पावर प्लांट से फैल रहे प्रदूषण से गांव ढ़ाणा नरसान के ग्रामीण बेहाल : समाधान शिविर में सौंपा मांग पत्र, जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
प्लांट से उठने वाला प्रदूषण सीधे तौर पर ग्रामीणों के जीवन और स्वास्थ्य पर डाल रहा बुरा असर : सरपंच अनुज कुमार
भिवानी, 03 अगस्त : गांव ढ़ाणा नरसान स्थित श्री ज्योति पावर प्लांट से फैल रहे भयंकर वायु एवं जल प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों और ग्राम पंचायत का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रदूषण से जनजीवन और स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों से परेशान होकर गांव की पंचायत, मौजिज लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को समाधान शिविर में मांगपत्र सौंपकर त्वरित जांच और कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है। सरपंच अनुज कुमार के नेतृत्व में मांगपत्र सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में मास्टर सुरेंद्र राहड, पूर्व सरपंच राजेंद्र नंबरदार, पूर्व बीडीसी कृष्ण कुमार, पंच राजबीर, सचिन सरौहा, राजकुमार, सतीश, पंच रणवीर, संजय, सुरेश, जितेंद्र तंवर बापोड़ा व सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश सैनी सहित गांव के अन्य सामाजिक कार्यकर्ता और पंच-सरपंच शामिल रहे।
उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने जाते गांव के सरपंच अनुज ने कहा कि हमारे गांव की भूमि पर लगभग 20 वर्ष पूर्व स्थापित श्री ज्योति पावर प्लांट अब ग्रामीणों के लिए आफत बन चुका है। वर्तमान में प्लांट के आसपास आवासीय मकान बन चुके हैं। इससे उठने वाला प्रदूषण सीधे तौर पर हमारे ग्रामीणों के जीवन और स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है। उन्होंने मांगपत्र के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि जनहित व पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस प्लांट की तत्काल प्रभाव से वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
उन्होंने बताया कि मांगपत्र के माध्यम से मांग की गई है कि श्री ज्योति पावर प्लांट की तत्काल एक संयुक्त टीम द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाए, प्लांट से निकलने वाली राख और वायु प्रदूषण का वैज्ञानिक परीक्षण करवाया जाए, आसपास के भूजल एवं पीने के पानी की गुणवत्ता का लैब टेस्ट करवाया जाए, प्लांट द्वारा छोड़े जा रहे अपशिष्ट जल और पर्यावरण मानकों के उल्लंघन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, प्लांट को पर्यावरण संरक्षण के सभी नियमों का सख्ती से पालन करने तथा प्रदूषण रोकने के प्रभावी उपाय लागू करने के निर्देश दिए जाएं।
इस मौके पर मास्टर सुरेंद्र राहड़ ने कहा कि पावर प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए सरसों के तुड़े, पराली और अन्य कृषि अवशेषों का इस्तेमाल होता है। इससे निकलने वाली जहरीली काली राख हवा में उडक़र आसपास के खेतों और घरों में जम जाती है। इससे किसानों की फसलें लगातार खराब हो रही हैं और लोगों को सांस व स्वास्थ्य संबंधी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। करीब 15 साल पहले भी इसकी शिकायत दी गई थी, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
राजेंद्र नंबरदार ने कहा कि प्लांट प्रबंधन द्वारा लगभग 12 बड़े बोरवेल लगाकर बड़े पैमाने पर भूजल का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है। इतना ही नहीं, उपयोग के बाद बचा जहरीला अपशिष्ट पानी सीधे जमीन में छोड़ा जा रहा है, जिससे गांव के पीने के पानी का टीडीएस अत्यधिक बढ़ गया है और पानी पीने योग्य नहीं रहा। जमीनी पानी खराब होने से खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी नष्ट हो रही है, जिससे कृषि पर निर्भर ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। इस दौरान समाधान शिविर में मौके पर मौजूद अधिकारियों ने निर्देश दिए कि इस मामले की तुरंत जांच की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो पूरा गांव उग्र आंदोलन के लिए विवश होगा।