
मंगरोल में झंडारोहण पर बड़ा सवाल, GPS साक्ष्यों ने खोली दावों की पोल?
9:21 बजे तक झंडारोहण की तैयारी का दावा, पंचायत सहायक ने भी मानी देरी; बिना GPS फोटो से अधिकारियों को गुमराह करने के आरोपों की जांच की मांग
महेवा (जालौन)। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर ग्राम पंचायत मंगरोल में समय से ध्वजारोहण न होने का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। खबर सामने आने के बाद प्रकरण में नया मोड़ आया है।
ग्रामीणों के बयान, GPS लोकेशन एवं समय वाली फोटो और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि सुबह करीब 9:21 बजे तक झंडारोहण की तैयारी चल रही थी।
वहीं पंचायत सहायक महिला द्वारा भी ध्वजारोहण में देरी होने की बात स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीणों के अनुसार सुबह करीब 9:15 बजे तक ग्राम पंचायत भवन पर तिरंगा नहीं फहराया गया था।
इसके बाद सामने आए GPS साक्ष्य में करीब 9:21 बजे तक झंडारोहण की तैयारी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में खबर प्रकाशित होने से पहले ही ध्वजारोहण हो जाने संबंधी दावे अब जांच के दायरे में आते दिखाई दे रहे हैं।
बिना GPS फोटो से अधिकारियों को जानकारी देने का आरोप
मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि आरोप लगाया जा रहा है कि अधिकारियों को बिना GPS/लोकेशन वाली फोटो के आधार पर समय से ध्वजारोहण हो जाने की जानकारी दी गई। दूसरी ओर GPS लोकेशन और समय वाले साक्ष्यों में बाद तक तैयारियां चलने की बात सामने आ रही है। यदि दोनों तस्वीरों में समय को लेकर अंतर है तो इसकी सत्यता की जांच होना बेहद जरूरी है।
बताया गया कि स्वतंत्रता दिवस के दिन करीब 9:32 बजे तक भी ग्राम पंचायत भवन पर तिरंगा नहीं फहराया गया था। मामले की जानकारी लेने के लिए ग्राम विकास अधिकारी वंदना वर्मा से संपर्क का प्रयास किया गया। आरोप है कि करीब छह बार फोन करने के बावजूद फोन रिसीव नहीं हुआ। हालांकि संबंधित अधिकारी का पक्ष खबर लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है।
पंचायत सहायक के बयान से बढ़ी हलचल
मामले में पंचायत सहायक महिला द्वारा ध्वजारोहण में देरी स्वीकार किए जाने की बात सामने आने के बाद पूरे प्रकरण की गंभीरता और बढ़ गई है। अब ग्रामीण GPS फोटो, वीडियो, मौके पर मौजूद लोगों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच केवल देर से झंडारोहण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अधिकारियों को वास्तविक समय की जानकारी दी गई थी या नहीं। यदि जांच में गलत जानकारी देने या अधिकारियों को गुमराह करने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
बड़ा सवाल यही है कि जब GPS साक्ष्य में 9:21 बजे तक झंडारोहण की तैयारी दिखाई देने का दावा है और पंचायत सहायक भी देरी की बात स्वीकार कर रही हैं, तो समय से ध्वजारोहण होने की जानकारी आखिर किस आधार पर दी गई?
राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण महज औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान का विषय है। ऐसे में पूरे मामले के उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच अब जरूरी हो गई है। खबर लिखे जाने तक प्रशासन अथवा संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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Kalpi, Jalaun | Aug 15, 2026