जिलाधिकारी महोदय की पहल से निखर रही जिंदगी
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग जी की मुहिम न कोई रहे रक्त से हारा हर एक जरूरतमंद को मिले रक्त हमारा की तर्ज पर जिला अस्पताल में आज 7 लोगों द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान किया गया
और उनकी इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए
आज दिनांक 30/09/2026 को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभारी DEIC डॉ पवन कुमार सिंह द्वारा थैलीसीमिया से ग्रसित 2 बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जिसमें से एक बच्ची का hb कम होने पर तत्काल डॉ HC अग्रवाल और डॉ AK सिंह द्वारा स्क्रीनिंग कर Blood Transfusion कराया गया ।
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक (वंशानुगत) रक्त विकार है, जिसमें शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन या स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन है जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाता है।
मुख्य कारण
• आनुवंशिक परिवर्तन (जीन म्यूटेशन): यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में जीन के जरिए ट्रांसफर होती है।
• हीमोग्लोबिन प्रोटीन अल्फा और बीटा चेन से बनता है। इनमें से किसी भी चेन के निर्माण में खराबी आने पर थैलेसीमिया होता है।
प्रमुख प्रकार
• अल्फा थैलेसीमिया: इसमें अल्फा चेन का निर्माण ठीक से नहीं होता है।
• बीटा थैलेसीमिया: इसमें बीटा चेन का उत्पादन प्रभावित होता है। यह अधिक आम है और इसके रूपों में थैलेसीमिया माइनर (कैरियर), इंटरमीडिया और गंभीर रूप थैलेसीमिया मेजर शामिल हैं।
सामान्य लक्षण
• अत्यधिक थकान और कमजोरी
• पीली या ठंडी त्वचा
• सांस फूलना
• बच्चों में विकास का धीमा होना
• पीलिया (आंखों या त्वचा का पीला पड़ना)
इलाज और प्रबंधन
• ब्लड ट्रांसफ्यूजन (रक्त चढ़ाना): गंभीर मामलों (जैसे थैलेसीमिया मेजर) में नियमित रूप से खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है।
• आ आयरन कीलेशन थेरेपी: बार-बार रक्त चढ़ाने से शरीर में जमा अतिरिक्त आयरन को बाहर निकालने के लिए।
• बोन मैरो ट्रांसप्लांट: यह इसका एक स्थाई इलाज माना जाता है।