मिथिला में आस्था का महापर्व जितिया आज है। सिंहवाड़ा और जाले प्रखंड में सुबह से ही महिलाओं ने तालाब, नदी व गंगा घाटों पर स्नान किया।
स्नान के बाद महिलाओं ने तेल, खल्ली और झुमनी के पत्ते पर तेल चढ़ाया। घर लौटकर जितमाहन भगवान की पूजा की। यह तीन दिवसीय जितिया पर्व संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए है।
आश्विन कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नवमी तक इस पर्व का पहला दिन 'नहाय-खाय' होता है। इसमें महिलाएं खल्ली तेल से स्नान कर पूर्वजों को याद करती हैं और भोजन करती हैं।
कल 'खर-जितिया' में निर्जला उपवास होगा। तीसरे दिन जिमूतवाहन कथा सुनकर व्रत का पारण किया जाएगा।
रानी देवी ने बताया कि यह पूजा पुत्र की प्राप्ति और लंबी उम्र के लिए है। एक अन्य महिला ने कहा कि व्रत से उन्हें पुत्र मिला और वे 18 साल से इसे कर रही हैं।