Public App Logo
Jansamasya
News
Maharashtra
Bjp
National
Police
Bihar
India
Coronavirus
कांग्रेस
मौत
Congress
Modi
Delhi
Viral
Rajasthan
मध्यप्रदेश
Bollywood
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Mp
Madhyapradesh
Pmmodi
Rahulgandhi
Uttarpradesh
Haryana
Uttarakhand
Crimenews
Karnataka

DFO मैडम अभी सीख रही मैडम को अभी कुछ पता नहीं हैं #reels #shorts #trand #india #viralvídeos #brahman #न्यूज़ #viralvídeo...

Harda, Harda | Mar 26, 2026

MORE NEWS

वार्ड-12 में आ रहा गंदा और बदबूदार पानी, पार्षद ने परिषद की बैठक में CMO को किया भेट
.
.
#anokhaharda #harda #hardanews #mpnewsindia

वार्ड-12 में आ रहा गंदा और बदबूदार पानी, पार्षद ने परिषद की बैठक में CMO को किया भेट . . #anokhaharda #harda #hardanews #mpnewsindia

Harda, Harda | Jul 17, 2026

हरदा में अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित

म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देश एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश व अध्यक्ष श्री अरविंद रघुवंशी के मार्गदर्शन में ‘अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस’ के अवसर पर शुक्रवार को एजुकेशन हब कोचिंग सेन्टर, हरदा में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में उपस्थित न्यायाधीश व सचिव श्री चन्द्रशेखर राठौर ने उपस्थित छात्र/छात्राओं को बताया कि विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 17 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस मनाया जाता है। यह दिवस 17 जुलाई 1998 को रोम में ‘रोम संविधि’ को अपनाए जाने की स्मृति में मनाया जाता है, जिसके आधार पर अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसका मुख्यालय द हेग (नीदरलैंड) में स्थित है तथा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की जानकारी देते हुए बताया गया कि आईसीजे संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है। इसकी स्थापना 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अंतर्गत हुई तथा इसने 1946 से कार्य प्रारंभ किया। इसका मुख्यालय भी हेग, नीदरलैंड में स्थित है। आईसीजे का कार्य देशों के बीच उत्पन्न कानूनी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना तथा संयुक्त राष्ट्र के अंगों और विशिष्ट एजेंसियों द्वारा पूछे गए विधिक प्रश्नों पर सलाहकारी मत देना। अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस का उद्देश्य न्याय, मानवाधिकार, विधि के शासन तथा सभी नागरिकों के समान न्याय की अवधारणा के प्रति जागरूक करना है। उन्होने बताया कि न्याय केवल न्यायपालिका तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को समय पर, सुलभ एवं समान न्याय उपलब्ध कराना एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है। समाज के प्रत्येक वर्ग को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी होना आवश्यक है, जिससे न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित हो सके। साथ ही विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों एवं नालसा व शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। साथ ही पॉक्सो अधिनियम, 2012 की जानकारी देते हुए अवगत कराया गया कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का यौन शोषण गंभीर अपराध है।
 
जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री सौरभ कुमार दुबे द्वारा उपस्थित छात्र/छात्राओं को अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि यह संकल्प लेने का अवसर है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति कानून के सम्मान करें, दूसरों के अधिकारों की रक्षा करे तथा सभी के लिए सुलभ, समान एवं निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाए। एक न्यायपूर्ण समाज ही समावेशी विकास, सामाजिक विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक पहचान है। साथ ही उन्हें भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य, निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, मध्यस्थता, पीड़ित प्रतिकर योजना, महिला एवं बाल अधिकार, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अधिकारों सहित विभिन्न विधिक प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इसी क्रम में बताया गया कि पात्र व्यक्तियों को आर्थिक या अन्य कारणों से न्याय प्राप्त करने में कठिनाई होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। कोई भी पात्र व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरदा या अन्य विधिक सेवा संस्थान में उपस्थित होकर, पत्र के माध्यम से, नालसा पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर, 15100 पर कॉल कर, विधिक सहायता आसानी से प्राप्त कर सकता है। शिविर में कोचिंग सेन्टर के संचालक श्री विक्रमादित्य टांक, पैरालीगल वॉलंटियर श्री सुरेन्द्र कौर, शिक्षकगण, छात्र/छात्राएं उपस्थित रहे।

Department of Law & Legislative Affairs, Madhya Pradesh Jansampark Madhya Pradesh 
#Harda #InternationalJusticeDay #17July #LegalLiteracy #DLSAHarda #JansamparkMP

हरदा में अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देश एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश व अध्यक्ष श्री अरविंद रघुवंशी के मार्गदर्शन में ‘अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस’ के अवसर पर शुक्रवार को एजुकेशन हब कोचिंग सेन्टर, हरदा में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में उपस्थित न्यायाधीश व सचिव श्री चन्द्रशेखर राठौर ने उपस्थित छात्र/छात्राओं को बताया कि विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 17 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस मनाया जाता है। यह दिवस 17 जुलाई 1998 को रोम में ‘रोम संविधि’ को अपनाए जाने की स्मृति में मनाया जाता है, जिसके आधार पर अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसका मुख्यालय द हेग (नीदरलैंड) में स्थित है तथा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की जानकारी देते हुए बताया गया कि आईसीजे संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है। इसकी स्थापना 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अंतर्गत हुई तथा इसने 1946 से कार्य प्रारंभ किया। इसका मुख्यालय भी हेग, नीदरलैंड में स्थित है। आईसीजे का कार्य देशों के बीच उत्पन्न कानूनी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना तथा संयुक्त राष्ट्र के अंगों और विशिष्ट एजेंसियों द्वारा पूछे गए विधिक प्रश्नों पर सलाहकारी मत देना। अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस का उद्देश्य न्याय, मानवाधिकार, विधि के शासन तथा सभी नागरिकों के समान न्याय की अवधारणा के प्रति जागरूक करना है। उन्होने बताया कि न्याय केवल न्यायपालिका तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को समय पर, सुलभ एवं समान न्याय उपलब्ध कराना एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है। समाज के प्रत्येक वर्ग को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी होना आवश्यक है, जिससे न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित हो सके। साथ ही विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों एवं नालसा व शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। साथ ही पॉक्सो अधिनियम, 2012 की जानकारी देते हुए अवगत कराया गया कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का यौन शोषण गंभीर अपराध है। जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री सौरभ कुमार दुबे द्वारा उपस्थित छात्र/छात्राओं को अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि यह संकल्प लेने का अवसर है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति कानून के सम्मान करें, दूसरों के अधिकारों की रक्षा करे तथा सभी के लिए सुलभ, समान एवं निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाए। एक न्यायपूर्ण समाज ही समावेशी विकास, सामाजिक विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक पहचान है। साथ ही उन्हें भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य, निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, मध्यस्थता, पीड़ित प्रतिकर योजना, महिला एवं बाल अधिकार, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अधिकारों सहित विभिन्न विधिक प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इसी क्रम में बताया गया कि पात्र व्यक्तियों को आर्थिक या अन्य कारणों से न्याय प्राप्त करने में कठिनाई होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। कोई भी पात्र व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरदा या अन्य विधिक सेवा संस्थान में उपस्थित होकर, पत्र के माध्यम से, नालसा पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर, 15100 पर कॉल कर, विधिक सहायता आसानी से प्राप्त कर सकता है। शिविर में कोचिंग सेन्टर के संचालक श्री विक्रमादित्य टांक, पैरालीगल वॉलंटियर श्री सुरेन्द्र कौर, शिक्षकगण, छात्र/छात्राएं उपस्थित रहे। Department of Law & Legislative Affairs, Madhya Pradesh Jansampark Madhya Pradesh #Harda #InternationalJusticeDay #17July #LegalLiteracy #DLSAHarda #JansamparkMP

Harda, Madhya Pradesh | Jul 17, 2026

किसान आंदोलन हाइवे चक्काजाम 15 जुलाई  झलकियां क्या बोले किसान  #किसानपुत्र👳 #किसान #मध्यप्रदेश❣️ #गेहूं। #kisanfasal #बर्बाद #viralvideos #किसानपुत्र #reel #viralvi #viralvi #हरदा_मध्यप्रदेश #HARDA #हरदा_मध्यप्रदेश❣️ #MadhyaPradesh #trand #viralreels #अमानक #वायरल #harda #viralvídeos #हरदा #tranding #worldswarajnews #Harda #reels #shorts

किसान आंदोलन हाइवे चक्काजाम 15 जुलाई झलकियां क्या बोले किसान #किसानपुत्र👳 #किसान #मध्यप्रदेश❣️ #गेहूं। #kisanfasal #बर्बाद #viralvideos #किसानपुत्र #reel #viralvi #viralvi #हरदा_मध्यप्रदेश #HARDA #हरदा_मध्यप्रदेश❣️ #MadhyaPradesh #trand #viralreels #अमानक #वायरल #harda #viralvídeos #हरदा #tranding #worldswarajnews #Harda #reels #shorts

Harda, Harda | Jul 17, 2026

किसान आंदोलन हाइवे चक्काजाम 15 जुलाई  झलकियां क्या बोले किसान  #किसानपुत्र👳 #किसान #मध्यप्रदेश❣️ #गेहूं। #kisanfasal #बर्बाद #viralvideos #किसानपुत्र #reel #viralvi #viralvi #हरदा_मध्यप्रदेश #HARDA #हरदा_मध्यप्रदेश❣️ #MadhyaPradesh #trand #viralreels #अमानक #वायरल #harda #viralvídeos #हरदा #tranding #worldswarajnews #Harda #reels #shorts

किसान आंदोलन हाइवे चक्काजाम 15 जुलाई झलकियां क्या बोले किसान #किसानपुत्र👳 #किसान #मध्यप्रदेश❣️ #गेहूं। #kisanfasal #बर्बाद #viralvideos #किसानपुत्र #reel #viralvi #viralvi #हरदा_मध्यप्रदेश #HARDA #हरदा_मध्यप्रदेश❣️ #MadhyaPradesh #trand #viralreels #अमानक #वायरल #harda #viralvídeos #हरदा #tranding #worldswarajnews #Harda #reels #shorts

Harda, Harda | Jul 17, 2026

सीएम डॉ. मोहन ने देखा इंजीनियरिंग का चमत्कार, जानें कैसी-कैसी चुनौतियों का सामना कर बनी स्लीमनाबाद टनल

- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण
- 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर जमीन की होगी सिंचाई
- इंजीनियरिंग के चमत्कार से बदल जाएगी विंध्य-महाकौशल की तकदीर
- 100 साल तक जैसी बनी है वैसी रहेगी टनल, भूकंप का नहीं होगा असर

अनोखा तीर, भोपाल। मध्यप्रदेश का इंजीनियरिंग मार्वल यानी चमत्कार 'स्लीमनाबाद टनल' करीब-करीब तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 जुलाई को कटनी जिले में इसका निरीक्षण किया। यह टनल सीएम डॉ. मोहन यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस टनल से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इस तरह पूरे विंध्य-महाकौशल क्षेत्र की खेती की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाएगी। 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 8 घंटे की तीन शिफ्ट में टनल बनाने के लिए काम शुरू किया गया। वर्ष 2015 तक कुल 1406 मीटर टनल बोरिंग होने से इसकी गति बढ़ाने की आवश्यकता थी। लेकिन वर्ष 2016 से टनल के अपस्ट्रीम छोर से जर्मनी से लाई गई आधुनिक मशीन से खुदाई की गई। इसके बाद इंजीनियर, टेक्नीशियन और मजदूर सुरक्षा के मानकों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार की चुनौतियां बढ़ती चली गईं। टनल निर्माण के लिए लंबा संघर्ष रहा है और अब वर्ष 2026 में सफलता मिली है। जब वर्ष 2023 में राज्य में नई सरकार बनी तो ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए थे। मशीनें पुरानी हो गईं थीं और एक मशीन से खुदाई जारी रही। टनल तैयार होने के बाद अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम में लगभग ढाई लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ेगा। 

विज्ञान का चमत्कार है यह टनल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विंध्य क्षेत्र हर प्रकार के संसाधनों से परिपूर्ण है, लेकिन कुछ स्थानों पर पानी की कमी की चुनौती सामने आती है। यह टनल कटनी, रीवा और सतना सहित 5 जिलों के लिए अमृतधारा बनेगी। नर्मदा नदी तो खंभात की खाड़ी में जाकर मिलती है, लेकिन यह विज्ञान का चत्मकार ही है कि अब मां नर्मदा इस ऐतिहासिक टनल के माध्यम से गंगा बेसिन में सोन नदी के आसपास के अंचल में भी हरियाली लाएगी। किसानों और क्षेत्र के व्यापारियों के लिए यह टनल एक वरदान की तरह है। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में केस स्टडी सिद्ध होगी। भीषण से भीषण भूकंप आने पर भी टनल 100 साल तक सुरक्षित रहेगी। कई स्थानों पर टनल की गहराई जमीन से नीचे 120 फीट तक भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टनल परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए 1600 करोड़ रुपए की राशि में केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ की राशि प्रदान की है। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के बलबूते आज यह चुनौतिपूर्ण टनल परियोजना पूरी होने की ओर बढ़ रही है। 

बढ़ेगा सिंचाई का रकबा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि टनल तैयार होने का असंभव जैसा है। लेकिन जब संकल्प बड़ा होता है और पवित्र मन से कार्य किया जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। राज्य सरकार ने बार-बार कठिन चट्टानों की चुनौतियां आने के बावजूद नर्मदा टनल को पूरा करने के संकल्प के साथ काम करती रही। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आशीर्वाद से चित्रकूट का यह क्षेत्र, विंध्य की वैली के 5 जिलों- रीवा, सतना, मैहर, पन्ना और कटनी के कुल ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का रकबा बढ़ेगा। लोगों के लिए पेयजल का समस्या का समाधान होगा। कई स्थानों पर इसमें बिजली भी बनाए जाएगी। यह परियोजना राज्य में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के संकल्प की पूर्ति में निर्णायक भूमिका निभाएगी। राज्य में एक समय पर सिंचाई का रकबा केवल साढ़े 7 लाख हेक्टेयर था। उन्होंने कहा कि हमारी सरकारों में यह रकबा बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर हुआ, जो पिछले ढाई साल में बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर हो गया है। 

किसान कल्याण वर्ष में बड़ी सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में टनल परियोजना किसानों के लिए बड़ी सौगात है। आगामी तीन माह में रबी की फसल के लिए किसानों को 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा।  इस टनल परियोजना में एक ओर जहां नीचे नर्मदा नदी बहेगी, तो दूसरी ओर ऊपर से कटनी नदी प्रवाहित होगी। यह टनल परियोजना बुंदेलखंड और बघेलखंड के लिए बड़ी सौगात है, जो जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति करेगी। चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में सिंचाई विभाग ने सराहनीय कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों के अपील की है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन न बेचें। यह क्षेत्र भविष्य में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ेगा। इस क्षेत्र से पलायन रुकेगा और आर्थिक रूप से समृद्धि आएगी। हमारी सरकार किसान कल्याण वर्ष में बड़े-बड़े संकल्प पूरा करते हुए आगे बढ़ रही है।      

टीम ने किया इतनी खतरनाक चुनौतियों का सामना

गौरतलब है कि इस टनल की लंबाई 11.952 किलोमीटर है। यह विंध्य पर्वतमाला के अंदर से नर्मदा के पानी को गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी तक लाएगी। इस तरह यह पानी सोन नदी के कछार तक पहुंचेगा। इस टनल के निर्माण के चमत्कार इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि, तकनीकी रूप से विंध्य की 40 मीटर ऊंची रिज लाइन को भेदना असंभव था। इसके लिए जमीन से करीब 30 मीटर नीचे काम शुरू किया गया। इस दौरान काम कर रहे इंजीनियरों को मार्बल-लाइमस्टोन की कठोरता, डोलोमाइट की दृढ़ता और पानी में घुली चूने की विशालकाय भूमिगत गुफाओं ने कड़ी चुनौती दी। इतना ही नहीं, टनल के अंदर प्रति मिनट 25 हजार लीटर तक पानी उफन रहा था, उसका रिसाव हो रहा था और वहां की मिट्टी अचानक धंसने वाली मिट्टी थी। हैरानी की बात यह है कि इस काम में लगाई गई अमेरिकी मशीन भी टूट गई थी। उसके टूटने के बाद अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन लाई गई और विशेष टेम ग्राउटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। टीम ने इस टनल को इस तरह तैयार किया कि घनी आबादी, नेशनल हाईवे और रेलवे ट्रैक के ठीक नीचे से गुजरने के बाद भी किसी को कहीं कुछ नुकसान नहीं हुआ। 

कब हुआ कॉन्ट्रैक्ट-कितनी है लागत

इस टनल का जिम्मा हैदराबाद की निर्माण एजेंसी मेसर्स पटेल-एसईडब्ल्यू (संयुक्त उपक्रम) को सौंपा गया था। इसका कॉन्ट्रैक्ट वर्ष 2008 हुआ। उस वक्त इसकी शुरुआती लागत 799 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन, जब काम शुरू हुआ तो खतरनाक जमीनी चुनौतियों, जानलेवा जल रिसाव को रोकने के लिए किए गए विशेष प्रयास और लेटेस्ट तकनीक का इस्तेमाल करना पड़ा। इस वजह से इस टनल की लागत बढ़ गई। अभी तक इस पर 1610.47 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। आज इस पूरे अनुबंध का 96.66 प्रतिशत काम हो चुका है। परियोजना के तहत आने वाली 12.135 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर और 11.952 किलोमीटर लंबी मुख्य टनल का निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। 

विंध्य और महाकौशल के 5 जिलों में समृद्धि

इस टनल की खास बात यह है कि 10.14 मीटर व्यास वाली इस टनल से लाखों क्यूसेक नर्मदा का पानी बिना किसी बिजली या भारी पंपों के केवल ग्रेविटी के सहारे बहेगा। बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1450 गांवों की 2 लाख 45 हजार हैक्टेयर भूमि हमेशा के लिए सिंचित हो जाएगी। टनल के क्रियाशील होते ही इसके सीधे कमांड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कटनी जिले की 21 हजार 823 हैक्टेयर, मैहर जिले की 54 हजार 227 हैक्टेयर, सतना जिले की 1 लाख 4 हजार 970 हैक्टेयर, रीवा जिले की 3 हजार 532 हैक्टेयर और पन्ना जिले की 448 हैक्टेयर सूखी भूमि को हरा-भरा जीवन मिल जाएगा।

क्या है सरकार का रोडमैप

टनल के बाद के सभी आठ ग्रुपों का काम इस समय पूरी ताकत से चल रहा है। मार्च 2026 तक ही 44 हजार 160 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता को धरातल पर उतार दिया गया है। इससे किसान लाभांवित हो रहे हैं। राज्य सरकार के रोडमैप के मुताबिक इस साल दिसंबर तक 87 हजार 433 हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक कुल 1 लाख 54 हजार 693 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाएगी। इस तरह 5 जिलों कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के 1.85 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। खास बात यह भी है कि इस टनल से जल संसाधन विभाग की 30 हजार 307 हेक्टेयर क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए भी पानी दिया जाएगा।

सीएम डॉ. मोहन ने देखा इंजीनियरिंग का चमत्कार, जानें कैसी-कैसी चुनौतियों का सामना कर बनी स्लीमनाबाद टनल - मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण - 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर जमीन की होगी सिंचाई - इंजीनियरिंग के चमत्कार से बदल जाएगी विंध्य-महाकौशल की तकदीर - 100 साल तक जैसी बनी है वैसी रहेगी टनल, भूकंप का नहीं होगा असर अनोखा तीर, भोपाल। मध्यप्रदेश का इंजीनियरिंग मार्वल यानी चमत्कार 'स्लीमनाबाद टनल' करीब-करीब तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 जुलाई को कटनी जिले में इसका निरीक्षण किया। यह टनल सीएम डॉ. मोहन यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस टनल से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इस तरह पूरे विंध्य-महाकौशल क्षेत्र की खेती की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाएगी। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 8 घंटे की तीन शिफ्ट में टनल बनाने के लिए काम शुरू किया गया। वर्ष 2015 तक कुल 1406 मीटर टनल बोरिंग होने से इसकी गति बढ़ाने की आवश्यकता थी। लेकिन वर्ष 2016 से टनल के अपस्ट्रीम छोर से जर्मनी से लाई गई आधुनिक मशीन से खुदाई की गई। इसके बाद इंजीनियर, टेक्नीशियन और मजदूर सुरक्षा के मानकों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार की चुनौतियां बढ़ती चली गईं। टनल निर्माण के लिए लंबा संघर्ष रहा है और अब वर्ष 2026 में सफलता मिली है। जब वर्ष 2023 में राज्य में नई सरकार बनी तो ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए थे। मशीनें पुरानी हो गईं थीं और एक मशीन से खुदाई जारी रही। टनल तैयार होने के बाद अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम में लगभग ढाई लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ेगा। विज्ञान का चमत्कार है यह टनल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विंध्य क्षेत्र हर प्रकार के संसाधनों से परिपूर्ण है, लेकिन कुछ स्थानों पर पानी की कमी की चुनौती सामने आती है। यह टनल कटनी, रीवा और सतना सहित 5 जिलों के लिए अमृतधारा बनेगी। नर्मदा नदी तो खंभात की खाड़ी में जाकर मिलती है, लेकिन यह विज्ञान का चत्मकार ही है कि अब मां नर्मदा इस ऐतिहासिक टनल के माध्यम से गंगा बेसिन में सोन नदी के आसपास के अंचल में भी हरियाली लाएगी। किसानों और क्षेत्र के व्यापारियों के लिए यह टनल एक वरदान की तरह है। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में केस स्टडी सिद्ध होगी। भीषण से भीषण भूकंप आने पर भी टनल 100 साल तक सुरक्षित रहेगी। कई स्थानों पर टनल की गहराई जमीन से नीचे 120 फीट तक भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टनल परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए 1600 करोड़ रुपए की राशि में केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ की राशि प्रदान की है। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के बलबूते आज यह चुनौतिपूर्ण टनल परियोजना पूरी होने की ओर बढ़ रही है। बढ़ेगा सिंचाई का रकबा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि टनल तैयार होने का असंभव जैसा है। लेकिन जब संकल्प बड़ा होता है और पवित्र मन से कार्य किया जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। राज्य सरकार ने बार-बार कठिन चट्टानों की चुनौतियां आने के बावजूद नर्मदा टनल को पूरा करने के संकल्प के साथ काम करती रही। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आशीर्वाद से चित्रकूट का यह क्षेत्र, विंध्य की वैली के 5 जिलों- रीवा, सतना, मैहर, पन्ना और कटनी के कुल ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का रकबा बढ़ेगा। लोगों के लिए पेयजल का समस्या का समाधान होगा। कई स्थानों पर इसमें बिजली भी बनाए जाएगी। यह परियोजना राज्य में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के संकल्प की पूर्ति में निर्णायक भूमिका निभाएगी। राज्य में एक समय पर सिंचाई का रकबा केवल साढ़े 7 लाख हेक्टेयर था। उन्होंने कहा कि हमारी सरकारों में यह रकबा बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर हुआ, जो पिछले ढाई साल में बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर हो गया है। किसान कल्याण वर्ष में बड़ी सौगात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में टनल परियोजना किसानों के लिए बड़ी सौगात है। आगामी तीन माह में रबी की फसल के लिए किसानों को 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा। इस टनल परियोजना में एक ओर जहां नीचे नर्मदा नदी बहेगी, तो दूसरी ओर ऊपर से कटनी नदी प्रवाहित होगी। यह टनल परियोजना बुंदेलखंड और बघेलखंड के लिए बड़ी सौगात है, जो जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति करेगी। चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में सिंचाई विभाग ने सराहनीय कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों के अपील की है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन न बेचें। यह क्षेत्र भविष्य में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ेगा। इस क्षेत्र से पलायन रुकेगा और आर्थिक रूप से समृद्धि आएगी। हमारी सरकार किसान कल्याण वर्ष में बड़े-बड़े संकल्प पूरा करते हुए आगे बढ़ रही है। टीम ने किया इतनी खतरनाक चुनौतियों का सामना गौरतलब है कि इस टनल की लंबाई 11.952 किलोमीटर है। यह विंध्य पर्वतमाला के अंदर से नर्मदा के पानी को गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी तक लाएगी। इस तरह यह पानी सोन नदी के कछार तक पहुंचेगा। इस टनल के निर्माण के चमत्कार इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि, तकनीकी रूप से विंध्य की 40 मीटर ऊंची रिज लाइन को भेदना असंभव था। इसके लिए जमीन से करीब 30 मीटर नीचे काम शुरू किया गया। इस दौरान काम कर रहे इंजीनियरों को मार्बल-लाइमस्टोन की कठोरता, डोलोमाइट की दृढ़ता और पानी में घुली चूने की विशालकाय भूमिगत गुफाओं ने कड़ी चुनौती दी। इतना ही नहीं, टनल के अंदर प्रति मिनट 25 हजार लीटर तक पानी उफन रहा था, उसका रिसाव हो रहा था और वहां की मिट्टी अचानक धंसने वाली मिट्टी थी। हैरानी की बात यह है कि इस काम में लगाई गई अमेरिकी मशीन भी टूट गई थी। उसके टूटने के बाद अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन लाई गई और विशेष टेम ग्राउटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। टीम ने इस टनल को इस तरह तैयार किया कि घनी आबादी, नेशनल हाईवे और रेलवे ट्रैक के ठीक नीचे से गुजरने के बाद भी किसी को कहीं कुछ नुकसान नहीं हुआ। कब हुआ कॉन्ट्रैक्ट-कितनी है लागत इस टनल का जिम्मा हैदराबाद की निर्माण एजेंसी मेसर्स पटेल-एसईडब्ल्यू (संयुक्त उपक्रम) को सौंपा गया था। इसका कॉन्ट्रैक्ट वर्ष 2008 हुआ। उस वक्त इसकी शुरुआती लागत 799 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन, जब काम शुरू हुआ तो खतरनाक जमीनी चुनौतियों, जानलेवा जल रिसाव को रोकने के लिए किए गए विशेष प्रयास और लेटेस्ट तकनीक का इस्तेमाल करना पड़ा। इस वजह से इस टनल की लागत बढ़ गई। अभी तक इस पर 1610.47 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। आज इस पूरे अनुबंध का 96.66 प्रतिशत काम हो चुका है। परियोजना के तहत आने वाली 12.135 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर और 11.952 किलोमीटर लंबी मुख्य टनल का निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। विंध्य और महाकौशल के 5 जिलों में समृद्धि इस टनल की खास बात यह है कि 10.14 मीटर व्यास वाली इस टनल से लाखों क्यूसेक नर्मदा का पानी बिना किसी बिजली या भारी पंपों के केवल ग्रेविटी के सहारे बहेगा। बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1450 गांवों की 2 लाख 45 हजार हैक्टेयर भूमि हमेशा के लिए सिंचित हो जाएगी। टनल के क्रियाशील होते ही इसके सीधे कमांड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कटनी जिले की 21 हजार 823 हैक्टेयर, मैहर जिले की 54 हजार 227 हैक्टेयर, सतना जिले की 1 लाख 4 हजार 970 हैक्टेयर, रीवा जिले की 3 हजार 532 हैक्टेयर और पन्ना जिले की 448 हैक्टेयर सूखी भूमि को हरा-भरा जीवन मिल जाएगा। क्या है सरकार का रोडमैप टनल के बाद के सभी आठ ग्रुपों का काम इस समय पूरी ताकत से चल रहा है। मार्च 2026 तक ही 44 हजार 160 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता को धरातल पर उतार दिया गया है। इससे किसान लाभांवित हो रहे हैं। राज्य सरकार के रोडमैप के मुताबिक इस साल दिसंबर तक 87 हजार 433 हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक कुल 1 लाख 54 हजार 693 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाएगी। इस तरह 5 जिलों कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के 1.85 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। खास बात यह भी है कि इस टनल से जल संसाधन विभाग की 30 हजार 307 हेक्टेयर क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए भी पानी दिया जाएगा।

Harda, Harda | Jul 17, 2026