Public App Logo
Profile Picture

समग्र चेतना

@samagrachetna
396Followers
0Following
किसी भी योजना को जागरूक करने के लिए जनता का जागरुक होना आवश्यक है लेकिन यहां तो .................: गौरव गुप्ता
डा सौरभ बाजपेई की अंतिम यात्रा मोहम्मदी
पोस्टमार्टम हाउस औरेया से डा सौरभ बाजपेई की बाड़ी पोस्टमार्टम होने के बाद 
UP Police
समाजवादी पार्टी सांसद आनंद भदौरिया ने भरा कार्यकर्ताओं में जोश, मिशन 2027 के लिए किया आह्वान मोहम्मदी दौरे पर सांसद , किसानों की खाद-यूरिया समस्या को लेकर सरकार पर , साधा निशाना  सांसद बोले सपा का सिंबल ही प्रत्याशी होगा .......

<nis:link nis:type=tag nis:id=sansad nis:value=sansad nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=mp nis:value=MP nis:enabled=true nis:link/> Anand Bhadauriya Akhilesh Yadav
लखीमपुर खीरी में रहने वाले डॉ. सौरभ वाजपेई बीएएमएस डॉक्टर हैं। वह औरैया शहर के तिलक नगर स्थित चढ़ा टॉकीज के पास रामअवतार हॉस्पिटल में प्रैक्टिस करते हैं। बुधवार शाम करीब 5 बजे सौरभ यमुना पुल पर पहुंचे। वहां उन्होंने इंस्टाग्राम पर 2 वीडियो पोस्ट किए, फिर नदी में छलांग लगा दी।
वीडियो में डॉक्टर ने आरोप लगाया कि रामअवतार अस्पताल मालिक के जीजा ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। इससे वे बेहद आहत हैं। दूसरे वीडियो में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी से न्याय की अपील की। कहा- मैं कमरा शिफ्ट कर रहा था, तभी मेरे साथ मारपीट हुई।
वीडियो में डॉक्टर सौरभ वाजपेई ने रामअवतार अस्पताल के मालिक एसपी सिंह को अपना बड़ा भाई बताया। कहा- मैं उनका सम्मान करता हूं, लेकिन अगर मैं आत्महत्या जैसा कदम उठाता हूं तो इसके लिए कुछ लोग जिम्मेदार हैं।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से यमुना नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू कराया। अब तक डॉक्टर का कोई पता नहीं चल सका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
औरैया में यमुना नदी में कूदे लखीमपुर-खीरी निवासी चिकित्सक डॉ. सौरभ वाजपेई द्वारा जारी वीडियो में स्थानीय प्रभारी निरीक्षक/एसएचओ पर मामले में निष्पक्ष कार्रवाई न करने एवं समझौते का दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस एवं वरिष्ठ अधिकारियों से मांग है कि संबंधित प्रभारी निरीक्षक की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि आरोपों में सत्यता पाई जाती है तो कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
शंकराचार्य की गविष्ठ यात्रा ..
"गोमाता के नाम पर राजनीति या राजनीति के बीच गोमाता?"
"शंकराचार्य की हुंकार से किसकी बढ़ी बेचैनी?"
गौहत्या के मामले में वांछित इकलाख और मोनिस पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार
गौहत्या के मामले में वांछित चल रहे आरोपी इकलाख और मोनिस को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों के विरुद्ध गौहत्या से संबंधित मुकदमा दर्ज था और उनकी तलाश की जा रही थी।
प्रभारी निरीक्षक उमेश सिंह चौरसिया ने पुलिस टीम के साथ कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों की घेराबंदी की। इस दौरान हुई मुठभेड़ में आरोपियों के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

घायल आरोपियों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई कर रही है तथा आरोपियों से पूछताछ जारी है। घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस सतर्कता बढ़ा दी गई है।
शंकराचार्य की गविष्ठ यात्रा ..
"गोमाता के नाम पर राजनीति या राजनीति के बीच गोमाता?"
"शंकराचार्य की हुंकार से किसकी बढ़ी बेचैनी?" का पार्ट 18
शंकराचार्य की गविष्ठ यात्रा ..
"गोमाता के नाम पर राजनीति या राजनीति के बीच गोमाता?"
"शंकराचार्य की हुंकार से किसकी बढ़ी बेचैनी?" का पार्ट 13
शंकराचार्य की गविष्ठ यात्रा ..
"गोमाता के नाम पर राजनीति या राजनीति के बीच गोमाता?"
"शंकराचार्य की हुंकार से किसकी बढ़ी बेचैनी?" का पार्ट 17
शंकराचार्य की गविष्ठ यात्रा ..
"गोमाता के नाम पर राजनीति या राजनीति के बीच गोमाता?"
"शंकराचार्य की हुंकार से किसकी बढ़ी बेचैनी?" का पार्ट 22
शंकराचार्य की गविष्ठ यात्रा ..
"गोमाता के नाम पर राजनीति या राजनीति के बीच गोमाता?"
"शंकराचार्य की हुंकार से किसकी बढ़ी बेचैनी?" का पार्ट 12
शंकराचार्य की गविष्ठ यात्रा ..
"गोमाता के नाम पर राजनीति या राजनीति के बीच गोमाता?"
"शंकराचार्य की हुंकार से किसकी बढ़ी बेचैनी?" का पार्ट 19
शंकराचार्य की गविष्ठ यात्रा ..
"गोमाता के नाम पर राजनीति या राजनीति के बीच गोमाता?"
"शंकराचार्य की हुंकार से किसकी बढ़ी बेचैनी?" का पार्ट 5
शंकराचार्य की गविष्ठ यात्रा ..
"गोमाता के नाम पर राजनीति या राजनीति के बीच गोमाता?"
"शंकराचार्य की हुंकार से किसकी बढ़ी बेचैनी?" का पार्ट 21
शंकराचार्य की गविष्ठ यात्रा ..
"गोमाता के नाम पर राजनीति या राजनीति के बीच गोमाता?"
"शंकराचार्य की हुंकार से किसकी बढ़ी बेचैनी?" का पार्ट 20
शंकराचार्य की गविष्ठ यात्रा ..
"गोमाता के नाम पर राजनीति या राजनीति के बीच गोमाता?"
"शंकराचार्य की हुंकार से किसकी बढ़ी बेचैनी?" का पार्ट 10
जैती फिरोजपुर मोहम्मदी ब्लाक अंतर्गत जैती फिरोजपुर गांव में लगा हेल्थ शिविर बने आयुष्मान कार्ड  , कैंप का निरीक्षण करने खुद विधायक पहुंचे 

जैती और फिरोजपुर। मोहम्मदी विधानसभा के दो ऐसे गांव, जहां भारतीय जनता पार्टी का राजनीतिक आधार कभी मजबूत नहीं माना गया। चुनावी आंकड़ों में भले ही यह गांव भाजपा के लिए उत्साहजनक न रहे हों, लेकिन जब बात विकास की आई तो मोहम्मदी विधायक Lokendra Pratap Singh ने वोटों का हिसाब नहीं देखा। गांव के लोगों ने स्वास्थ्य सुविधाओं और आयुष्मान कार्ड की मांग उठाई। विधायक ने इस मांग को गंभीरता से लिया और दोनों ग्राम पंचायतों में आयुष्मान भारत योजना एवं स्वास्थ्य शिविर आयोजित कराया। शिविर में करीब 30 नए आयुष्मान कार्ड बनाए गए, जिससे कई परिवारों को बेहतर इलाज की उम्मीद मिली।गांव के जगमोहन बाबा इसका जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि आयुष्मान कार्ड के कारण उनकी दोनों आंखों का इलाज संभव हो सका। उनके लिए यह केवल एक कार्ड नहीं, बल्कि नई रोशनी का माध्यम बना था । लोकतंत्र की असली ताकत भी यही है कि विकास समर्थक और विरोधी के बीच भेद न करे। जैती और फिरोजपुर में लगा यह शिविर एक संदेश देता है कि जनसेवा का आधार वोट नहीं, बल्कि जनता होती है। जब राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लिए जाते हैं, तब विकास उन दरवाजों तक भी पहुंचता है जहां अक्सर केवल चुनाव के समय दस्तक सुनाई देती है।
दतिया उपचुनाव : एक सीट का चुनाव नहीं, संगठन सर्वोपरि होने का संदेश
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा में हो रहा उपचुनाव केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित राजनीतिक घटना नहीं है। राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक सोच, नेतृत्व की कार्यशैली और भविष्य की चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यह उपचुनाव किसी सरकार को बनाने या गिराने का चुनाव नहीं है। यह स्थिति तब बनी जब कांग्रेस के निर्वाचित विधायक को न्यायालय द्वारा अयोग्य घोषित किए जाने के बाद सीट रिक्त हुई और उपचुनाव की आवश्यकता पड़ी।
ऐसे में इस चुनाव का महत्व सत्ता परिवर्तन से कहीं अधिक राजनीतिक दलों द्वारा दिए जा रहे संदेशों में दिखाई देता है। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने दतिया से आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी में संगठन सर्वोपरि है और चुनाव केवल बड़े चेहरों के भरोसे नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं के बल पर भी लड़ा जाएगा।
दतिया विधानसभा क्षेत्र लंबे समय तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक कर्मभूमि रहा है। डॉ. मिश्रा मध्य प्रदेश भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। 15 अप्रैल 1960 को ग्वालियर में जन्मे डॉ. नरोत्तम मिश्रा छह बार विधायक रह चुके हैं तथा शिवराज सिंह चौहान सरकार में गृह, विधि, जेल और संसदीय कार्य मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। प्रदेश की राजनीति में उनकी पहचान एक मजबूत संगठनकर्ता और प्रभावशाली वक्ता के रूप में रही है।
2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था। उपचुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज थी कि भाजपा एक बार फिर नरोत्तम मिश्रा को मैदान में उतार सकती है। उनके समर्थकों द्वारा भी लगातार उनकी दावेदारी को लेकर आवाज उठाई जाती रही। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए, सड़क जाम किए गए और टिकट की मांग को लेकर सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
हालांकि भाजपा नेतृत्व ने इन तमाम अटकलों और दबावों को दरकिनार करते हुए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया। यही वह बिंदु है जो इस चुनाव को सामान्य उपचुनाव से अलग बनाता है। भाजपा ने यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया है कि पार्टी का चुनाव चिन्ह कमल का फूल और संगठन का निर्णय किसी भी व्यक्तिगत दावेदारी से ऊपर है।
दतिया में टिकट को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों ने भी राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक और कार्यकर्ता का अधिकार है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विरोध की भी एक मर्यादा होती है। यदि किसी दल का शीर्ष नेतृत्व कोई निर्णय लेता है तो उसे संगठनात्मक मंचों पर चुनौती दी जा सकती है, किंतु सड़क पर उतरकर दबाव की राजनीति करना या ऐसा वातावरण बनाना जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो, लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जाता। कुछ स्थानों पर उग्र विरोध और तनावपूर्ण स्थितियों की खबरों ने भी यह प्रश्न खड़ा किया है कि क्या किसी नेता के प्रति समर्थन संगठनात्मक निर्णय से ऊपर रखा जा सकता है।
भाजपा का रुख इस पूरे घटनाक्रम में स्पष्ट दिखाई देता है। पार्टी यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि चाहे कोई नेता कितना ही बड़ा क्यों न हो, चाहे वह कई बार विधायक रहा हो, मंत्री रहा हो अथवा लंबे समय तक प्रभावशाली पदों पर रहा हो, अंतिम निर्णय संगठन और नेतृत्व का ही होगा। भाजपा ने यह भी संकेत दिया है कि नए नेतृत्व को अवसर देने और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की नीति पर वह आगे भी कायम रह सकती है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि दतिया से दिया गया यह संदेश केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां भी यह रणनीति दिखाई दे सकती है। भाजपा यह स्थापित करना चाहती है कि टिकट वितरण किसी व्यक्ति विशेष की लोकप्रियता या दबाव का विषय नहीं बल्कि संगठन की सामूहिक रणनीति का हिस्सा है।
दतिया का उपचुनाव इसलिए महत्वपूर्ण बन गया है क्योंकि यह केवल दो उम्मीदवारों के बीच का चुनाव नहीं रह गया है। यह संगठन बनाम व्यक्तिवाद, अनुशासन बनाम दबाव राजनीति और नेतृत्व बनाम व्यक्तिगत दावेदारी की बहस का केंद्र बन चुका है। भाजपा ने अपने निर्णय के माध्यम से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि पार्टी में व्यक्ति नहीं, बल्कि संगठन सर्वोच्च है। दतिया की जनता किसे चुनती है, इसका फैसला मतपेटी करेगी, लेकिन इस उपचुनाव ने भारतीय राजनीति को संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व की निर्णायक भूमिका पर एक नई बहस अवश्य दे दी है।
<nis:link nis:type=tag nis:id=narottammishra nis:value=narottammishra nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=mpbjp nis:value=mpbjp nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=datiya nis:value=datiya nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=bjp nis:value=bjp nis:enabled=true nis:link/>
मोहम्मदी में एक नाबालिग से जुड़े गंभीर मामले ने पूरे नगर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। पीड़ित पक्ष नगर के एक प्रतिष्ठित परिवार से है, वहीं जिस युवक पर आरोप लगाए गए हैं, उसका परिवार भी सामाजिक रूप से सम्मानित माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित युवक पर पूर्व में इस प्रकार के किसी गंभीर आरोप की चर्चा सामने नहीं आई है और वह वर्षों से एक प्रतिष्ठान पर कार्यरत रहा है।

ऐसे संवेदनशील मामलों में भावनाओं के बजाय तथ्यों और साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पुलिस द्वारा की जा रही जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और वैज्ञानिक आधार पर होनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर डीएनए परीक्षण, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच, सीसीटीवी फुटेज का परीक्षण, एसआईटी अथवा सीबीसीआईडी जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसियों की सहायता भी ली जा सकती है, ताकि सत्य सामने आ सके।

समाज का दायित्व है कि वह न तो किसी आरोपी को जांच पूरी होने से पहले दोषी घोषित करे और न ही किसी शिकायत को बिना जांच के खारिज करे। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषी को कानून के अनुसार कठोरतम दंड मिलना चाहिए। वहीं यदि कोई व्यक्ति निर्दोष पाया जाता है, तो यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी निर्दोष का जीवन झूठे या असत्य आरोपों से नष्ट न हो।

न्याय का मूल सिद्धांत यही है कि पीड़ित को न्याय मिले, दोषी को दंड मिले और निर्दोष को संरक्षण मिले। इसलिए सभी पक्षों को जांच पूरी होने तक संयम, संवेदनशीलता और कानून पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।
MYogiAdityanath UP Police Amit Shah
सूत्र 
नव निर्मित मोहम्मदी रोडवेज बस अड्डे में विभाग की ओर से तैनात कर्मचारी  द्वारा पूरे पाथवे को तोड़कर वृक्षारोपण कराए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बस अड्डे का निर्माण हाल ही में हुआ है, इसके बावजूद पैदल यात्रियों के आवागमन के लिए बनाए गए पाथवे को कई स्थानों पर तोड़ दिया गया है।

लोगों का सवाल है कि यदि वृक्षारोपण कराना आवश्यक था तो इसके लिए निर्धारित हरित क्षेत्र या खाली स्थान का चयन क्यों नहीं किया गया। पाथवे को तोड़कर पौधे लगाने से भविष्य में वहां दरारें पड़ने और संरचना को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि नव निर्मित बस अड्डे के पाथवे को तोड़कर वृक्षारोपण कराने की अनुमति किस अधिकारी द्वारा प्रदान की गई। क्या इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) के सक्षम अधिकारियों से स्वीकृति ली गई थी अथवा यह कार्य बिना किसी तकनीकी अनुमोदन के कराया गया?

परिवहन विभाग और रोडवेज अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस मामले की जांच कर स्पष्ट करें कि पाथवे को क्षतिग्रस्त कर वृक्षारोपण कराने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया तथा क्या यह निर्माण मानकों और विभागीय नियमों के अनुरूप है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उत्तर प्रदेश में बस अड्डों के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता देने की नीति लागू है, जिसके अंतर्गत बस अड्डों के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के संरक्षण पर विशेष बल दिया गया है।
वृहद वृक्षारोपण में वक्तव्य पेशे इमाम मौलाना अशजद अली
मोहम्मदी क्षेत्र में शनिवार को वन विभाग द्वारा वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। मोहम्मदी एवं महेशपुर रेंज के अंतर्गत छह लाख से अधिक पौधों के रोपण का लक्ष्य पूर्ण किया गया। इसी क्रम में गोकन क्षेत्र में लगभग 1100 पौधों का सामूहिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

वृक्षारोपण कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह, ब्लॉक प्रमुख महेंद्र बाजपेई, नगर पालिका परिषद मोहम्मदी के अध्यक्ष संदीप मेहरोत्रा कन्हैया, जिला पंचायत सदस्य दिलीप सिंह चौधरी, अतुल रस्तोगी सहित वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में वन क्षेत्राधिकारी निर्भय प्रताप शाही के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने पौधरोपण कार्य संपन्न कराया।

इस अवसर पर उप जिलाधिकारी चलवुराजु आर तथा पुलिस उपाधीक्षक अरुण कुमार सिंह भी मौजूद रहे। दून पब्लिक स्कूल, उमा देवी चिल्ड्रन्स अकैडमी तथा टीपीआरएस विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों की उपस्थिति में लगाए गए पौधों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।

वक्ताओं ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण संतुलन के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी आवश्यक हैं। कार्यक्रम के दौरान अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया।
तस्वीर वृहद वृक्षारोपण गोकन मोहम्मदी 
सौजन्य से वन रेंज महेशपुर मोहम्मदी
मेरठ में थप्पड़ कांड से चर्चा में आये एसएसपी अविनाश पांडे मूल रूप से लखीमपुर खीरी के रहने वाले हैं
समग्र चेतना (@samagrachetna) | Public App