बरेली में रासलीला के तीसरे दिन शिव-पार्वती विवाह का भव्य मंचन
Bareillylive : श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में बाबा त्रिवटी नाथ मंदिर के राम कथा स्थल पर आयोजित रासलीला एवं भक्त लीला के तीसरे दिन वृंदावन से पधारे स्वामी देवकीनंदन महाराज की मंडली द्वारा शिव-पार्वती विवाह का रोचक मंचन किया गया।
कथा का सार:
स्वामी देवकीनंदन महाराज ने बताया कि भगवान शंकर और माता सती कुंभज ऋषि के आश्रम से कथा सुनकर लौट रहे थे। इस दौरान रामायण का प्रसंग आया जहाँ भगवान राम सोने के हिरण का पीछा कर रहे थे। महादेव ने प्रणाम किया तो सती ने पूछा कि ये कौन हैं। महादेव ने कहा कि ये हमारे परमात्मा हैं। आगे चलकर जब भगवान राम सीता जी के वियोग में रो रहे थे, तब शिव जी ने फिर प्रणाम किया। सती ने कहा कि जो एक स्त्री के लिए रो रहे हों, वो परमात्मा नहीं हो सकते। उन्होंने सीता जी का रूप धरकर राम जी की परीक्षा लेने का निश्चय किया।
राम जी ने माता को पहचान लिया और पूछा कि आप अकेली क्यों आई हैं, महादेव कहाँ हैं। सती शर्मिंदा होकर लौट आईं। महादेव ने ध्यान से सब जान लिया और उसी दिन से सती का त्याग कर उन्हें माता के रूप में देखने लगे तथा समाधि में चले गए।
इधर सती के पिता राजा दक्ष ने कनखल में यज्ञ किया लेकिन सती और शिव जी को नहीं बुलाया। सती शिव जी के मना करने के बाद भी वहाँ गईं और अपने पति का स्थान न देखकर क्रोधित होकर यज्ञ कुंड में कूदकर प्राण दे दिए। इससे क्रोधित शिव जी ने अपनी जटाओं को पटककर वीरभद्र को प्रकट किया और राजा दक्ष का सिर कटवाकर हवन कुंड में फेंक दिया। देवताओं के अनुरोध पर शिव जी मान गए और राजा दक्ष के सिर पर घोड़े का सिर लगा दिया गया।
तड़कासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान माँगा कि वह शिव जी के पुत्र के हाथों मारा जाए। शिव जी समाधि में थे, अतः कामदेव को भेजकर उनकी समाधि भंग की गई और उन्हें शादी के लिए मनाया गया।
इधर राजा हिमालय के यहाँ सती का जन्म पार्वती के रूप में हो चुका था। नारद जी ने पार्वती जी की पत्री देखकर बताया कि यह सती ही हैं जो पार्वती के रूप में जन्मी हैं और इनका विवाह शिव जी के साथ होगा। पार्वती जी ने घोर तप किया जिससे प्रसन्न होकर शिव जी ने दर्शन दिए और कहा कि किसी राजकुमार से शादी कर लें, किंतु पार्वती नहीं मानीं। तब शिव जी ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।
राजा हिमालय ने लग्न पत्रिका भेजी और शिव जी बारात लेकर राजा हिमालय के यहाँ चले। बारात में भूत, प्रेत, पिशाच, निशाचर, गंधर्व, किन्नर, नंदी और शिव जी के सभी गण देवता नाचते-गाते हुए शामिल हुए।
शिवरात्रि के दिन सृष्टि का संतुलन बनाने और प्रेम-भक्ति को दर्शाने के लिए महादेव ने पार्वती से विवाह किया। बारात देखकर पिता हिमालय और माता मैना भयभीत हो गए, लेकिन बहुत समझाने पर माता पार्वती को महादेव के साथ विदा किया गया।
बारात का उत्सव:
मीडिया प्रभारी कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि शिव जी की बारात बैंड-बाजे के साथ आई। ढोल, नगाड़े, डमरू, झांझ और मजीरे बजाते हुए भक्तगण शिव जी की बारात में सजकर शामिल हुए। गुब्बारे लगाए गए, टॉफियाँ और प्रसाद का वितरण हुआ तथा खिलौने बांटे गए। भक्त शंकर भगवान और माता पार्वती के जय-जयकार लगाते हुए बारात में शामिल हुए।
यजमान परिवार का सहयोग:
आज यजमान परिवार से सौरभ मेहरोत्रा (रमाडा होटल), अनिल अग्रवाल (मंत्री आनंद आश्रम), राजीव अग्रवाल (गोटे वाले), अनिल अग्रवाल (फन सिटी), राजीव बूबना, कमेटी से जुगल किशोर साबू, मोहन गुप्ता, विकास शर्मा, कैलाश शर्मा, प्रेम शंकर अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, नवीन गोयल, संजय शर्मा, आशीष मालू, कृष्णा अग्रवाल, संजय अग्रवाल, मुकेश शर्मा, मनोज अग्रवाल, निरंकार ओबेरॉय, सत्य प्रकाश ओबेरॉय, शिव कुमार सिंह, विपिन सक्सेना आदि का सहयोग रहा।
आगे का कार्यक्रम:
कल शनिवार को श्री खाटू श्याम चरित्र की लीला का मंचन सायंकाल 6:00 बजे से 9:30 बजे तक किया जाएगा।