रीवा राजघराने में विजयादशमी (दशहरे) पर 'राजगद्दी पूजन' की ऐतिहासिक परंपरा
👑 जहाँ राजा नहीं, भगवान श्रीराम विराजते हैं राजगद्दी पर! 🚩✨
मध्य प्रदेश का विंध्य अंचल अपनी अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है, लेकिन रीवा राजघराने में विजयादशमी की यह परंपरा हर किसी का दिल जीत लेती है!
यहाँ दशहरे के पावन अवसर पर महाराजा खुद राजगद्दी पर नहीं बैठते, बल्कि भगवान श्री रामचंद्र जी को राजाधिराज मानकर उनकी पवित्र गद्दी का पूजन करते हैं। महाराजा स्वयं को भगवान श्रीराम का केवल एक सेवक और प्रतिनिधि मानते हैं।
क्या है इसके पीछे की पौराणिक मान्यता?
इस पावन परंपरा की जड़ें बघेल राजवंश की अगाध रामभक्ति और शेषावतार भगवान लक्ष्मण जी के सेवाभाव से जुड़ी हैं। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने विंध्य क्षेत्र का शासन लक्ष्मण जी को सौंपा था, लेकिन लक्ष्मण जी ने स्वयं को सदैव श्रीराम का सेवक मानकर ही कार्य किया। इसी उच्च आदर्श को अपनाकर रीवा का बघेल राजवंश आज भी भगवान श्रीराम को ही वास्तविक शासक मानता है।
राजसी चल समारोह और भव्य सवारी:
विजयादशमी पर रीवा किले में महाराजा पुष्पराज सिंह जूदेव और युवराज दिव्यराज सिंह जी द्वारा विधि-विधान से राजगद्दी का पूजन किया जाता है। पूजा के उपरांत भगवान राजाधिराज की भव्य सवारी और मनमोहक धार्मिक झांकियों के साथ एक भव्य राजसी चल समारोह निकलता है।
यह ऐतिहासिक जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए दशहरा मैदान पहुँचता है, जहाँ रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व उल्लासपूर्वक मनाया जाता है।
🚩 जय श्री राम! जय विंध्य प्रदेश! 🚩
#Rewa #RewaFort #Dussehra #Vijayadashami #RewaRoyalFamily #Vindhya #RewaNews #JaiShreeRam #BaghelDynasty #IndianTradition #CultureOfMadhyaPradesh #RewaDiaries #MPTourism #ViralPost #TrendingRewa