#बालाघाट
मुर्रा भैंसों ने खोली अंकित की आमदनी की नई राह
मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना से मिला सहारा,
रोजाना 20 लीटर दूध उत्पादन से बढ़ी आर्थिक आत्मनिर्भरता
मेहनत, पशुपालन के प्रति रुचि और सरकारी योजना का सही लाभ मिले तो गांव में रहते हुए भी आय का मजबूत जरिया तैयार किया जा सकता है। बालाघाट विकासखंड के ग्राम भमोड़ी के युवा पशुपालक अंकित बिसेन ने इसे अपने प्रयासों से साबित किया है। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना का लाभ लेकर उन्होंने मुर्रा नस्ल की दो दुधारू भैंसें खरीदीं और अब इनके दूध से हर माह करीब 5 से 6 हजार रुपये की शुद्ध बचत अर्जित कर रहे हैं। बढ़ती आमदनी से उत्साहित अंकित अब अपने डेयरी व्यवसाय का विस्तार करने की दिशा में प्रयासरत हैं।
अंकित बताते हैं कि पशुपालन को आय का अतिरिक्त साधन बनाने की इच्छा थी, लेकिन अच्छी नस्ल के दुधारू पशु खरीदने के लिए पर्याप्त पूंजी जुटाना चुनौती थी। ऐसे समय में उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. घनश्याम परते की सलाह उनके लिए उपयोगी साबित हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना की जानकारी लेकर इसका लाभ उठाया और योजना के माध्यम से मुर्रा नस्ल की दो दुधारू भैंसें खरीदीं।
2.95 लाख की इकाई, आधी राशि पर मिला अनुदान
अंकित ने बताया कि योजना के तहत दोनों भैंसों की इकाई लागत 2 लाख 95 हजार रुपये निर्धारित थी। इसमें उन्हें 50 प्रतिशत अर्थात 1 लाख 47 हजार 500 रुपये का अंशदान स्वयं करना पड़ा, जबकि इतनी ही राशि शासन से अनुदान के रूप में प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहायता से उनके लिए बेहतर नस्ल के दुधारू पशु खरीदना संभव हो सका।
रोजाना 20 लीटर दूध, हर माह बचत
मुर्रा नस्ल की दोनों भैंसों से अंकित को वर्तमान में प्रतिदिन करीब 20 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की बिक्री से उन्हें नियमित आय मिल रही है। पशुओं के चारे, देखभाल और अन्य खर्चों को निकालने के बाद अंकित को हर माह करीब 5 से 6 हजार रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। यह राशि उनके परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहायक बन रही है।
अंकित कहते हैं कि डेयरी व्यवसाय में नियमित मेहनत और पशुओं की उचित देखभाल बेहद जरूरी है। वे पशुओं के स्वास्थ्य, खान-पान और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। उनका लक्ष्य आने वाले समय में पशुओं की संख्या बढ़ाकर दूध उत्पादन और आमदनी में वृद्धि करना है।
योजना बनी आत्मनिर्भरता की सीढ़ी
अंकित बिसेन की कहानी बताती है कि सरकारी योजनाएं केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए अवसर तैयार करने का माध्यम भी बन सकती हैं। योजना के माध्यम से मिली सहायता ने अंकित को बेहतर नस्ल के पशु खरीदने में मदद की और अब वे पशुपालन को व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
गांव के युवा के रूप में अंकित का यह प्रयास दूसरे ग्रामीण युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। उन्होंने दिखाया है कि यदि उपलब्ध योजनाओं की जानकारी लेकर उनका सही उपयोग किया जाए और मेहनत के साथ पशुपालन किया जाए, तो खेती के साथ डेयरी व्यवसाय को अतिरिक्त आय के प्रभावी साधन के रूप में विकसित किया जा सकता है।
#सेवा_संकल्प_अभियान #SevaSankalpAbhiyan #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #mp_husbandry
Balaghat, Madhya Pradesh | Sep 30, 2026