चंपत राय ने कभी सोचा नहीं होगा कि जो लोग भगवान के लिए सोना, चांदी, जवाहरात दान कर रहे हैं, वे कभी पूछने आएंगे। उन्हें और उनके लोगों को लगा होगा कि दान का माल है। कोई लिखा पढ़ी होगी नहीं, और पार कर जाएंगे। हर दानकर्ता से यही कहा गया कि पहले क्वालिटी चेक कराएंगे। फिर वॉट्सएप पर रसीद भेजेंगे। किसी को नहीं भेजी।
अब सिंधी समाज पूछ रहा है कि हमारी 200 किलो चांदी की ईंटें कहां हैं? व्यापारी पूछ रहा है हमारी सोने की ईंट कहां है? महिला पूछ रही है कि हमारे चांदी के कागभुशुंडि कहां हैं? कारसेवक पूछ रहा है कि 1250 सोने, चांदी की रामशिलाएं कहां हैं?
चंपत जी मौन हैं? चंपत जी के मौन को संरक्षण देने वाला सरदार कौन है?
Behror, Alwar | Jun 25, 2026