भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल बोले, सहयोग पोर्टल से घटा दफ्तरों का बोझ, 6 अगस्त को होगी बड़ी समीक्षा बैठक
पटना। भूमि सुधार और राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने बुधवार को राज्य के प्रशासनिक कामकाज और जन शिकायतों के निपटारे पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पारदर्शिता और जवाबदेही है और राजस्व विभाग को आम जनता के लिए और अधिक सुगम बनाया जाएगा।
मंत्री ने सबसे पहले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद किया। उन्होंने कहा कि "एक देश में दो निशान, दो विधान, दो संविधान नहीं चलेगा" यह नारा आज भी उतना ही प्रासंगिक है। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार ने धारा 370 हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया। आज हम पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा। इस निर्णय से देश की एकता मजबूत हुई है और कश्मीर के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिला है।
जनता दरबार से सहयोग पोर्टल तक:
डॉ. जायसवाल ने बताया कि पहले जनता सुनवाई में 400 से ज्यादा लोग पहुंचते थे। भीड़ के कारण कई मामलों का निपटारा समय पर नहीं हो पाता था। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सहयोग पोर्टल शुरू होने और हर महीने सहयोग कार्यक्रम आयोजित होने के बाद स्थिति बदली है। अब दफ्तरों में आने वालों की संख्या घटकर 30 से 40 रह गई है। लोग घर बैठे शिकायत दर्ज कर रहे हैं और समाधान भी तेजी से मिल रहा है।
उन्होंने माना कि अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों की तीन महीने की हड़ताल के कारण जमाबंदी, दाखिल-खारिज समेत कई राजस्व मामलों में बैकलॉग बन गया था। अब लंबित फाइलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
6 अगस्त को होगी बड़ी बैठक:
आगे की रणनीति बताते हुए मंत्री ने कहा कि 6 अगस्त को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई है। इसमें राज्य के सभी 537 अंचल अधिकारी, 101 अनुमंडल पदाधिकारी और 38 अपर समाहर्ता शामिल होंगे।
बैठक में प्रशासनिक सुधारों की समीक्षा होगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनता के मामलों का निपटारा समय सीमा में हो। खास फोकस भूमि और जमाबंदी से जुड़े विवादों पर रहेगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश वाले मामलों में अंचल अधिकारी अपनी अनुशंसा के साथ फाइल अपर समाहर्ता को भेजते हैं और वहीं से अंतिम निष्पादन होता है। सभी जिलों से लंबित मामलों का आंकड़ा पहले ही मंगा लिया गया है ताकि बैठक में जिलेवार समीक्षा कर समाधान का रोडमैप तैयार किया जा सके।