Public App Logo
Jansamasya
News
Bjp
National
Police
Bihar
India
कांग्रेस
भाजपा
Congress
Modi
Delhi
Viral
Crime
Jharkhand
Up
Bollywood
दिल्ली
Breakingnews
महिला
Narendramodi
Nitishkumar
Madhya_pradesh
सोशल_मीडिया
Madhyapradesh
Pmmodi
Rahulgandhi
Ipl
Uttarpradesh
Haryana
image
image
image

-महाराणा प्रताप की कृषि नीति आज भी प्रासंगिक — डॉ. मेहता —पर्यावरणविदों ने किया मेवाड़ की कृषि परंपरा के पुनरुद्धार का आह्वान -महाराणा प्रताप जयंती व हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुःशती उत्सव -17 जून को होने वाली राष्ट्र चेतना संकल्प सभा की तैयारियां जारी #udaipur #haldighati #maharanapratap उदयपुर, 7 जून। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने दिवेर विजय के बाद युद्धग्रस्त मेवाड़ के पुनर्निर्माण के लिए कृषि, फलोत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया था। यह बात पर्यावरणविद डॉ. अनिल मेहता ने रविवार को यहां प्रताप गौरव केन्द्र 'राष्ट्रीय तीर्थ' में विश्व पर्यावरण दिवस तथा हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतु:शती उत्सव के कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत आयोजित संगोष्ठी में कही। महाराणा प्रताप का पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन में योगदान विषय पर डॉ. मेहता ने मेवाड़ की गौरवशाली कृषि परंपरा, पर्यावरण संरक्षण और महाराणा प्रताप की दूरदर्शी कृषि नीति को पुनः स्मरण करते हुए मेवाड़ की कृषि विरासत के पुनरुद्धार का आह्वान किया। प्रताप गौरव शोध केन्द्र के अधीक्षक डॉ. विवेक भटनागर ने कहा कि लंबे समय तक मुगलों को अस्थिर रखने के उद्देश्य से कृषि पर प्रतिबंध रखने के बाद महाराणा प्रताप ने अपने शासन के अंतिम वर्षों में नए गांव बसाने और बाहरी क्षेत्रों से कृषकों को लाकर बसाने की योजना शुरू की। इस योजना के तहत गुजरात से पाटीदार, मारवाड़ से जाट तथा मालवा से कुलमी समाज के लोगों को मेवाड़ में बसाकर कृषि विकास को बढ़ावा दिया गया। यह प्रक्रिया आगे चलकर लंबे समय तक जारी रही। प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि संगोष्ठी में महाराणा प्रताप द्वारा पंडित चक्रपाणि मिश्र से रचित ‘विश्ववल्लभ’ ग्रंथ की विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने इसे मध्यकालीन भारत का महत्वपूर्ण कृषि एवं पर्यावरण शास्त्र प्रतिपादित किया। ग्रंथ में भूमिगत जल स्रोतों की पहचान, जल शुद्धि, बांध एवं कुण्ड निर्माण, वृक्षारोपण, बीजोपचार, वृक्षों के पोषण तथा रोगग्रस्त वृक्षों की चिकित्सा जैसे विषयों का विस्तृत वर्णन मिलता है। वक्ताओं ने कहा कि यह ग्रंथ आज भी सतत कृषि और पर्यावरण संरक्षण के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के उपाध्यक्ष एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुभाष भार्गव ने कहा कि युद्ध और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद महाराणा प्रताप ने नकदी फसलों, फलोत्पादन और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित किया। इससे राज्य की आत्मनिर्भरता मजबूत हुई तथा प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हुआ। इस अवसर पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के सदस्य अभय सिंह राठौड़, वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक सिंघवी आदि ने विचार रखे। गोष्ठी के पश्चात रोपे पौधे —कार्यक्रम संयोजक सीए महावीर चपलोत ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में महाराणा प्रताप के पर्यावरण व प्रकृति संरक्षण में योगदान को याद करते हुए प्रताप गौरव केन्द्र परिसर में मेवाड़ के अरावली क्षेत्र में पाई जाने वाली मूल वनस्पतियों नीम, गूलर, पलाश, कड़ाया, महुआ, देसी सागवान, गुग्गल, सेमल आदि के पौधों का रोपण भी किया गया। इस अवसर पर जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा सहित गौरव केन्द्र के कार्यकर्ताओं ने भी पौधे रोपे। डॉ. दुहन ने क्षेत्र के पर्यावरणीय अनुकूल पौधों का चयन करने को अच्छी पहल बताते हुए कहा कि इससे पौधों का विकास शीघ्र होता है, उनके मुरझाने की आशंका कम रहती है। आज प्रात: आयोजन स्थल भूमि पूजन —वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के महामंत्री दीपक कुमार शुक्ल ने बताया कि 17 जून को महाराणा भूपाल स्टेडियम गांधी ग्राउण्ड में प्रातः 9.30 बजे होने वाली विशाल राष्ट्र चेतना संकल्प सभा के लिए सोमवार प्रात: 7 बजे आयोजन स्थल का वैदिक विधिविधानपूर्वक भूमि पूजन किया जाएगा। इसके साथ ही आयोजन स्थल पर डोम लगाने, अतिथियों के बैठने के​ लिए ब्लॉक आदि निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि सभा में मेवाड़-वागड़ सहित राजस्थान और देश के विभिन्न कोनों से बड़ी संख्या में अतिथियों का आगमन होगा। इस विशाल सभा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डाॅ. मोहन भागवत संबोधित करेंगे। ————

Girwa, Udaipur | Jun 7, 2026

MORE NEWS