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⬇️कुमौड़ की ऐतिहासिक हिलजात्रा संपन्न, लखिया बाबा के दर्शन को उमड़ा जनसैलाब⬇️
सोरघाटी की समृद्ध लोकसंस्कृति, आस्था और कृषि परंपरा की पहचान कुमौड़ की ऐतिहासिक हिलजात्रा सोमवार को श्रद्धा और उल्लास के बीच संपन्न हुई। मुख्य आकर्षण लखिया बाबा के दर्शन और आशीर्वाद के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मैदान में पहुंचे। ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक मुखौटों और लोक पात्रों के अभिनय ने माहौल को पूरी तरह लोक रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया। वहीं जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, कलाकारों और स्थानीय लोगों ने आयोजन में सहभागिता की।
हिलजात्रा की परंपरा को नेपाल की इंद्रजात्रा से जुड़ा माना जाता है। लोकमान्यता के अनुसार कुमौड़ के चार महर भाई नेपाल से मुखौटे लेकर लौटे थे, जिसके बाद यहां इस परंपरा की शुरुआत हुई। समय के साथ हिलजात्रा कृषि, पशुपालन, लोककला और ग्रामीण जीवन का जीवंत चित्रण करने वाला प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन बन गई।
लखिया बाबा के आगमन के साथ आयोजन चरम पर पहुंचा। बैल, हिरन-चीतल समेत पारंपरिक पात्रों के माध्यम से पहाड़ के खेत-खलिहान और लोकजीवन को मंचित किया गया। समिति अध्यक्ष गोपू महर ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार जताते हुए नई पीढ़ी से इस विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।