कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने वर्षा ऋतु की व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण, जल निकासी एवं साफ-सफाई के दिए निर्देश
वर्षा ऋतु में जलभराव रोकने प्रशासन सतर्क, कलेक्टर ने किया स्थल निरीक्षण
डिंडौरी वर्षा ऋतु के दौरान शहर में जलभराव एवं आपदा जैसी स्थिति की रोकथाम के उद्देश्य से कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने नगर के नर्मदा डैम घाट, शंकर घाट तथा इमली कुटी नाला का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जल निकासी व्यवस्था, नालों की साफ-सफाई एवं पेयजल प्रबंधन का जायजा लिया।
कलेक्टर श्रीमती भदौरिया ने संबंधित एजेंसी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी नालों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वर्षा का पानी बिना किसी बाधा के बाहर निकल सके और शहर में जलभराव की स्थिति निर्मित न हो। उन्होंने गंदे पानी को नर्मदा नदी में जाने से रोकने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने फिल्टर प्लांट का भी निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्षा ऋतु के दौरान पेयजल आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए फिल्टर प्लांट का नियमित एवं सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा वर्षा ऋतु में सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ सतर्कता एवं तत्परता से कार्य करें।
सीवर योजना से नर्मदा को मिल रहा संरक्षण, प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूषित जल का हो रहा उपचार
नगर परिषद डिंडौरी क्षेत्र से प्रवाहित होने वाली पवित्र एवं स्वच्छ निर्मल नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए जिला प्रशासन एवं नगर परिषद द्वारा प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया एवं नगर परिषद आयुक्त की पहल पर मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के माध्यम से संचालित सीवर योजना के अंतर्गत शहर के आठ प्रमुख नालों को ट्रैप कर उनका दूषित जल सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाया जा रहा है, जहां उसका उपचार कर पुनः उपयोग किया जा रहा है।
सीवर योजना प्रारंभ होने से पहले नगर परिषद क्षेत्र के आठ प्रमुख नालों से प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर दूषित पानी सीधे नर्मदा नदी में मिलकर नदी को प्रदूषित कर रहा था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगरीय प्रशासन विभाग से सीवर योजना के अतिरिक्त लगभग 1.25 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत कराई गई, जिसके अंतर्गत सभी प्रमुख नालों को ट्रैप कर उनका पानी नदी में जाने से रोका गया।
वर्तमान में शहर के लगभग 10 लाख लीटर दूषित जल को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में उपचारित किया जा रहा है। उपचारित जल का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया गया है, जिससे जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। इसके साथ ही उपचारित जल के निकासी स्थल पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से भी नर्मदा नदी की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने तथा नदी एवं नालों में कचरा एवं अपशिष्ट पदार्थ नहीं डालने की अपील की है।
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25 views | Dindori, Madhya Pradesh | Jul 10, 2026