लामपुरी कोसा फार्म में अंतागढ़ के वॉलंटियर्स ने सीखे , कैसे बनता है रेशमी धागा
अंतागढ़। युवाओं को व्यावहारिक ज्ञान और स्थानीय रोजगार की तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से आज अंतागढ़ के वॉलंटियर्स द्वारा लामपुरी कोसा फार्म का एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया गया। इस दौरान युवाओं ने कोसा (तसर सिल्क) के बनने से लेकर उससे बारीक रेशमी धागा निकालने की पूरी पारंपरिक व वैज्ञानिक प्रक्रिया को बेहद करीब से समझा।
कोसा फार्म में विशेषज्ञों ने वॉलंटियर्स को कीट पालन, ककून (कोसा) के निर्माण, उसे उबालने और फिर कुशलतापूर्वक धागा खींचने (रीलिंग) की कताई तकनीक का जीवंत प्रदर्शन किया। युवाओं ने न केवल इस कला को देखा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कोसा शिल्प के महत्व को भी जाना।
इस शैक्षणिक भ्रमण में मुख्य रूप से अंतागढ़ के सक्रिय वॉलंटियर्स त्रिवेंद्र बघेल, कृति पोटाई, रखिना गोटी, रानी कोर्राम, भारती टांडिया , तृप्ति कुलदीप और अविनाश कुलदीप शामिल रहे।
भ्रमण के बाद वॉलंटियर्स ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि बस्तर और कांकेर अंचल की इस विश्व प्रसिद्ध पारंपरिक धरोहर को लाइव देखना उनके लिए एक अद्भुत और प्रेरणादायक अनुभव रहा। इस तरह के दौरों से युवाओं में कौशल विकास को बढ़ावा मिलता है।
Kanker, Chhattisgarh | Sep 13, 2026