प्रतापगढ़ में डीजे के तेज शोर पर पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, पट्टी में मूर्ति विसर्जन के दौरान नियमों की उड़ी धज्जियां!
पट्टी, प्रतापगढ़। जनपद प्रतापगढ़ में डीजे साउंड सिस्टम की तेज आवाज को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। नवरात्रि के बाद मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन और विजयादशमी के अवसर पर पट्टी नगर में तेज आवाज में डीजे बजाए जाने की शिकायतें सामने आईं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की ओर से नियमों का पालन कराने की बात तो कही गई, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव दिखाई नहीं दिया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मूर्ति विसर्जन के दौरान डीजे का वॉल्यूम इतना तेज था कि आसपास के मकानों की खिड़कियों और दीवारों तक में कंपन महसूस होने जैसी स्थिति बनी। डीजे के इको सिस्टम और अत्यधिक बेस के कारण ध्वनि प्रदूषण की समस्या भी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि देर रात तक चले विसर्जन जुलूसों में माता के भजनों के बीच डीजे की तेज आवाज से बुजुर्गों, हृदय रोगियों और छोटे बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस की बैठक के बाद भी नहीं दिखा असर!
बताया जा रहा है कि प्रतापगढ़ पुलिस ने दो दिन पहले आयोजित बैठक में डीजे संचालकों को निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करने के निर्देश दिए थे। बैठक में कथित तौर पर यह भी कहा गया था कि तय मानकों से अधिक आवाज में डीजे बजाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद पट्टी नगर में मूर्ति विसर्जन के दौरान तेज आवाज में डीजे बजने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सिर्फ बयान नहीं, धरातल पर कार्रवाई की जरूरत
स्थानीय लोगों का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केवल बैठकें और बयान जारी करना पर्याप्त नहीं है। डीजे संचालकों को निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन कराना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करना जरूरी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं, तो आम नागरिकों को तेज आवाज से होने वाली परेशानियों से राहत मिल सकती है।
धार्मिक आयोजनों और त्योहारों की आड़ में ध्वनि मानकों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। आस्था और उत्सव के साथ-साथ आम नागरिकों के स्वास्थ्य, बुजुर्गों की सुविधा और बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी आवश्यक है।
अब सवाल यह है कि जब पुलिस ने पहले ही डीजे की आवाज नियंत्रित करने के निर्देश दिए थे, तो पट्टी नगर में मूर्ति विसर्जन के दौरान उन निर्देशों का पालन क्यों नहीं सुनिश्चित कराया जा सका? स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि पुलिस और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
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