राज्य बनने के बाद पहाड़ों में बहुत कुछ बदला हो या न बदला हो, लेकिन एक बदलाव सबसे साफ दिखाई देता है विशालकाय होटलों की बढ़ती कतारें। विकास के नाम पर पहाड़ों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। सवाल सिर्फ होटल बनने का नहीं, बल्कि यह है कि क्या यह विकास स्थानीय लोगों, पर्यावरण और पहाड़ों की संवेदनशीलता के अनुरूप है? पहाड़ों को आर्थिक अवसर भी चाहिए और उनका प्राकृतिक संतुलन भी। असली चुनौती इन्हीं दोनों के बीच सही संतुलन बनाने की है।
Parliament Street, New Delhi | Jul 8, 2026