-कंटेनर सिस्टम से प्रदूषण-मुक्त ट्रांसपोर्टेशन हो सकेगा, सीमेंट प्लांट के अंदर मटेरियल की ज़रूरत होने तक सुरक्षित स्टोरेज की सुविधा मिलेगी, और लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी में काफी सुधार होगा। कंटेनरों को रीच स्टैकर्स के ज़रिए हैंडल किया जा सकता है, जिससे पावर प्लांट से सीमेंट प्लांट तक बिना किसी रुकावट के एंड-टू-एंड मूवमेंट हो सकेगा। इस सुधार से फ्लाई ऐश की रेल मूवमेंट बढ़ने, सड़क ट्रांसपोर्ट पर निर्भरता कम होने और पर्यावरण की चुनौती को आर्थिक रूप से फायदेमंद रिसोर्स में बदलने की उम्मीद है।

सुधार 11: कंटेनर सेक्टर में सुधार

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बल्क कमोडिटीज़ से आगे रेलवे माल ढुलाई में डायवर्सिफिकेशन के लिए ज़्यादा कंटेनराइजेशन की ज़रूरत है। कंटेनर ट्रैफिक को बढ़ावा देने के लिए, भारतीय रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क में एक बड़ा स्ट्रक्चरल सुधार किया है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सिस्टम के तहत, कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर (CTO) लाइसेंस चार कैटेगरी (कैटेगरी I-IV) के तहत जारी किए जाते थे, जिसमें कैटेगरी-I के लिए ₹50 करोड़ और बाकी हर कैटेगरी के लिए ₹10 करोड़ की रजिस्ट्रेशन फीस थी, साथ ही रूट-स्पेसिफिक पाबंदियां और अलग-अलग रजिस्ट्रेशन की ज़रूरतें भी थीं। इसे अब एक ही यूनिफाइड पैन-इंडिया कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंस से बदल दिया गया है।

नए फ्रेमवर्क के तहत, ऑपरेटर बिना कैटेगरी-बेस्ड पाबंदियों के पूरे इंडियन रेलवे नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेनें चला सकेंगे। रजिस्ट्रेशन सिस्टम को भी सभी रूट पर लागू ₹25 करोड़ की एक यूनिफॉर्म नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन फीस के ज़रिए आसान बनाया गया है।

श्री वैष्णव ने आगे कहा कि परमिशन बीस साल तक वैलिड रहेंगी और उसके बाद सफल ऑपरेशन के आधार पर बिना किसी रिन्यूअल या एक्सटेंशन फीस के पेमेंट के बढ़ाई जा सकती हैं। आसान लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क से बिज़नेस करने में आसानी, ज़्यादा प्राइवेट पार्टिसिपेशन को बढ़ावा, कंटेनराइजेशन में बढ़ोतरी, रेलवे में ज़्यादा नॉन-बल्क कार्गो को अट्रैक्ट करने, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने और देश के फ्रेट इकोसिस्टम को मज़बूत करने की उम्मीद है।

रिफॉर्म 12: फर्टिलाइजर ट्रांसपोर्टेशन

एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए फर्टिलाइजर मूवमेंट की अहमियत बताते हुए, श्री वैष्णव ने कहा कि इंडियन रेलवे अभी देश में लगभग 85 परसेंट फर्टिलाइजर ट्रांसपोर्टेशन संभालता है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा फ्रेट चार्जिंग सिस्टम में लगभग पचास अलग-अलग स्लैब थे, जिससे ऑपरेशन मुश्किल हो गए थे। नए रिफॉर्म के तहत, फ्रेट चार्ज को प्रति टन प्रति किलोमीटर के आधार पर आसान कर दिया गया है, जिसमें तीन तरह के टैरिफ स्ट्रक्चर को तर्कसंगत बनाया गया है।

यह रिफॉर्म कंटेनर के ज़रिए फर्टिलाइजर के ट्रांसपोर्टेशन की भी इजाज़त देता है। पहले के सिस्टम के उलट, जहाँ एक ही जगह पर पूरी अनलोडिंग होने तक पूरा रेक रोका जाता था,अलग-अलग कंटेनरों को अब मांग के अनुसार रेक पॉइंट पर अनलोड और संग्रहीत किया जा सकता है। इससे वितरकों की आवश्यकताओं और उठाने की क्षमता के आधार पर चरणबद्ध वितरण संभव हो सकेगा।

मंत्री ने कहा कि कंटेनरीकृत आवाजाही से वैगन टर्नअराउंड में सुधार होगा, रेक की देरी कम होगी, लचीले वितरण की सुविधा होगी, उर्वरकों को बारिश और मौसम से संबंधित क्षति से बचाया जाएगा और समग्र रसद दक्षता में सुधार होगा।

सुधार 13: रेलवे परियोजनाओं और कार्यों में कारीगरों को कुशल बनाने की नीति

श्री वैष्णव ने कहा कि रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सुरक्षा-संवेदनशील संचालन शामिल होता है, जिसमें विशेष कौशल, सटीक इंजीनियरिंग और सख्त गुणवत्ता मानकों के पालन की आवश्यकता होती है।

सक्षम जनशक्ति की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय रेलवे ने रेलवे परियोजनाओं और कार्यों में लगे कारीगरों को कुशल बनाने के लिए एक व्यापक नीति पेश की है। यह नीति वेल्डिंग, फिटिंग, चिनाई और अन्य विशेष निर्माण गतिविधियों जैसे महत्वपूर्ण व्यवसायों में लगे श्रमिकों की पहचान, मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए एक संरचित ढांचा स्थापित करती है।

नए ढांचे के तहत, परियोजना-विशिष्ट कौशल आवश्यकताओं को परिभाषित किया जाएगा और श्रमिकों को नामित परीक्षण अधिकारियों के माध्यम से व्यावहारिक और मौखिक मूल्यांकन से गुजरना होगा। सफल उम्मीदवारों को लाइव सत्यापन डेटाबेस से जुड़े क्यूआर कोड-सक्षम कौशल प्रमाणपत्र प्राप्त होंगे।

मंत्री ने कहा कि नीति का कार्यान्वयन पुलों और सुरंगों सहित प्रमुख और जटिल रेलवे परियोजनाओं के साथ शुरू होगा, और अगले चौबीस महीनों में सभी क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों में इसका विस्तार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पहल यह सुनिश्चित करेगी कि केवल प्रमाणित कारीगरों और पर्यवेक्षकों को विशेष रेलवे कार्यों में तैनात किया जाएगा, भारतीय रेलवे में कौशल मूल्यांकन को मानकीकृत किया जाएगा, क्रेडेंशियल्स के वास्तविक समय सत्यापन की सुविधा होगी, कारीगरी में सुधार होगा, गुणवत्ता आश्वासन को मजबूत किया जाएगा और देश के बुनियादी ढांचे क्षेत्र में कौशल उन्नयन को बढ़ावा दिया जाएगा।

सुधार 14: निर्माण सुधार

श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस साल की शुरुआत में शुरू किए गए ठेकेदार योग्यता सुधारों की सफलता के बाद, भारतीय रेलवे ने अब निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और परियोजना निष्पादन में सुधार के लिए सुधारों का एक और बड़ा कदम उठाया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सुधारों का उद्देश्य गंभीर और सक्षम ठेकेदारों को प्रोत्साहित करना, निर्माण की गुणवत्ता में सुधार करना, विवादों को कम करना और रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर पूरा करना सुनिश्चित करना है।

सुधारों के हिस्से के रूप में, 10 प्रतिशत प्रदर्शन सुरक्षा अब चालू बिलों से कटौती के माध्यम से वसूल किए जाने के बजाय अनुबंध के प्रारंभ में प्राप्त की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल गंभीर ठेकेदार ही रेलवे परियोजनाओं में भाग लें और निष्पादन के दौरान जवाबदेही मजबूत होगी

मुकदमेबाजी-संचालित अनुबंध प्रथाओं को हतोत्साहित करने के लिए, सख्त पात्रता मानदंड भी पेश किए गए हैं। जिन ठेकेदारों के मुकदमे उनकी कुल संपत्ति के 50 प्रतिशत से अधिक लंबित हैं, वे रेलवे निविदाओं में भाग लेने के पात्र नहीं होंगे।

सुधारों में परियोजना निष्पादन के दौरान जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने और निर्माण-संबंधी जोखिमों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठेकेदार के सभी जोखिम बीमा और व्यावसायिक क्षतिपूर्ति बीमा की शुरुआत की गई है।

श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे ने विवादों को कम करने और परियोजनाओं को समय पर शुरू करने की सुविधा के लिए एक स्पष्ट रूप से परिभाषित और अनुक्रमिक भूमि हस्तांतरण तंत्र भी स्थापित किया है।

मंत्री ने भूमि अधिग्रहण के शुरू से अंत तक प्रबंधन के लिए सीआरआईएस द्वारा विकसित एक वेब-आधारित प्लेटफॉर्म रेल भूमि का भी उल्लेख किया। यह प्लेटफ़ॉर्म आईआरपीएसएम, आईपीएएस और एचआरएमएस सहित विभिन्न रेलवे अनुप्रयोगों को एकीकृत करता है, जिससे सूचनाओं का निर्बाध आदान-प्रदान, प्रमुख भूमि अधिग्रहण चरणों की ऑनलाइन प्रोसेसिंग, कुशल वर्कफ़्लो प्रबंधन और डैशबोर्ड और प्रबंधन सूचना प्रणालियों के माध्यम से वास्तविक समय की निगरानी संभव हो पाती है। इस पोर्टल से भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने, परियोजना योजना में सुधार करने और रेलवे बुनियादी ढांचे के कार्यों के समय पर निष्पादन की सुविधा मिलने की उम्मीद है
सुधार 15: वैगन डिज़ाइन अनुमोदन के लिए नीति

एक अन्य प्रमुख संरचनात्मक सुधार पर प्रकाश डालते हुए, श्री वैष्णव ने वैगन डिजाइन अनुमोदन के लिए एक नई नीति की घोषणा की, जिसका उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना और विशेष माल ढुलाई वैगनों को डिजाइन करने में उद्योग की भागीदारी को सक्षम करना है।

मंत्री ने कहा कि मौजूदा प्रणाली के तहत, वैगन डिजाइन बड़े पैमाने पर अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित किए गए थे, जिसमें बोगियों, कप्लर्स और ब्रेकिंग सिस्टम जैसे कई महत्वपूर्ण घटकों को निर्धारित मानकों तक सीमित रखा गया था। यह सीमित डिज़ाइन लचीलेपन और विवश नवीनता है।

नई नीति के तहत, डिजाइनर, निर्माता और उद्योग विशिष्ट वस्तुओं और परिचालन आवश्यकताओं के अनुकूल वैगन डिजाइन विकसित और प्रस्तावित करने में सक्षम होंगे।

आरडीएसओ प्रस्तावित डिजाइन का मूल्यांकन करेगा और सैद्धांतिक मंजूरी मिलने पर एक प्रोटोटाइप के विकास की अनुमति देगा। विस्तृत डिजाइन, प्रोटोटाइप निर्माण और कठोर स्थैतिक और गतिशील परीक्षण के बाद, एक पूर्ण रेक को सुरक्षा प्रमाणीकरण, सी द्वारा निरीक्षण से पहले फील्ड परीक्षणों से गुजरना होगा।

रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त द्वारा निरीक्षण और सेवा में शामिल करने के लिए रेलवे बोर्ड से मंज़ूरी।

श्री वैष्णव ने कहा कि नया फ़्रेमवर्क स्टील, पेट्रोलियम, केमिकल, दूध, प्लास्टिक और अन्य उद्योगों के लिए खास तरह के वैगन बनाने में मदद करेगा, जिन्हें कस्टमाइज़्ड ट्रांसपोर्टेशन समाधान की ज़रूरत होती है। इस सुधार से वैगन डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक नया इकोसिस्टम बनने, तकनीकी इनोवेशन को बढ़ावा मिलने और सभी सेक्टर में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

सुधार 16: पेट्रोलियम उत्पादों का ट्रांसपोर्टेशन

श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पेट्रोलियम, तेल और लुब्रिकेंट (POL) उत्पादों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए खास तरह के टैंक वैगन की ज़रूरत होती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सिस्टम, जिसके तहत सभी टैंक वैगन भारतीय रेलवे के पास होते थे, तेल कंपनियों को अपनी ऑपरेशनल ज़रूरतों के हिसाब से खास वैगन लाने की आज़ादी नहीं देता था।

इस समस्या को हल करने के लिए, भारतीय रेलवे ने पेट्रोलियम टैंक वैगन के डिज़ाइन और उन्हें सेवा में लाने से जुड़ी संरचनात्मक बाधाओं को हटा दिया है। अब तेल कंपनियाँ सीधे खास वैगन खरीद सकेंगी या लीज़िंग एजेंसियों के ज़रिए उन्हें लीज़ पर ले सकेंगी और खास ज़रूरतों के लिए भारतीय रेलवे नेटवर्क पर चला सकेंगी।

मंत्री ने कहा कि इस सुधार से खास टैंक वैगन लाने, लॉजिस्टिक्स प्लानिंग बेहतर करने, ट्रांसपोर्टेशन लागत कम करने, रेल के ज़रिए पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही बढ़ाने और सड़क मार्ग से ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े जोखिमों (जैसे उत्पाद का नुकसान और मिलावट) को कम करने में मदद मिलेगी।

सुधार 17: अनाज, आटा और दालों का ट्रांसपोर्टेशन

श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे ने अनाज, आटा और दालों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए भी एक बड़ा सुधार किया है, जिसमें माल ढुलाई शुल्क को आसान बनाया गया है और कंटेनर के ज़रिए आवाजाही को बढ़ावा दिया गया है।

नई पॉलिसी के तहत, पहले के जटिल स्लैब-आधारित माल ढुलाई स्ट्रक्चर की जगह अब आसान 'प्रति टन प्रति किलोमीटर' दर वाला स्ट्रक्चर लागू किया गया है। यह सुधार कंटेनर के ज़रिए अनाज, आटा और दालों के ट्रांसपोर्टेशन की इजाज़त देता है, जिससे ऑपरेशनल ज़रूरतों के हिसाब से आसानी से हैंडलिंग, लचीला स्टोरेज और चरणों में वितरण संभव हो पाता है।

मंत्री ने कहा कि कंटेनर को विक्रेता या खरीदार के परिसर में रखा जा सकता है और माँग के अनुसार वितरित किया जा सकता है, इसके लिए पूरी ट्रेन (रेक) को रोके रखने की ज़रूरत नहीं होती। चूँकि कंटेनर सील रहते हैं, इसलिए मिलावट की संभावना काफी कम हो जाती है, जिससे अनाज के ट्रांसपोर्टेशन की सुरक्षा और गुणवत्ता बेहतर होती है और साथ ही लॉजिस्टिक्स क्षमता भी बढ़ती है। 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' पहल के तहत, भारतीय रेलवे ने पहले नौ बड़े स्ट्रक्चरल सुधार लागू किए थे। इनमें ट्रेन के अंदर लगातार सफाई, गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों का विस्तार, रेलटेक पॉलिसी और पोर्टल, रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल का डिजिटलीकरण, नमक और ऑटोमोबाइल ट्रांसपोर्ट के लिए खास कंटेनर, निर्माण-गुणवत्ता में सात सुधार, टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के आसान नियम, और बोर्डिंग पॉइंट में डिजिटल बदलाव शामिल हैं।

श्री वैष्णव ने कहा कि नए सुधारों से माल ढुलाई का एक बड़ा हिस्सा सड़क से रेल की ओर ले जाने में मदद मिलेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और पर्यावरण को काफी फायदा होगा। उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन की तुलना में रेल परिवहन से लगभग 90 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन होता है। मंत्री ने कहा कि अतिरिक्त सामानों के लिए धीरे-धीरे कंटेनर के इस्तेमाल को बढ़ाने से भारतीय रेलवे का माल ढुलाई का दायरा पारंपरिक थोक कार्गो से आगे बढ़ेगा और उसका माल ढुलाई का कारोबार और मजबूत होगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के माल ढुलाई ऑपरेशन को मज़बूत करने के लिए ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत आठ और स्ट्रक्चरल सुधारों का ऐलान किया। Ashwini Vaishnaw Ministry of Railways, Government of India @followers @top fans News 24 Udaipur #nonfollowers #RailwayNews #viralpost #nonfollowers #RajasthanNews लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने, सप्लाई चेन को बेहतर बनाने, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने और साफ़ माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए नई पॉलिसी। रेलवे इकोसिस्टम में तेज़ी से प्रोजेक्ट पूरे करने और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए सुधार: अश्विनी वैष्णव ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को जारी रखते हुए, केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज भारतीय रेलवे को मॉडर्न बनाने के लिए आठ और स्ट्रक्चरल सुधारों का ऐलान किया। इसके साथ ही, इस पहल के तहत लागू किए गए सुधारों की कुल संख्या 17 हो गई है। नए सुधारों से माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स, कंस्ट्रक्शन के तरीके, प्रोजेक्ट पूरा करने, वैगन डिज़ाइन, स्किलिंग और बिज़नेस करने में आसानी में बड़े बदलाव आएंगे। नई दिल्ली के रेल भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए, श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे भविष्य के लिए तैयार रेलवे सिस्टम बनाने के लिए कई सुधार कर रहा है। ये सुधार मंत्रालय के उस टारगेट का हिस्सा हैं जिसके तहत 52 हफ़्तों में 52 सुधार लागू किए जाएंगे ताकि एफिशिएंसी बढ़ाई जा सके, इनोवेशन को बढ़ावा दिया जा सके और रेलवे इकोसिस्टम को मज़बूत किया जा सके। श्री वैष्णव ने कहा कि रिफॉर्म एक्सप्रेस पहल के तहत पहले घोषित सुधारों के अच्छे नतीजे मिलने शुरू हो गए हैं। रिफॉर्म 10: फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टेशन श्री वैष्णव ने कहा कि भारत हर साल लगभग 340 मिलियन टन फ्लाई ऐश पैदा करता है, जिसमें से लगभग 96 मिलियन टन सीमेंट इंडस्ट्री इस्तेमाल करती है। भारतीय रेलवे ने FY 2025-26 के दौरान लगभग 13 मिलियन टन फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्ट किया, जो देश के कुल फ्लाई ऐश जेनरेशन का लगभग चार परसेंट है। उन्होंने कहा कि फ्लाई ऐश को पारंपरिक रूप से खुले वैगनों से ट्रांसपोर्ट किया जाता रहा है, जिससे लोडिंग, ट्रांसपोर्टेशन और अनलोडिंग के दौरान धूल प्रदूषण होता है। थर्मल पावर प्लांट में बड़े ऐश तालाबों में स्टोर करने पर फ्लाई ऐश एक बड़ी एनवायरनमेंटल चुनौती भी बन जाती है। इन समस्याओं को हल करने के लिए, भारतीय रेलवे ने फ्लाई ऐश के लिए एक नया कंटेनर वाला ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम शुरू किया है। नई पॉलिसी के तहत, ट्रांसपोर्टेशन के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किए गए ISO-स्टैंडर्ड कंटेनरों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन कंटेनरों को सीधे पावर प्लांट से टॉप-लोडिंग अरेंजमेंट के ज़रिए लोड किया जा सकता है और बिना धूल प्रदूषण पैदा किए साइड-डिस्चार्ज या न्यूमेटिक सिस्टम का इस्तेमाल करके अनलोड किया जा सकता है। श्री वैष्णव ने कहा कि क्लोज्ड-कंटेनर सिस्टम से प्रदूषण-मुक्त ट्रांसपोर्टेशन हो सकेगा, सीमेंट प्लांट के अंदर मटेरियल की ज़रूरत होने तक सुरक्षित स्टोरेज की सुविधा मिलेगी, और लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी में काफी सुधार होगा। कंटेनरों को रीच स्टैकर्स के ज़रिए हैंडल किया जा सकता है, जिससे पावर प्लांट से सीमेंट प्लांट तक बिना किसी रुकावट के एंड-टू-एंड मूवमेंट हो सकेगा। इस सुधार से फ्लाई ऐश की रेल मूवमेंट बढ़ने, सड़क ट्रांसपोर्ट पर निर्भरता कम होने और पर्यावरण की चुनौती को आर्थिक रूप से फायदेमंद रिसोर्स में बदलने की उम्मीद है। सुधार 11: कंटेनर सेक्टर में सुधार केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बल्क कमोडिटीज़ से आगे रेलवे माल ढुलाई में डायवर्सिफिकेशन के लिए ज़्यादा कंटेनराइजेशन की ज़रूरत है। कंटेनर ट्रैफिक को बढ़ावा देने के लिए, भारतीय रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क में एक बड़ा स्ट्रक्चरल सुधार किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सिस्टम के तहत, कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर (CTO) लाइसेंस चार कैटेगरी (कैटेगरी I-IV) के तहत जारी किए जाते थे, जिसमें कैटेगरी-I के लिए ₹50 करोड़ और बाकी हर कैटेगरी के लिए ₹10 करोड़ की रजिस्ट्रेशन फीस थी, साथ ही रूट-स्पेसिफिक पाबंदियां और अलग-अलग रजिस्ट्रेशन की ज़रूरतें भी थीं। इसे अब एक ही यूनिफाइड पैन-इंडिया कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंस से बदल दिया गया है। नए फ्रेमवर्क के तहत, ऑपरेटर बिना कैटेगरी-बेस्ड पाबंदियों के पूरे इंडियन रेलवे नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेनें चला सकेंगे। रजिस्ट्रेशन सिस्टम को भी सभी रूट पर लागू ₹25 करोड़ की एक यूनिफॉर्म नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन फीस के ज़रिए आसान बनाया गया है। श्री वैष्णव ने आगे कहा कि परमिशन बीस साल तक वैलिड रहेंगी और उसके बाद सफल ऑपरेशन के आधार पर बिना किसी रिन्यूअल या एक्सटेंशन फीस के पेमेंट के बढ़ाई जा सकती हैं। आसान लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क से बिज़नेस करने में आसानी, ज़्यादा प्राइवेट पार्टिसिपेशन को बढ़ावा, कंटेनराइजेशन में बढ़ोतरी, रेलवे में ज़्यादा नॉन-बल्क कार्गो को अट्रैक्ट करने, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने और देश के फ्रेट इकोसिस्टम को मज़बूत करने की उम्मीद है। रिफॉर्म 12: फर्टिलाइजर ट्रांसपोर्टेशन एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए फर्टिलाइजर मूवमेंट की अहमियत बताते हुए, श्री वैष्णव ने कहा कि इंडियन रेलवे अभी देश में लगभग 85 परसेंट फर्टिलाइजर ट्रांसपोर्टेशन संभालता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा फ्रेट चार्जिंग सिस्टम में लगभग पचास अलग-अलग स्लैब थे, जिससे ऑपरेशन मुश्किल हो गए थे। नए रिफॉर्म के तहत, फ्रेट चार्ज को प्रति टन प्रति किलोमीटर के आधार पर आसान कर दिया गया है, जिसमें तीन तरह के टैरिफ स्ट्रक्चर को तर्कसंगत बनाया गया है। यह रिफॉर्म कंटेनर के ज़रिए फर्टिलाइजर के ट्रांसपोर्टेशन की भी इजाज़त देता है। पहले के सिस्टम के उलट, जहाँ एक ही जगह पर पूरी अनलोडिंग होने तक पूरा रेक रोका जाता था,अलग-अलग कंटेनरों को अब मांग के अनुसार रेक पॉइंट पर अनलोड और संग्रहीत किया जा सकता है। इससे वितरकों की आवश्यकताओं और उठाने की क्षमता के आधार पर चरणबद्ध वितरण संभव हो सकेगा। मंत्री ने कहा कि कंटेनरीकृत आवाजाही से वैगन टर्नअराउंड में सुधार होगा, रेक की देरी कम होगी, लचीले वितरण की सुविधा होगी, उर्वरकों को बारिश और मौसम से संबंधित क्षति से बचाया जाएगा और समग्र रसद दक्षता में सुधार होगा। सुधार 13: रेलवे परियोजनाओं और कार्यों में कारीगरों को कुशल बनाने की नीति श्री वैष्णव ने कहा कि रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सुरक्षा-संवेदनशील संचालन शामिल होता है, जिसमें विशेष कौशल, सटीक इंजीनियरिंग और सख्त गुणवत्ता मानकों के पालन की आवश्यकता होती है। सक्षम जनशक्ति की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय रेलवे ने रेलवे परियोजनाओं और कार्यों में लगे कारीगरों को कुशल बनाने के लिए एक व्यापक नीति पेश की है। यह नीति वेल्डिंग, फिटिंग, चिनाई और अन्य विशेष निर्माण गतिविधियों जैसे महत्वपूर्ण व्यवसायों में लगे श्रमिकों की पहचान, मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए एक संरचित ढांचा स्थापित करती है। नए ढांचे के तहत, परियोजना-विशिष्ट कौशल आवश्यकताओं को परिभाषित किया जाएगा और श्रमिकों को नामित परीक्षण अधिकारियों के माध्यम से व्यावहारिक और मौखिक मूल्यांकन से गुजरना होगा। सफल उम्मीदवारों को लाइव सत्यापन डेटाबेस से जुड़े क्यूआर कोड-सक्षम कौशल प्रमाणपत्र प्राप्त होंगे। मंत्री ने कहा कि नीति का कार्यान्वयन पुलों और सुरंगों सहित प्रमुख और जटिल रेलवे परियोजनाओं के साथ शुरू होगा, और अगले चौबीस महीनों में सभी क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों में इसका विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहल यह सुनिश्चित करेगी कि केवल प्रमाणित कारीगरों और पर्यवेक्षकों को विशेष रेलवे कार्यों में तैनात किया जाएगा, भारतीय रेलवे में कौशल मूल्यांकन को मानकीकृत किया जाएगा, क्रेडेंशियल्स के वास्तविक समय सत्यापन की सुविधा होगी, कारीगरी में सुधार होगा, गुणवत्ता आश्वासन को मजबूत किया जाएगा और देश के बुनियादी ढांचे क्षेत्र में कौशल उन्नयन को बढ़ावा दिया जाएगा। सुधार 14: निर्माण सुधार श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस साल की शुरुआत में शुरू किए गए ठेकेदार योग्यता सुधारों की सफलता के बाद, भारतीय रेलवे ने अब निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और परियोजना निष्पादन में सुधार के लिए सुधारों का एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सुधारों का उद्देश्य गंभीर और सक्षम ठेकेदारों को प्रोत्साहित करना, निर्माण की गुणवत्ता में सुधार करना, विवादों को कम करना और रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर पूरा करना सुनिश्चित करना है। सुधारों के हिस्से के रूप में, 10 प्रतिशत प्रदर्शन सुरक्षा अब चालू बिलों से कटौती के माध्यम से वसूल किए जाने के बजाय अनुबंध के प्रारंभ में प्राप्त की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल गंभीर ठेकेदार ही रेलवे परियोजनाओं में भाग लें और निष्पादन के दौरान जवाबदेही मजबूत होगी मुकदमेबाजी-संचालित अनुबंध प्रथाओं को हतोत्साहित करने के लिए, सख्त पात्रता मानदंड भी पेश किए गए हैं। जिन ठेकेदारों के मुकदमे उनकी कुल संपत्ति के 50 प्रतिशत से अधिक लंबित हैं, वे रेलवे निविदाओं में भाग लेने के पात्र नहीं होंगे। सुधारों में परियोजना निष्पादन के दौरान जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने और निर्माण-संबंधी जोखिमों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठेकेदार के सभी जोखिम बीमा और व्यावसायिक क्षतिपूर्ति बीमा की शुरुआत की गई है। श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे ने विवादों को कम करने और परियोजनाओं को समय पर शुरू करने की सुविधा के लिए एक स्पष्ट रूप से परिभाषित और अनुक्रमिक भूमि हस्तांतरण तंत्र भी स्थापित किया है। मंत्री ने भूमि अधिग्रहण के शुरू से अंत तक प्रबंधन के लिए सीआरआईएस द्वारा विकसित एक वेब-आधारित प्लेटफॉर्म रेल भूमि का भी उल्लेख किया। यह प्लेटफ़ॉर्म आईआरपीएसएम, आईपीएएस और एचआरएमएस सहित विभिन्न रेलवे अनुप्रयोगों को एकीकृत करता है, जिससे सूचनाओं का निर्बाध आदान-प्रदान, प्रमुख भूमि अधिग्रहण चरणों की ऑनलाइन प्रोसेसिंग, कुशल वर्कफ़्लो प्रबंधन और डैशबोर्ड और प्रबंधन सूचना प्रणालियों के माध्यम से वास्तविक समय की निगरानी संभव हो पाती है। इस पोर्टल से भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने, परियोजना योजना में सुधार करने और रेलवे बुनियादी ढांचे के कार्यों के समय पर निष्पादन की सुविधा मिलने की उम्मीद है सुधार 15: वैगन डिज़ाइन अनुमोदन के लिए नीति एक अन्य प्रमुख संरचनात्मक सुधार पर प्रकाश डालते हुए, श्री वैष्णव ने वैगन डिजाइन अनुमोदन के लिए एक नई नीति की घोषणा की, जिसका उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना और विशेष माल ढुलाई वैगनों को डिजाइन करने में उद्योग की भागीदारी को सक्षम करना है। मंत्री ने कहा कि मौजूदा प्रणाली के तहत, वैगन डिजाइन बड़े पैमाने पर अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित किए गए थे, जिसमें बोगियों, कप्लर्स और ब्रेकिंग सिस्टम जैसे कई महत्वपूर्ण घटकों को निर्धारित मानकों तक सीमित रखा गया था। यह सीमित डिज़ाइन लचीलेपन और विवश नवीनता है। नई नीति के तहत, डिजाइनर, निर्माता और उद्योग विशिष्ट वस्तुओं और परिचालन आवश्यकताओं के अनुकूल वैगन डिजाइन विकसित और प्रस्तावित करने में सक्षम होंगे। आरडीएसओ प्रस्तावित डिजाइन का मूल्यांकन करेगा और सैद्धांतिक मंजूरी मिलने पर एक प्रोटोटाइप के विकास की अनुमति देगा। विस्तृत डिजाइन, प्रोटोटाइप निर्माण और कठोर स्थैतिक और गतिशील परीक्षण के बाद, एक पूर्ण रेक को सुरक्षा प्रमाणीकरण, सी द्वारा निरीक्षण से पहले फील्ड परीक्षणों से गुजरना होगा। रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त द्वारा निरीक्षण और सेवा में शामिल करने के लिए रेलवे बोर्ड से मंज़ूरी। श्री वैष्णव ने कहा कि नया फ़्रेमवर्क स्टील, पेट्रोलियम, केमिकल, दूध, प्लास्टिक और अन्य उद्योगों के लिए खास तरह के वैगन बनाने में मदद करेगा, जिन्हें कस्टमाइज़्ड ट्रांसपोर्टेशन समाधान की ज़रूरत होती है। इस सुधार से वैगन डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक नया इकोसिस्टम बनने, तकनीकी इनोवेशन को बढ़ावा मिलने और सभी सेक्टर में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। सुधार 16: पेट्रोलियम उत्पादों का ट्रांसपोर्टेशन श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पेट्रोलियम, तेल और लुब्रिकेंट (POL) उत्पादों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए खास तरह के टैंक वैगन की ज़रूरत होती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सिस्टम, जिसके तहत सभी टैंक वैगन भारतीय रेलवे के पास होते थे, तेल कंपनियों को अपनी ऑपरेशनल ज़रूरतों के हिसाब से खास वैगन लाने की आज़ादी नहीं देता था। इस समस्या को हल करने के लिए, भारतीय रेलवे ने पेट्रोलियम टैंक वैगन के डिज़ाइन और उन्हें सेवा में लाने से जुड़ी संरचनात्मक बाधाओं को हटा दिया है। अब तेल कंपनियाँ सीधे खास वैगन खरीद सकेंगी या लीज़िंग एजेंसियों के ज़रिए उन्हें लीज़ पर ले सकेंगी और खास ज़रूरतों के लिए भारतीय रेलवे नेटवर्क पर चला सकेंगी। मंत्री ने कहा कि इस सुधार से खास टैंक वैगन लाने, लॉजिस्टिक्स प्लानिंग बेहतर करने, ट्रांसपोर्टेशन लागत कम करने, रेल के ज़रिए पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही बढ़ाने और सड़क मार्ग से ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े जोखिमों (जैसे उत्पाद का नुकसान और मिलावट) को कम करने में मदद मिलेगी। सुधार 17: अनाज, आटा और दालों का ट्रांसपोर्टेशन श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे ने अनाज, आटा और दालों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए भी एक बड़ा सुधार किया है, जिसमें माल ढुलाई शुल्क को आसान बनाया गया है और कंटेनर के ज़रिए आवाजाही को बढ़ावा दिया गया है। नई पॉलिसी के तहत, पहले के जटिल स्लैब-आधारित माल ढुलाई स्ट्रक्चर की जगह अब आसान 'प्रति टन प्रति किलोमीटर' दर वाला स्ट्रक्चर लागू किया गया है। यह सुधार कंटेनर के ज़रिए अनाज, आटा और दालों के ट्रांसपोर्टेशन की इजाज़त देता है, जिससे ऑपरेशनल ज़रूरतों के हिसाब से आसानी से हैंडलिंग, लचीला स्टोरेज और चरणों में वितरण संभव हो पाता है। मंत्री ने कहा कि कंटेनर को विक्रेता या खरीदार के परिसर में रखा जा सकता है और माँग के अनुसार वितरित किया जा सकता है, इसके लिए पूरी ट्रेन (रेक) को रोके रखने की ज़रूरत नहीं होती। चूँकि कंटेनर सील रहते हैं, इसलिए मिलावट की संभावना काफी कम हो जाती है, जिससे अनाज के ट्रांसपोर्टेशन की सुरक्षा और गुणवत्ता बेहतर होती है और साथ ही लॉजिस्टिक्स क्षमता भी बढ़ती है। 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' पहल के तहत, भारतीय रेलवे ने पहले नौ बड़े स्ट्रक्चरल सुधार लागू किए थे। इनमें ट्रेन के अंदर लगातार सफाई, गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों का विस्तार, रेलटेक पॉलिसी और पोर्टल, रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल का डिजिटलीकरण, नमक और ऑटोमोबाइल ट्रांसपोर्ट के लिए खास कंटेनर, निर्माण-गुणवत्ता में सात सुधार, टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के आसान नियम, और बोर्डिंग पॉइंट में डिजिटल बदलाव शामिल हैं। श्री वैष्णव ने कहा कि नए सुधारों से माल ढुलाई का एक बड़ा हिस्सा सड़क से रेल की ओर ले जाने में मदद मिलेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और पर्यावरण को काफी फायदा होगा। उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन की तुलना में रेल परिवहन से लगभग 90 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन होता है। मंत्री ने कहा कि अतिरिक्त सामानों के लिए धीरे-धीरे कंटेनर के इस्तेमाल को बढ़ाने से भारतीय रेलवे का माल ढुलाई का दायरा पारंपरिक थोक कार्गो से आगे बढ़ेगा और उसका माल ढुलाई का कारोबार और मजबूत होगा।

Girwa, Udaipur | Jul 14, 2026