*सोच बदलेंगे जीवन बदलेंगा, हमारी सोच ही घर को स्वर्ग या नरक बनाती-आचार्य पुलकसागर महाराज*
*जब तक खुद पर विश्वास नहीं होगा सफलता हमसे दूर ही रहेगी*
*आचार्य पुलकसागर ससंघ के सानिध्य में सूर्यमहल में मंगल दिव्य देशना जारी*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ),22 अक्टूबर हमारी सोच ही हमे अच्छा या बुरा बनाती है। सोच बदल जाए तो घर स्वर्ग हो जाएगा। सोच भेदभाव वाली रहेगी तो घर नरक ही रहेगा। क्रोध, मान, माया, लोभ जैसे कषायों से मुक्ति पाए बिना कोई भी धार्मिक क्रिया कल्याण करने वाली नहीं हो सकती। मैं ही सहीं दूसरे गलत है ये सोच कषाय बढ़ाने वाली होती है। जब तक बुरी बात बुरी नहीं लगेगी तब तक सुधार भी नहीं आएगा। जीवन में निंदा या प्रशंसा महत्वपूर्ण नहीं बल्कि ये कौन कर रहा इसका महत्व होता है। ये विचार श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में गुरूवार को अंतिम चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला ‘‘जीवन जीने की कला’’ पर मंगल दिव्य देशना के दूसरे दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब तक घर स्वर्ग नहीं बनेगा मंदिर में भी स्वर्ग नहीं बन पाएगा। भीतर की लकीरे मिटे बिना पूजा, अर्चना, वंदना मोक्ष नहीं दिला सकती। अंदर से लकीरे मिट रही तो क्रिया धर्म है ओर अंदर कषाय बैठे है तो क्रिया धर्म नहीं हो सकती। क्रिया क्रोध से नहीं समता भाव से होनी चाहिए। जो बुरा नहीं सोचता वह बुरा सुन भी नहीं सकता, बुरा कर भी नहीं सकता ओर बुरा बोल भी नहीं सकता है।
आचार्यश्री ने कहा कि कषाय रहित क्रिया धर्म ओर कषाय सहित क्रिया पाप का कारण है। यदि धर्म जानकर भी कषाय का त्याग नहीं करते तो धर्मात्मा होना बेकार है। जो संत बनकर कषाय करते है उन्हें पाप ज्यादा लगता है। किसी पर संदेह करना भी मिथ्यात्व है। हमे खुद पर ही विश्वास नहीं है तो आत्म कल्याण के लिए क्रिया कर रहे उस पर कैसे विश्वास होगा। उन्होंने कहा कि हमे अपनी संतान पर विश्वास नहीं होता है। विश्वास से ये नहीं कह सकते कि हम नरक में नहीं जाएंगे। मंदिर रोज जाते पर विश्वास नहीं है कि धर्म करने से मोक्ष मिल जाएगा। हमारा खुद पर विश्वास हो तो दुनिया की कोई ताकत डिस्टर्ब नहीं कर पाएगी।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि हमे अपने धर्म पर अडिग विश्वास रखना चाहिए। जब मिथ्यात्व ओर भ्रम दूर होता है तो सम्यक दर्शन होता है। धर्म पर विश्वास होगा तो क्रिया कल्याण करेगी अन्यथा मात्र लकीरे बढ़ाएगी। माता पिता ओर बच्चे एक-दूसरे पर विश्वास नहीं करते है तो परिवार में सुख शांति कैसे होगी। गलत कार्य का समर्थन करने पर हमारी दशा भी उस कार्य को करने वाले के समान होगी। उन्होंने कहा कि जो बेटी-बहु ओर सास-बहु में भेद करे वह आत्मा का कल्याण कैसे कर पाएगा। बच्चे हो या बड़े दूसरों के कारण नहीं अपनी सोच से बिगड़ते है। हमे बेटी जवाब दे तो बुरा नहीं लगता पर बहु जवाब दे तो बुरा लगता। हमारी बेटी सुख दुख की बाते करे तो बुरा नहीं लगता पर बहु अपनी मां से ऐसी ही बात करे तो बुरा लग जाता है। हमारी मानसिक लकीरो को बदलना होगा। हमारी सोच की गड़बड़ ही पारिवारिक सम्बन्धों पर बुरा असर डालती है।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि प्रवचन के शुरू में पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य पुलक सागर चातुर्मास समिति एवं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों ने प्राप्त किया। संचालन चार्तुमास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि 30 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 8.45 से 10 बजे तक आचार्यश्री के मुखारबिंद से दिव्य देशना प्राप्त होगी। इस दौरान प्रतिदिन शाम 6.30 से 7.30 बजे तक आनंद यात्रा (प्रश्न मंच) का आयोजन हो रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।