भागवत कथा में बलि के द्वार पधारे वामन भगवान्
भक्ति की महिमा अपार : संत श्री कृष्णानंद जी महाराज
उदयपुर , सेक्टर 5 , शांति नगर में पुरूषोत्तम मास में राडा जी मंदिर परिसर में समस्त श्रेत्रवासियो द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में तृतीय दिवस व्यासपीठ से श्री वृंदावन धाम आश्रम, तीतरडी पीठाधीश्वर सुप्रसिद्ध भागवताचार्य संत कृष्णानंद महाराज ने आध्यात्मिक चर्चा करते हुए कहा कि निःसंदेह, भक्ति की महिमा अपार है। यह वह दिव्य ऊर्जा है जो मनुष्य को प्रेम, श्रद्धा और समर्पण से जोड़ती हैं। सच्चे मन से की गई भक्ति जीवन के सभी अंधकार, अहंकार और चिंताओं को मिटाकर आंतरिक शांति और परमानंद प्रदान करती हैं।
कथा प्रसंग में मंगलवार को प्रभु के वामन भगवान की दिव्य झांकी को कथा परिसर में जीवंत किया गया। शहर के सेक्टर 5 में चल रही भागवतकथा से माहौल धर्ममय बना हुआ है। महाराज जी ने वामन अवतार का प्रसंग विस्तार से सुनाते हुए श्रोताओं को बताया कि जब राजा बलि अश्वमेध यज्ञ कर रहा था तो देवताओं को डर सताने लगा कि राजा इन्द्र की गददी पर आसीन नहीं हो जाए। इस पर देवताओं ने भगवान विष्णु के पास जाकर याचिका लगाई। भगवान विष्णु ने वामन अवतार का वेश धरा और राजा बलि के पास पहुंचकर तीन पैर की जमीन मांग ली। राजा बलि ने यह वचन दे दिया और भगवान ने विशाल काय रुप लेकर तीनों पैरों में ही संसार को नाप लिया।
कथा के दौरान प्रसंग को सुनकर श्रोतागण भक्तिभाव में डूब गए। महाराज जी ने भक्तों को इस लीला के पीछे के मूल रहस्य को समझाया कि वामन अवतार धारण कर विष्णु भगवान् राजा बलि का समर्पण भाव की परिक्षा लेना चाहते थे जिसमें राजा बलि सफल हुए। सभा अंत में समिति के सदस्यों ने सपरिवार भगवान् वामन के चरणों का पूजन कर आरती की।
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Girwa, Udaipur | Jun 5, 2026