श्रीमद्भागवत कथा में वामन अवतार और श्रीकृष्ण जन्म की लीला ने मोहा मन
पंचकूला। 4 सितंबर को सनातन धर्म मंदिर, सेक्टर-10 पंचकूला के पावन प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान वामन अवतार और श्रीकृष्ण जन्म की लीला का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा वाचन के दौरान श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक भाव में सराबोर नजर आए।
स्वामी जी ने भगवान वामन अवतार की कथा विस्तार से सुनाते हुए बताया कि असुर कुल में जन्म लेने के बावजूद महाराज बलि ने अपनी प्रतिज्ञा और वचन का सदैव पालन किया। जब भगवान वामन ने तीन पग भूमि मांगकर राजा बलि से उनका सर्वस्व ले लिया, तब भी बलि अपने वचन से नहीं डिगे।
महाराज बलि ने भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा कि जिस पर आपकी परम कृपा होती है, आप कभी-कभी उसका धन और संपत्ति भी मिटा देते हैं, लेकिन बदले में अपने चरणों में प्रेम और भक्ति का दान देते हैं। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि जिस प्रकार उनके दादा श्री प्रह्लाद जी को भगवान ने अचल भक्ति प्रदान की, उसी प्रकार उन्हें भी सदैव भगवान का भक्त बने रहने का आशीर्वाद मिले।
जन्माष्टमी के पावन पर्व पर स्वामी जी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की लीला का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि देवकी और वासुदेव ने भगवान के आगमन की राह में अनेक कष्ट सहे। कंस द्वारा उनके छह पुत्रों की निर्मम हत्या किए जाने के बावजूद उन्होंने भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। अंततः धर्म की विजय हुई और भगवान श्रीकृष्ण आठवें गर्भ के रूप में कंस के कारागार में प्रकट हुए। भगवान के जन्म लेते ही वासुदेव और देवकी के जीवन में आनंद छा गया।
कथा के दौरान ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। छोटे-छोटे बच्चों ने नृत्य और गायन की सुंदर प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें श्रद्धालुओं ने तालियों की गूंज के साथ खूब सराहा।
कार्यक्रम में महापौर श्री श्याम लाल बंसल ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से आयोजन की शोभा बढ़ाई। मंदिर सभा की ओर से सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया कि कथा वाचन एवं श्रवण का आनंद लेने तथा पुण्य के भागी बनने के लिए सपरिवार पहुंचकर आयोजन की शोभा बढ़ाएं।
कथा के पश्चात मंदिर सभा की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे के रूप में प्रसाद की व्यवस्था भी की गई।