
प्लूटो की यह फोटो लेने के लिए एक स्पेसक्राफ्ट को 9 साल तक अंधेरे में उड़ना पड़ा। 🚀
और मजे की बात, फोटो खींचकर वह वहाँ रुका भी नहीं!
19 जनवरी 2006 को नासा ने न्यू होराइजन्स स्पेसक्राफ्ट छोड़ा। उस वक्त वह धरती से छोड़ा गया अब तक का सबसे फास्ट स्पेसक्राफ्ट था, स्पीड करीब 58,000 किलोमीटर प्रति घंटा।
फिर भी प्लूटो तक पहुँचने में पूरे 9 साल 5 महीने लग गए। उस दिन प्लूटो धरती से करीब 3 अरब मील दूर था।
रास्ते में बृहस्पति की ग्रेविटी ने भी बड़ा सहारा दिया। उससे स्पेसक्राफ्ट को स्पीड का बूस्ट मिला और सफर करीब 3 साल छोटा हो गया।
14 जुलाई 2015 को वह प्लूटो के सबसे करीब से गुजरा, करीब 12,500 किलोमीटर की दूरी से। यह फ्लाईबाई मिशन था, यानी न रुकना, न उतरना, बस उड़ते-उड़ते सारा डेटा और फोटो ले लेना।
यह व्यू सबसे करीब पहुँचने के सिर्फ 15 मिनट बाद कैद हुआ था। स्पेसक्राफ्ट ने पलटकर सूरज की तरफ देखा, तो पीछे से आती रोशनी में प्लूटो की धुंध की एक दर्जन से ज्यादा परतें चमक उठीं।
नीचे 3,500 मीटर तक ऊँचे बर्फीले पहाड़ हैं, और बगल में बर्फ का एकदम समतल मैदान, जिसे स्पुतनिक प्लानम कहते हैं।
एक और मजेदार बात। प्लूटो इतना दूर है कि स्पेसक्राफ्ट के सिग्नल को धरती तक पहुँचने में साढ़े चार घंटे लगे। यानी वैज्ञानिकों को डेटा के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।
प्लूटो के बाद भी यह मिशन रुका नहीं। 1 जनवरी 2019 को यह स्पेसक्राफ्ट अरोकोथ नाम के एक और दूर के पिंड के पास से भी निकला।
यही है असली साइंस। एक फोटो के पीछे सालों की मेहनत, परफेक्ट कैलकुलेशन और बहुत सारा सब्र छुपा होता है। अगली बार अंतरिक्ष की कोई फोटो देखें, तो इस सफर को जरूर याद रखिए।
आपको क्या लगता है, हमारे सौरमंडल में और कौन-सा कोना है जहाँ सबसे बड़ा राज छुपा है? कमेंट में जरूर बताइए 👇
📌 स्रोत: नासा न्यू होराइजन्स मिशन
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Bihar, India | Oct 23, 2026