
औरंगाबाद के चनहट गांव के जय प्रकाश कुमार BPSC 70वीं में 463वीं रैंक लाकर बने जिला शिक्षा पदाधिकारी।
उर्मिला देवी-लालकेशवर पाल के बेटे ने मेहनत से पाया मुकाम,गांव-क्षेत्र में जश्न का माहौल, DEO बनकर शिक्षा व्यवस्था सुधारेंगे।
*हसपुरा, औरंगाबाद | 21जून 2026 | गर्व की खबर*
औरंगाबाद जिले के हसपुरा प्रखंड, ग्राम चनहट के लिए आज खुशी का दिन है। उर्मिला देवी और लालकेशवर पाल के सुपुत्र जय प्रकाश कुमार ने BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 463वीं रैंक हासिल कर जिला शिक्षा पदाधिकारी - DEO के पद पर चयनित हुए हैं।
*1. चनहट का बेटा अब जिले की शिक्षा का जिम्मेदार*
जय प्रकाश कुमार अब जिला शिक्षा पदाधिकारी के रूप में पूरे जिले के स्कूलों, शिक्षकों और बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था संभालेंगे।
गांव चनहट, प्रखंड हसपुरा से निकलकर DEO बनना उनके लिए ही नहीं, पूरे इलाके के बच्चों के लिए प्रेरणा है। माता उर्मिला देवी और पिता लालकेशवर पाल की मेहनत रंग लाई।
*2. 463वीं रैंक - मेहनत का फल मीठा होता है*
BPSC में 463वीं रैंक का मतलब है लाखों छात्रों में से टॉप पर आना। जय प्रकाश ने साबित कर दिया कि गांव की मिट्टी में भी अफसर पनपते हैं। अब उनकी जिम्मेदारी होगी कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधरे, बच्चों को बेहतर माहौल मिले।
*3. गांव-क्षेत्र में हर्ष, बधाइयों का तांता*
जैसे ही रिजल्ट आया, चनहट गांव में मिठाई बंटी। ढोल-नगाड़े बजे। पूरा क्षेत्र गर्व से भर गया। लोग कह रहे हैं - "हमारे गांव का लड़का अब जिले का DEO बन गया। अब हमारे स्कूलों का भला होगा"। माता-पिता की आंखें नम हैं, पड़ोसी गर्व से सीना चौड़ा कर रहे हैं।
*4. संदेश: गांव से DEO तक का सफर संभव है*
जय प्रकाश की कहानी हर उस छात्र को हिम्मत देती है जो सोचता है "गांव में संसाधन नहीं, तो अफसर कैसे बनेंगे"।
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