चार माह से अंधेरे में जी रहा ललई गांव, आठ बार जला ट्रांसफार्मर
ग्रामीणों ने 63 केवीए ट्रांसफार्मर लगाने की उठाई मांग
रिपोर्ट: मनोज कुमार बिंद
प्रयागराज। बारा जारी विद्युत उपकेंद्र से जुड़े ललई गांव में पिछले करीब चार माह से बिजली व्यवस्था बदहाल है। लगभग एक हजार की आबादी और 84 से अधिक बिजली कनेक्शन वाले इस गांव में पर्याप्त क्षमता का ट्रांसफार्मर न होने से बिजली आपूर्ति बार-बार बाधित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले चार महीनों में 25 केवीए का ट्रांसफार्मर आठ बार जल चुका है। कई बार नया ट्रांसफार्मर लगाने के कुछ ही घंटों के भीतर वह अधिक लोड के कारण फिर खराब हो जाता है, जिससे पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है।
बिजली न रहने से ग्रामीणों को रात के समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अंधेरे के कारण जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बढ़ गया है। छात्र ललित कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले अंधेरे में उन्हें सर्प ने काट लिया था। समय पर उपचार मिलने से उनकी जान बच गई। ग्रामीणों के अनुसार, तीन अन्य लोग भी सर्पदंश का शिकार हो चुके हैं, हालांकि सभी का समय पर इलाज होने से उनकी जान बच गई।
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार संबंधित जूनियर इंजीनियर से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। हर बार 25 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया जाता है, जो अधिक भार के चलते जल्द ही फुंक जाता है।
सुनील कुमार, श्यामलाल, श्यामबाबू, सुरेश, अजय, संतोष, नेवाल, रमेश आदिवासी, आशुतोष कुमार, लाल बहादुर, अनिल, नेम सिंह, रामचंद्र, रमाकांत, रेशमा, अर्चना, चुन्नी बेगम, गीता आदिवासी, नीरज, प्रथम, विशाल, तमन्ना बेगम, सकीना, सिकंदर, प्रदीप, अनिल सिंह, पन्ना लाल चौहान, मोहम्मद आसिन, सिया कुमारी, रामकैलाश, सुनीता, आशिक, कुसुम कली सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से तत्काल 63 केवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा बिजली भार को देखते हुए 25 केवीए का ट्रांसफार्मर पर्याप्त नहीं है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं किया गया तो उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।यदि यह खबर ब्रेकिंग न्यूज या वेब पोर्टल के लिए चाहिए, तो इसे और अधिक प्रभावशाली शीर्षक और प्रस्तुति के साथ भी तैयार किया जा सकता है।