
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पुसौर, सरिया सहित सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सक्ती के तटीय गांवों में महानदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कलमा बैराज के सभी 66 गेट खोले जाने के बाद नदी का पानी सैकड़ों एकड़ खेतों में भर गया है, जिससे धान की लहलहाती फसलें पिछले दो दिनों से जलमग्न हैं। पौधों पर गाद जमने और हवा न मिलने से फसल सड़ने का खतरा गहरा गया है, जिससे महीनों की हाड़-तोड़ मेहनत बर्बाद होती देख किसानों के माथे पर गहरी चिंता की लकीरें खिंच आई हैं।
हालात को देखते हुए प्रभावित किसानों ने जल्द से जल्द खेतों का निष्पक्ष सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है। वहीं, प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्वे के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं और पीड़ितों को ₹10-10 हजार की फौरी राहत राशि देने की घोषणा की है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि पानी उतरते ही पौधों में सड़न व फफूंद के लक्षणों की जांच करें और समय रहते कृषि विभाग से संपर्क कर आवश्यक उपाय अपनाएं।
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