रात्रि चौपाल से चमकी बुखार को धमकी, गांव-गांव जागरूकता की अलख जगा रहे पीएसपी सदस्य
• प्रोजेक्टर पर दिखाए जा रहे बचाव के वीडियो
• स्वास्थ्य विभाग की हाईटेक जागरूकता रथ भी पहुंचा रही घर-घर संदेश
• "चमकी की तीन धमकियां" हमेशा याद रखनी चाहिए
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छपरा। जिले में चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) और जापानी इंसेफेलाइटिस की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। संभावित खतरे को देखते हुए विभाग उपचार व्यवस्था के साथ-साथ सामुदायिक जागरूकता पर विशेष फोकस कर रहा है। इसी कड़ी में गांव-गांव रात्रि चौपाल का आयोजन कर लोगों को चमकी बुखार के लक्षण, बचाव और समय पर इलाज की जानकारी दी जा रही है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर गठित सीएचओ-पीएसपी (पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म) के सदस्य ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। रिविलगंज प्रखंड के विभिन्न गांवों में आयोजित रात्रि चौपाल कार्यक्रम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। चौपाल के दौरान प्रोजेक्टर के माध्यम से चमकी बुखार से संबंधित जागरूकता वीडियो दिखाए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को बीमारी की गंभीरता और उससे बचाव के उपायों की आसान भाषा में जानकारी मिल सके।
मुखिया ने पंचायत के लोगों को किया जागरूक
रिविलगंज प्रखंड के कचनार गांव में आयोजित रात्रि चौपाल का नेतृत्व पंचायत के मुखिया सह सीएचओ-पीएसपी सदस्य नागेंद्र कुमार राम एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) शिवा मेहता के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जीविका सीएम बेवी देवी, पुनिता देवी, फाइलेरिया मरीज एवं पीएसपी सदस्य बबन कुमार राम, प्रभु राम तथा आशा कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित कुल 76 ग्रामीणों ने भाग लिया। वहीं मुबारकपुर गांव में सीएचओ-पीएसपी सदस्य विवेक कुमार (शिक्षक), राहुल कुमार (फाइलेरिया मरीज) तथा स्थानीय वार्ड सदस्य के सहयोग से रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और चमकी बुखार से संबंधित जानकारी प्राप्त की।
ग्रामीणों में जागरूकता की उत्सुकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई महिलाएं, जो सामाजिक कारणों से सार्वजनिक स्थान पर बैठकर कार्यक्रम नहीं देख सकती थीं, उन्होंने अपने घरों की छतों से पूरा वीडियो देखा और बीमारी से बचाव की जानकारी हासिल की।
"चमकी की तीन धमकियां" हमेशा याद रखनी चाहिए
कार्यक्रम के दौरान वेक्टर बॉर्न डिजीज सुपरवाइजर (वीबीडीएस) घनश्याम यादव ने ग्रामीणों को चमकी बुखार से बचाव के महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अभिभावक को "चमकी की तीन धमकियां" हमेशा याद रखनी चाहिए। पहला, बच्चों को कभी भी खाली पेट नहीं सुलाना चाहिए तथा सोने से पहले कुछ मीठा अवश्य खिलाना चाहिए। दूसरा, रात में एक-दो बार बच्चे को उठाकर देखना चाहिए कि वह सामान्य स्थिति में है या नहीं तथा सुबह समय पर जगाना चाहिए। तीसरा, यदि बच्चे में बेहोशी, तेज बुखार, शरीर में ऐंठन या चमकी बुखार के अन्य लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए।
हाईटेक जागरूकता रथ पहुंचा रही बचाव का संदेश
स्वास्थ्य विभाग द्वारा चमकी बुखार और जापानी इंसेफेलाइटिस के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष जागरूकता रथ भी संचालित किया जा रहा है। निर्धारित रूट चार्ट और रोस्टर के अनुसार ऑडियो-वीडियो सुविधाओं से लैस यह प्रचार वाहन जिले के गांवों, गली-मोहल्लों, प्रमुख चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचकर लोगों को जागरूक कर रहा है। जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम से सुसज्जित इस हाईटेक प्रचार वाहन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी संदेश पहुंचाना है। रथ के माध्यम से लोगों को चमकी बुखार के लक्षण, समय पर उपचार, बचाव के उपाय तथा अस्पताल पहुंचने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार का कहना है कि सामुदायिक भागीदारी और जनजागरूकता ही चमकी बुखार से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य से रात्रि चौपाल, जागरूकता रथ और स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से लगातार अभियान चलाया जा रहा है, ताकि जिले का कोई भी बच्चा इस गंभीर बीमारी का शिकार न हो।
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Saharsa, Bihar | Jun 13, 2026