
दो असफलता के बाद तीसरी बार में मिली कामयाबी, स्वाती ने बढ़ाया औरंगाबाद का मान
औरंगाबाद जिले के हसपुरा प्रखंड के सुदूर गांव जैतपुर से एक ऐसी खबर आई है जो बिहार के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है। यहां के साधारण किसान प्रमोद कुमार शर्मा की बेटी स्वाती कुमारी ने बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता का परचम लहरा दिया है। 1430वीं रैंक के साथ स्वाती का चयन ग्रामीण विकास पदाधिकारी के प्रतिष्ठित पद पर हुआ है।
स्वाती की कहानी संघर्ष और जिद की मिसाल है। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई उन्होंने रांची में पूरी की। 2024 में अपने गांव जैतपुर लौटने के बाद बिना किसी कोचिंग के सेल्फ स्टडी से BPSC की तैयारी शुरू की। पहले दो प्रयासों में असफलता हाथ लगी, लेकिन स्वाती ने हार नहीं मानी। परिवार का सहारा लेकर पटना में रहकर दिन-रात एक कर दिया और तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर ली।
रिजल्ट आते ही स्वाती खुशी से झूम उठीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय भगवान, माता-पिता और भाई अभिषेक कुमार को दिया। स्वाती ने कहा कि “परिवार ने हर मोड़ पर हौसला बढ़ाया। मैं अपने लक्ष्य पर अडिग रही और आज मंजिल मिल गई।” युवाओं को संदेश देते हुए स्वाती बोलीं कि असफलता से घबराकर लक्ष्य नहीं बदलना चाहिए। जब तक सफलता न मिले, मेहनत करते रहना चाहिए।
स्वाती की इस उपलब्धि से पूरे हसपुरा प्रखंड में जश्न का माहौल है। जैतपुर पंचायत के मुखिया सतेंद्र पासवान, सरपंच धनंजय घोष, चाचा हरेन्द्र शर्मा, टुनटुन शर्मा, दीपक कुमार, राहुल कुमार, पीयूष कुमार, अविनाश कुमार ने मिठाई बांटकर खुशी जताई। ग्रामीणों का कहना है कि सुदूर गांव की बेटी ने अफसर बनकर साबित कर दिया कि संसाधन नहीं, इरादे मायने रखते हैं। स्वाती की सफलता अब जैतपुर ही नहीं, पूरे औरंगाबाद की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
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