रिहायशी इलाकों और तंग गलियों में वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार और लापरवाही मासूम जिंदगियों के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है। हालिया आंकड़ों और नागरिक सुरक्षा संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार, घरेलू या रिहायशी गलियों में होने वाले सड़क हादसों में सबसे ज्यादा शिकार छोटे बच्चे होते हैं। इन इलाकों में अक्सर छोटे बच्चे बेफिक्र होकर साइकिल चलाते हैं या खेल रहे होते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर वे सड़क सुरक्षा के नियमों और तेज रफ्तार वाहनों से होने वाले जोखिमों से पूरी तरह अनजान (नादान) होते हैं, जिसके कारण अचानक उनके वाहन के सामने आ जाने की आशंका हमेशा बनी रहती है।
यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में दुर्घटनाओं को रोकने की पूरी जिम्मेदारी वाहन चालकों (ड्राइवर्स) के कंधों पर होती है। जब भी कोई वाहन किसी संकरी गली या रिहायशी कॉलोनी से गुजरे, तो चालक को न केवल अपनी गाड़ी की रफ्तार बेहद धीमी रखनी चाहिए, बल्कि पूरी तरह सतर्क भी रहना चाहिए। एक पल की भी लापरवाही किसी हंसते-खेलते परिवार के लिए उम्र भर का दर्द बन सकती है। स्थानीय प्रशासन और यातायात पुलिस भी लगातार लोगों से अपील कर रही है कि गलियों को हाईवे न समझें; यहाँ संयम और सावधानी ही एकमात्र उपाय है जिससे किसी भी अप्रिय और दर्दनाक घटना को होने से रोका जा सकता है।"उत्तराखंड की हर बड़ी खबर सबसे पहले पाने के लिए Nandi News Uttarakhand को Follow करें।"
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Dehradun, Dehradun | Oct 6, 2026