
महंगाई के बीच राहत की दस्तक,
एमएसपी से करीब 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव पर व्यापारियों ने खरीदा गेहूं, स्थानीय मिलों के आटे में आई नरमी, ब्रांडेड आटे के दाम अब भी स्थिर
लगातार बढ़ती महंगाई के बीच आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। नए गेहूं की आवक के साथ खुले बाजार में समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दरों पर बड़ी मात्रा में हुई खरीद का असर अब आटे की कीमतों पर दिखाई देने लगा है। स्थानीय आटा मिलों से तैयार होकर बाजार में पहुंचने वाला आटा पिछले कुछ समय में करीब 4 रुपये प्रति किलो तक सस्ता हो गया है, जिससे आम परिवारों के मासिक रसोई बजट को कुछ राहत मिली है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार इस बार गेहूं की अच्छी पैदावार और सरकार की तरफ से समर्थन मूल्य पर गेहूं के खरीद को लेकर आई पेचीदिदियों ने तथा बंपर उत्पादन के कारण बाजार में पर्याप्त उपलब्धता के कारण व्यापारियों ने खुले बाजार से बड़ी मात्रा में गेहूं खरीदा। यह खरीद समर्थन मूल्य से करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव पर हुई। सस्ता गेहूं मिलने से स्थानीय आटा मिलों की उत्पादन लागत में कमी आई, जिसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। बाजार में पहले स्थानीय मिलों का आटा करीब 36 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा था, जो अब घटकर लगभग 32 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। दस किलो के पैकेट पर उपभोक्ताओं को लगभग 40 रुपये तक की बचत हो रही है। घरेलू उपयोग की सबसे जरूरी खाद्य सामग्री में शामिल आटे के दाम घटने से विशेष रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को राहत महसूस हो रही है। हालांकि कीमतों में यह कमी केवल स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले आटे में ही देखने को मिली है। बड़ी कंपनियों के ब्रांडेड आटे के दामों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं आया है। बाजार में उपलब्ध अधिकांश ब्रांडेड आटा अभी भी पुराने भावों पर ही बिक रहा है। व्यापारियों का कहना है कि ब्रांडेड कंपनियों की पैकेजिंग, परिवहन, मार्केटिंग और वितरण लागत अधिक होने के कारण उनके उत्पादों के दाम स्थिर बने हुए हैं। किराना व्यापारियों के अनुसार लोकल आटे की मांग में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। उपभोक्ता कम कीमत के साथ-साथ ताजा पिसाई के कारण स्थानीय मिलों के आटे को प्राथमिकता दे रहे हैं।