जोल्हूपुर ओवरब्रिज निर्माण में मुआवजे को लेकर हंगामा, ग्रामीणों का प्रदर्शन
सर्किल रेट के अनुसार मुआवजा देने की मांग, एसडीएम बोले– असंतुष्ट हैं तो कोर्ट जाइए
कालपी तहसील क्षेत्र के जोल्हूपुर मोड़ पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) को लेकर शनिवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब अधिग्रहण की जद में आ रहे मकानों के स्वामियों और ग्रामीणों ने कम मुआवजा दिए जाने का आरोप लगाते हुए निर्माण कार्य का विरोध शुरू कर दिया।
बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मौके पर एकत्र हो गए और मशीनों को रोकने का प्रयास किया।
सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाकर स्थिति को शांत कराया।
हालांकि, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे।
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा उन्हें क्षेत्र के प्रचलित सर्किल रेट के अनुरूप मुआवजा नहीं दिया जा रहा है।
उनका कहना है कि जिस दर से मुआवजा बनना चाहिए, उससे काफी कम राशि निर्धारित की गई है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई लोगों को अधिग्रहण की प्रक्रिया से संबंधित कोई स्पष्ट लिखित नोटिस तक नहीं दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार ओवरब्रिज और प्रस्तावित सर्विस रोड की जद में लगभग 13 परिवार प्रभावित हैं, जिनमें करीब 8 से 10 मकान पूरी या आंशिक रूप से हटाए जाएंगे।
उनका कहना है कि कुछ लोगों को मुआवजे के चेक दिए गए, लेकिन अधिकांश प्रभावितों ने राशि कम होने का आरोप लगाते हुए चेक लेने से इनकार कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया कि अधिकारियों से कई बार अनुरोध किया गया कि पहले उचित मुआवजा दिया जाए, उसके बाद निर्माण कार्य कराया जाए, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई और पिलर खोदने सहित निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि समय रहते सर्विस रोड, नाली और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो बरसात के दौरान उनके घरों में पानी भरने की समस्या उत्पन्न हो जाएगी।
उनका कहना है कि ओवरब्रिज बनने के बाद क्षेत्र के लोगों की आवाजाही भी प्रभावित होगी।
रेलवे फाटक पहले से बंद है और निर्माण कार्य के चलते अंडरपास का रास्ता भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एसडीएम ने समझाया, निर्माण कार्य नहीं रुकेगा
ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर पहुंचे एसडीएम और अन्य अधिकारियों ने उन्हें समझाते हुए कहा कि मुआवजा प्रशासन द्वारा गठित टीम की रिपोर्ट के आधार पर तय किया गया है।
यदि कोई व्यक्ति इससे संतुष्ट नहीं है तो वह न्यायालय की शरण ले सकता है, लेकिन निर्माण कार्य नहीं रोका जाएगा।
इसके बाद कुछ लोगों ने सरकारी चेक स्वीकार कर लिए, जबकि अन्य प्रभावित परिवारों ने चेक लेने से इनकार कर दिया।
ग्राम प्रधान ने बताया कि प्रभावित परिवार लगातार सर्किल रेट के अनुसार मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन ने बताया है कि मुआवजा उच्च अधिकारियों द्वारा गठित टीम की रिपोर्ट के आधार पर तय किया गया है।
यदि किसी को आपत्ति है तो उसके लिए कानूनी विकल्प खुले हैं।
प्रधान ने यह भी कहा कि ग्रामीणों ने सर्विस रोड, नाली, लाइट और आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग रखी है।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि निर्माण के दौरान और बाद में लोगों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- सर्किल रेट के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाए।
- सभी प्रभावित परिवारों को पारदर्शी तरीके से अधिग्रहण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
- सर्विस रोड, नाली, स्ट्रीट लाइट और जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- निर्माण कार्य के दौरान आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया जाए।
- बरसात में जलभराव से बचाव के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए।
फिलहाल प्रशासन ने निर्माण कार्य जारी रखा है, जबकि प्रभावित परिवार उचित मुआवजे और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद किए हुए हैं।
आने वाले दिनों में यह मामला प्रशासनिक स्तर पर सुलझता है या न्यायालय तक पहुंचता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार
इस पूरे मामले में समाचार लिखे जाने तक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक लिखित या विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। यदि भविष्य में प्रशासन, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) अथवा संबंधित एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
यह समाचार मौके पर मौजूद प्रभावित ग्रामीणों, ग्राम प्रधान और घटनास्थल पर हुई बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार का उद्देश्य किसी पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के तथ्यों को सामने लाना है।
अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल...
- यदि ग्रामीणों का आरोप सही है तो सर्किल रेट के अनुरूप मुआवजा क्यों नहीं दिया गया?
- यदि मुआवजा नियमानुसार तय हुआ है तो उसकी गणना का आधार सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
- क्या सभी प्रभावित परिवारों को अधिग्रहण संबंधी नोटिस विधिवत दिए गए थे?
- निर्माण कार्य शुरू होने से पहले क्या सर्विस रोड, जल निकासी और आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई?
- जिन परिवारों ने मुआवजा लेने से इनकार किया है, उनकी आपत्तियों का समाधान कब और कैसे होगा?
- क्या प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ दोबारा वार्ता करेगा या मामला न्यायालय तक पहुंचेगा?
इन सभी सवालों के जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में हैं।
अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और आधिकारिक बयान पर टिकी हैं।
आपकी क्या राय है कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं ??
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Kalpi, Jalaun | Jun 27, 2026