
बरसात में सर्पदंश से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी जारी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहन्ती ने बरसात के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए नागरिकों से सतर्क रहने और सर्पदंश होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है। उन्होंने बताया कि सर्प के काटने पर जहर रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैल जाता है। सामान्यतः विषैले सांप के काटने पर दो गहरे दांतों के निशान दिखाई देते हैं, जबकि गैर विषैले सांप के काटने पर दो से अधिक निशान हो सकते हैं। हालांकि केवल निशानों के आधार पर यह मान लेना कि सांप विषैला नहीं था या उसने नहीं काटा, उचित नहीं है। सर्पदंश के लगभग 95 प्रतिशत मामलों में सबसे पहला लक्षण अत्यधिक नींद आना होता है। इसके अलावा निगलने में कठिनाई, सांस लेने में परेशानी तथा अन्य लक्षण सामान्यतः आधे घंटे के भीतर दिखाई देने लगते हैं। सर्पदंश की स्थिति में मरीज को घबराने न दें और उसे मानसिक रूप से आश्वस्त रखें। काटे गए स्थान को साफ गीले कपड़े से हल्के हाथों से साफ करें, मरीज को करवट लिटाएं तथा प्रभावित अंग को हल्के कपड़े से स्थिर रखें, जिससे अनावश्यक हरकत न हो। इसके बाद बिना देरी किए मरीज को निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाएं, जहां एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन एवं आवश्यक उपचार निःशुल्क उपलब्ध है।
सीएमएचओ ने स्पष्ट किया कि सर्पदंश की स्थिति में रस्सी या कपड़े से कसकर बांधना, ब्लेड से चीरा लगाना, मुंह से जहर चूसने का प्रयास करना, झाड़-फूंक, ओझा-गुनिया या अन्य पारंपरिक एवं अंधविश्वास आधारित उपाय अपनाना पूरी तरह गलत है और इससे मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।
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Directorate of Health Services, Madhya Pradesh