
➡️ सफलता की कहानी
➡️ आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना ने लिखी महेश यादव की सफलता की कहानी
आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना ने जिला सागर के ग्राम सागोनी उमरिया निवासी सीमांत कृषक महेश यादव के जीवन को एक नई दिशा दी। सीमित संसाधनों के कारण उनके पास उन्नत नस्ल के दुधारू पशु नहीं थे, उन्होंने योजना के अंतर्गत बैंक ऋण और शासन की 25 प्रतिशत अनुदान सहायता से 5 उन्नत नस्ल की मुर्रा भैंसें खरीदीं। नियमित देखभाल और मेहनत से आज उनकी मासिक आय 12 हजार रुपये से अधिक हो गई है और वार्षिक आय ढाई लाख रुपये से पार पहुंच गई है। गोबर गैस और जैविक खाद के उपयोग से खेती की उपज भी बढ़ी है।
कृषक महेश यादव बताते हैं कि मैं सीमांत कृषक हूँ, मुझे खेतीबाड़ी के साथ-साथ पशुपालन का बहुत शौक है, परन्तु मेरे पास उन्नत नस्ल के दुधारू पशु नहीं थे। जिससे मुझे अधिक आर्थिक लाभ नहीं मिलता था। एक वर्ष पूर्व आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के बारे में मुझे अखबार से जानकारी मिली। इसके बाद मैंने पशु चिकित्सालय राहतगढ़ जाकर आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना की पूरी जानकारी पशु चिकित्सा अधिकारी से ली। उन्होंने बताया कि डेयरी योजना में बैंक ऋण के साथ-साथ शासन द्वारा 25 प्रतिशत अनुदान उन्नत नस्ल की मुर्रा भैंस खरीदी पर दिया जाता है। मैंने आवेदन लेकर आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति के साथ दिए। एक सप्ताह बाद पशुपालन विभाग सागर द्वारा मेरा आवेदन बैंक को आवश्यक कार्यवाही हेतु एवं ऋण स्वीकृति हेतु भेज दिया गया।
बैंक द्वारा माह दिसम्बर 2025 में ऋण स्वीकृति एवं विभाग द्वारा 106250 रु. सब्सिडी देने के पश्चात् मैंने 05 उन्नत नस्ल की मुर्रा भैंसे हरियाणा से खरीदीं जिनका तीन वर्षीय बीमा भी कराया। प्रत्येक भैंस लगभग 9 लीटर दूध देती है। गांव में एवं विकासखंड मुख्यालय राहतगढ़ में दूध की खपत अच्छी होने के कारण मेरी आय में 12000 रु. प्रतिमाह शुद्ध रूप से होने लगी। बचत की रकम के साथ मैंने जो बैंक से कर्ज लिया था। वह तिमाही के रूप में बैंक को वापस कर दिया। शेष रकम से मैंने 10 मुर्रा भैंसे और खरीद लीं। इससे मेरी आमदनी में लगातार वृद्धि हुई जिससे मेरी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी हालत में संभव हो सकी।
➡️ हरित ऊर्जा एवं जैविक खाद से बचत एवं अधिक फसलोत्पादन भी
कृषक महेश यादव बताते हैं कि मैंने गोबर गैस संयंत्र भी स्थापित किया है जिसमें भैंसों से प्राप्त गोबर का उपयोग गोबर गैस के लिए करता हूँ, जिसका उपयोग खाना बनाने में किया जा रहा है। गोबर गैस से निकली कम्पोस्ट खाद का उपयोग खेती में डालने से फसल पैदावार में बढ़ोतरी हुई। इससे भी मेरी आय में वृद्धि हुई। वर्तमान में मेरी आय वार्षिक ढाई लाख रुपये से भी ज्यादा हो गई है। मैंने पशुपालन विभाग सागर की डेयरी योजना का लाभ प्राप्त कर अपने अनुभव से दूसरे किसान भाइयों को योजना के बारे में बताया। जिससे सरकारी योजना का लाभ लेकर आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ-साथ दूध की भी पूर्ति हो सकें एवं कृषि एवं पशुपालन की पूरकता का लाभ किसान भाइयों को मिल सकें।
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