
पहल जनसहयोग संस्था द्वारा किया जा रहा है वृक्षारोपण का कार्य
बड़वानी 08 जुलाई 2026/पहल जनसहयोग विकास संस्थान द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित सामूहिक पोषण वाटिका (सीएनजी) सेंटरों एवं सामुदायिक भूमि (कॉमन लैंड) पर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण एवं घास बीजारोपण का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत फलदार, छायादार एवं स्थानीय प्रजातियों के पौधों के साथ-साथ घास के बीज एवं सीड बॉल का रोपण किया गया। इस पहल का उद्देश्य हरित आवरण में वृद्धि करना, भूमि संरक्षण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण का निर्माण करना है।
इसी क्रम में संस्थान के पहल बायो रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) में किसानों एवं स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए विभिन्न जैविक कृषि आदानों का निर्माण किया गया। इनमें जीवामृत, मटका खाद, पांच पत्ती काढ़ा, कांडा टॉनिक, नीमास्त्र सहित अन्य जैविक उत्पाद शामिल हैं। इस अवसर पर सक्रिय किसान श्री घमंडीलाल मुलेवा एवं ।ज्ञत्ैच् की टीम द्वारा जैविक एवं प्राकृतिक खेती पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जैविक उर्वरकों के निर्माण, प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उपाय तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों की व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात सीएनजी सेंटरों पर सब्जी उत्पादन कर रही स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने पोषण उद्यानों एवं खेतों में इन जैविक आदानों का सफलतापूर्वक उपयोग कर रही हैं। महिलाएं न केवल स्वयं इन तकनीकों को अपना रही हैं, बल्कि अपने गांव के अन्य किसानों एवं महिलाओं को भी जैविक आदानों के निर्माण एवं उपयोग की जानकारी देकर प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ रही है तथा सुरक्षित, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है।
संस्थान के प्रतिनिधि श्री प्रवीण गोखले ने बताया कि पहल जनसहयोग विकास संस्थान ग्रामीण किसानों एवं स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। संस्थान का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाकर अपनी आजीविका को सुदृढ़ करें तथा स्वस्थ एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि प्रणाली को बढ़ावा दें।