गन्ना 600 रुपये नहीं तो मुख्यमंत्री आवास पर बैठेगी किसान पंचायत: रतन मान
सभी शुगर मिलों पर निकलेगी ट्रैक्टर रैली, पहले चरण में 7 मिलों पर होगा प्रदर्शन
करनाल : ( सतीश गढ़ी बीरबल )
गन्ने से बनने वाली तमाम चीजें महंगी और किसानों का गन्ना सस्ता है। सरकार ने गन्ना किसानों के साथ खुला विश्वासघात किया है। गन्ने के भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करवाने की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में मंगलोरा गांव में गन्ना किसानों की महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत की अध्यक्षता युवा किसान नेता जसविंदर मंगलोरा ने की। महापंचायत में किसान नेता सुरेश कोथ, किसान नेता जोगिंदर नैन, कामरेड सुमित सहित कई प्रमुख किसान नेताओं ने शिरकत की।
महापंचायत में सर्वसम्मति से गन्ने के रेट की बढ़ोतरी के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया। जिसके तहत शुगर मिलों में पंचायत करते हुए 2 दिसंबर को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री नायब सैनी के आवास का घेराव किया जाएगा।
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य व भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने बताया कि गन्ना किसानों की राज्य स्तरीय पंचायत हुई, जिसमें गन्ने का भाव बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर आंदोलन की योजना बनाई गई। उन्होंने कहा कि सरकार अगर किसानों की मांग नहीं मानती तो किसान आंदोलन को और तेज करने को मजबूर होंगे।
रतन मान ने कहा कि गन्ना किसानों को लागत का पूरा भाव न मिलने से किसान भारी घाटा वहन करने को मजबूर है। गन्ने से मिलने वाली चीनी, इथेनॉल उद्योग तो मुनाफा कमा रहे हैं और गन्ना पैदा करने वाला किसान घाटे में है। गन्ना तो 4 रुपये 15 पैसे प्रति किलो है, जबकि चीनी 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसी नीति के चलते किसान गन्ने की खेती छोड़ने पर मजबूर है।
उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की सालभर की मुख्य फसल है, जिसमें वर्तमान रेट में किसानों को कोई फायदा नहीं होगा। केंद्र सरकार भी लगातार ऐसी नीतियां बना रही है जो सहकारी शुगर मिलों के खिलाफ हैं। सरकार द्वारा किसानों की मांगों के अनुरूप भाव न देने से किसानों में भारी आक्रोश है।
टाल देती है सरकार
रतन मान ने कहा कि सरकार हर बार किसानों को आश्वासन देकर टाल देती है, लेकिन इस बार किसान आश्वासन से नहीं मानेंगे। किसान को उसका हक चाहिए। गन्ने की खेती में खाद, बीज, दवाई, डीजल, मजदूरी और सिंचाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। एक एकड़ गन्ने की खेती पर किसान का 80 से 90 हजार रुपये तक खर्च आ जाता है, जबकि सरकार जो भाव दे रही है उसमें किसान की लागत भी पूरी नहीं हो रही। ऊपर