धर्म से ही आत्मा तीर्थंकर पद की अधिकारी बनती है : आचार्य मुक्तिसागर सूरीश्वर
- आयड़ जैन तीर्थ में 42 दिवसीय सम्मेत शिखर महातीर्थ तप आराधना के दूसरे दिन ज्ञान पूजा एवं धर्मसभा का आयोजन
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उदयपुर, 7 अगस्त। तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ जैन तीर्थ में मालव मार्तंड आचार्य भगवंत मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज, आचार्य अचलमुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज सहित ठाणा-4 के सान्निध्य में चातुर्मास महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक उल्लास के साथ जारी है।
महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि गुरुवार को 42 दिवसीय सम्मेत शिखर महातीर्थ तप आराधना के दूसरे दिन विविध धार्मिक आयोजन हुए। आत्मवल्लभ सभागार में प्रात: 7 बजे संतों के सान्निध्य में ज्ञान भक्ति, ज्ञान पूजा तथा अष्टप्रकारी पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इस दौरान सभी श्रावक-श्राविकाओं ने जैन आगम एवं धर्मग्रंथों की पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
आत्मवल्लभ सभागार में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य भगवंत मुक्तिसागर सूरीश्वर महाराज ने श्रावक जीवन के 36 कर्तव्यों में 18वें कर्तव्य ‘जयणा (यतना)’ का महत्व बताते हुए कहा कि जीन रक्षा के उद्देश्य से प्रत्येक कार्य सावधानीपूर्वक करना ही यतना है। साधु जीवन पूर्ण त्यागमय होता है, जबकि गृहस्थ जीवन में कुछ पाप प्रवृत्तियां अनिवार्य हो सकती हैं। ऐसे में श्रावक का प्रयास होना चाहिए कि वह हिंसा एवं पाप प्रवृत्ति को न्यूनतम रखे तथा प्रत्येक कर्म करते समय उसके प्रति जागरूक और सावधान रहे।
आचार्यश्री ने कहा कि समस्त जीवों के कल्याण की पवित्र भावना ही तीर्थंकरत्व का आधार है। जिस प्रकार माता पुत्र को जन्म देती है, उसी प्रकार जब आत्मा में समस्त जीवों के कल्याण की भावना जागृत होती है, तब वह तीर्थंकर नाम कर्म का उपार्जन करती है और उसके उदय से तीर्थंकर पद प्राप्त करती है। उन्होंने कहा कि सर्व जीवों के कल्याण की भावना ही आत्मा को तीर्थंकर बनने का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने आगे कहा कि साधु की माता पाँच समितियां एवं तीन गुप्तियाँ रूपी अष्ट प्रवचन माता है, जबकि श्रावक की माता जयणा है। गृहस्थ को अपने जीवन-निर्वाह के दौरान भी यथासंभव हिंसा से बचने तथा धर्मपालन में सदैव सजग रहने का प्रयास करना चाहिए। जहाँ जयणा होती है, वहाँ मन के परिणाम कठोर नहीं होते और धर्म का पालन सहज रूप से संभव होता है।
इस अवसर पर कुलदीप नाहर, भोपाल सिंह नाहर, अशोक जैन, राजेन्द्र जवेरिया, प्रकाश नागोरी, हेमंत सिंघवी, राजेश जवेरिया, दिनेश बापना, भोपाल सिंह परमार, अभय नलवाया, कैलाश मुर्डिया, चतर सिंह पामेच, सतीश कच्छारा, दिनेश भण्डारी, चिमनलाल गांधी, प्रद्योत महात्मा, रमेश सिरोया, कुलदीप मेहता सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं।
Girwa, Udaipur | Aug 7, 2026