
मोहम्मदी में एक नाबालिग से जुड़े गंभीर मामले ने पूरे नगर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। पीड़ित पक्ष नगर के एक प्रतिष्ठित परिवार से है, वहीं जिस युवक पर आरोप लगाए गए हैं, उसका परिवार भी सामाजिक रूप से सम्मानित माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित युवक पर पूर्व में इस प्रकार के किसी गंभीर आरोप की चर्चा सामने नहीं आई है और वह वर्षों से एक प्रतिष्ठान पर कार्यरत रहा है।
ऐसे संवेदनशील मामलों में भावनाओं के बजाय तथ्यों और साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पुलिस द्वारा की जा रही जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और वैज्ञानिक आधार पर होनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर डीएनए परीक्षण, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच, सीसीटीवी फुटेज का परीक्षण, एसआईटी अथवा सीबीसीआईडी जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसियों की सहायता भी ली जा सकती है, ताकि सत्य सामने आ सके।
समाज का दायित्व है कि वह न तो किसी आरोपी को जांच पूरी होने से पहले दोषी घोषित करे और न ही किसी शिकायत को बिना जांच के खारिज करे। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषी को कानून के अनुसार कठोरतम दंड मिलना चाहिए। वहीं यदि कोई व्यक्ति निर्दोष पाया जाता है, तो यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी निर्दोष का जीवन झूठे या असत्य आरोपों से नष्ट न हो।
न्याय का मूल सिद्धांत यही है कि पीड़ित को न्याय मिले, दोषी को दंड मिले और निर्दोष को संरक्षण मिले। इसलिए सभी पक्षों को जांच पूरी होने तक संयम, संवेदनशीलता और कानून पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।
MYogiAdityanath UP Police Amit Shah