विकसित भारत की नींव युवाओं के हाथ में, राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएं
संगम विश्वविद्यालय में ‘राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ पर युवा संवाद; डॉ. श्रीकांत ने स्वभाषा, स्वबोध और नागरिक शिष्टाचार को जीवन में उतारने का किया आह्वान
भीलवाड़ा ( महेंद्र नागोरी)विकसित भारत का सपना सिर्फ सरकारों की योजनाओं से नहीं, बल्कि युवाओं की सोच, क्षमता और संकल्प से साकार होगा। युवाओं को अपनी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लगाने की जरूरत है। यह बात क्षेत्रीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख, राजस्थान क्षेत्र डॉ. श्रीकांत ने संगम विश्वविद्यालय में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में कही।
संगम विश्वविद्यालय के कला एवं मानविकी संकाय, ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल, प्रबंधन, विधि एवं भेषज विज्ञान संकाय के संयुक्त तत्वावधान में ‘राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित हुआ।
डॉ. श्रीकांत ने भारत के गौरवशाली अतीत से लेकर वर्तमान चुनौतियों तक युवाओं को जोड़ते हुए कहा कि देश की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में युवा शक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वामी रामतीर्थ के जापान प्रवास से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए स्वदेश प्रेम और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
भारत की वैश्विक भूमिका से युवाओं को कराया रूबरू:-
डॉ. श्रीकांत ने भारत के जापान, फ्रांस, अमेरिका, इजराइल और कंबोडिया जैसे देशों के निर्माण में दिए गए योगदान का उल्लेख करते हुए युवाओं को भारत की वैश्विक भूमिका से अवगत कराया। उन्होंने संस्कार, नारी सम्मान, युवाओं की क्षमता, संसाधनों के विकास और रोजगार सृजन जैसे विषयों पर व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
उन्होंने युवाओं से ‘स्वभाषा, स्वबोध और नागरिक शिष्टाचार’ को जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। साथ ही देश की प्रतिष्ठा को विश्व पटल पर नई ऊंचाई देने के लिए युवाओं को सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दी।
2047 के विकसित भारत का लक्ष्य, युवाओं पर बड़ा दायित्व
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को चार ट्रिलियन से छह ट्रिलियन तक ले जाकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में युवाओं के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने राष्ट्र की समस्याओं, राष्ट्र निर्माण, देश के भविष्य और विकसित भारत से जुड़े सवाल पूछे। डॉ. श्रीकांत ने उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन कला एवं मानविकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. राजकुमार चतुर्वेदी ने किया। कला एवं मानविकी, विधि, प्रबंधन एवं भेषज विज्ञान संकाय के विद्यार्थी और संकाय सदस्य मौजूद रहे। अंत में डॉ. अनुराग शर्मा ने आभार व्यक्त किया।