गाय और धरती की सेवा से पीढ़ियां संवरती हैं : रामाचार्य महाराज
लालबहादुर भाखर
पीलीबंगा ग्राम #लखासर स्थित श्री कृष्ण गौशाला समिति की ओर से आयोजित सात दिवसीय ‘दिव्य गो-कथा प्रवचन’ के द्वितीय दिवस कथा वाचक आचार्य रामाचार्य जी महाराज (जेसला वाले) ने गोसेवा, संस्कार और भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि गाय और धरती दोनों की सेवा से पीढ़ियां पलती और संस्कारित होती हैं। यज्ञ-हवन में देशी गाय के घी की आहुति को भारतीय परंपरा में विशेष महत्व दिया गया है। गोसेवा केवल पशु सेवा नहीं, बल्कि करुणा, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना को जीवन में उतारने का माध्यम है।
महाराज ने बदलते पारिवारिक मूल्यों पर चिंता व्यक्त करते हुए वृद्ध पिता के वृद्धाश्रम से जुड़े एक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में सुविधाएं बढ़ने के साथ कहीं-कहीं संस्कार और पारिवारिक संवेदनाएं कमजोर हो रही हैं। नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, माता-पिता के सम्मान और सेवा के संस्कारों से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जो मनुष्य अपने घर में माता-पिता, अतिथि और गोमाता की सेवा नहीं करता, उसके जीवन में विनम्रता और संस्कार कमजोर पड़ने लगते हैं तथा वह अहंकार की ओर बढ़ता है। सेवा का भाव मनुष्य को विनम्र बनाता है और परिवार व समाज को संस्कारवान बनाता है। गोसेवा, मातृ-पितृ सेवा और धरती की सेवा केवल परंपराएं नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुखद और संस्कारित भविष्य की नींव हैं।
कलियुग में नाम-स्मरण का महत्व बताते हुए आचार्य ने कहा कि मनुष्य को पाप और नकारात्मक प्रवृत्तियों से बचने के लिए भगवान के नाम का जाप करना चाहिए। घर-परिवार में कष्ट या अशांति हो तो श्रद्धा और विश्वास के साथ राम नाम का स्मरण मन को शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।
गोमाता की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय धार्मिक परंपरा में गाय को देवत्व का प्रतीक माना गया है। लोकमान्यता के अनुसार गाय के मुख में रुद्र, गले में ब्रह्मा तथा शरीर के विभिन्न अंगों में देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों का वास माना गया है। गाय के रोम-रोम में ऋषि-महर्षियों का निवास माना जाता है। उन्होंने कहा कि गोसेवा और गोस्पर्श को भारतीय परंपरा में पवित्र माना गया है तथा श्रद्धालु इसे पुण्य और आध्यात्मिक शांति से जोड़कर देखते हैं।
महाराज ने कहा कि गोसेवा, राम नाम का जाप और माता-पिता की सेवा मनुष्य के जीवन में संस्कार, शांति और विनम्रता का भाव पैदा करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाकर परिवार और समाज को संस्कारित बनाने का आह्वान किया.