
उपायुक्त श्री सतपाल शर्मा ने जिला सचिवालय के सभागार में जिला स्तरीय सर्तकता एवं निगरानी कमेटी की आयोजित बैठक की अध्यक्षता की तथा अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत संबंधित विभागों के अधिकारियों को पीड़ितों को समय पर मदद कर न्याय दिलाने के निर्देश दिये।
उपायुक्त ने निर्देश दिये कि सभी मामलों की माननीय न्यायलय में प्राथमिकता के आधार पर पैरवी की जाये ताकि पीडितों को जल्द से जल्द न्याय मिले सके। उपायुक्त ने अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989, संशोधित 2016 के तहत दर्ज कुल 18 मामलों की एक एक करके समीक्षा की।
जिला समाज कल्याण अधिकारी विशाल बंसल ने उपायुक्त को अवगत करवाया कि अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 संशोधित 2016 के अंतर्गत गैर अनुसूचित जाति के व्यक्तियों द्वारा अनुसूचित जाति के व्यक्तियों पर होने वाले अत्याचारों जैसे भूमि का अनाधिकृत कब्जा, कत्ल, डकैती, बलात्कार, आगजनी तथा नरसंहार आदि से पीड़ित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। पीड़ित व्यक्ति द्वारा संबंधित थाने में अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) के तहत एफआईआर दर्ज हो, ऐसा व्यक्ति इस योजना के तहत आर्थिक सहायता प्राप्त करने का पात्र है। उन्होंने बताया कि एफआईआर दर्ज होने पर कुल राशि का 25 प्रतिशत और चालान प्रस्तुत होने पर 50 प्रतिशत राशि और बाकि राशि कोर्ट के फैसले पर पीड़ित को देने का प्रावधान है।
उपायुक्त ने सभी मामलों की प्राथमिकता के आधार पर पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिये ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
बैठक में उपायुक्त ने जिला स्तरीय सर्तकता एवं निगरानी कमेटी के गैर सरकारी सदस्यों के सुझाव भी सुने। उपायुक्त ने गैर सरकारी सदस्यों से ग्रामीणों के साथ तालमेल कर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का उनको जागरूक करने और स्वरोजगार सुनिश्चित करने की भी अपील की।
बैठक में एसडीएम चंद्रकांत कटारिया, एसीपी दिनेश कुमार, डीडीपीओ विशाल पराशर, जनस्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग के कार्यकारी अभियंता समीर शर्मा, नवीन एवं नवीकरणीय उर्जा विभाग के परियोजना अधिकारी राजेंद्र बुसवाल, समिति के गैर सरकारी सदस्य और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
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