
शारदीय नवरात्र के पहले दिन कलश शोभायात्रा में उमड़ी श्रध्दालुओं की भीड़
रजौली प्रखंड क्षेत्र में शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को सभी देवी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए उमड़ पड़े।सभी मंदिरों में कलश यात्रा के लिए सुबह से भक्तों की भारी कतार देखने को मिली।मंदिरों के अलावा घरों में लोग देवी का कलश स्थापित किया।कलश स्थापना के बाद भक्त पूरे नौ दिनों का व्रत करते हैं।देवी को मातृ शक्ति यानी स्नेह,करूणा और ममता का स्वरूप मानकर पूजा अर्चना की जाती है। महादेव मोड़ के दुर्गा मंदिर से रविन्द्र यादव उर्फ राबो के नेतृत्व में कलश यात्रा निकाला गया एवं हरदिया व पुरानी बस स्टैंड के काली मंदिर में कलश स्थापना के लिए कलशयात्रा में उमड़ी श्रध्दालुओं की भीड़। जिसमें सैकड़ों महिलाओं ने कलश यात्रा में भाग लिया ।वहीं अमावां गांव से भी महिला और पुरुष ने कलश यात्रा में भाग लिया।हरदिया में कलश यात्रा में काली मंदिर से शुरू हो कर फुलवरिया डैम से शुद्ध जल भरकर पुनः हरदिया स्थित काली मंदिर में जल से भरे कलश को बिधीवत तरीके से स्थापित कि गई।दूसरी ओर रजौली बजार, बजरंग बली चौक,पुरानी बस स्टैंड में होने वाली दुर्गा पूजा एवं काली पूजा के लिए कलश जल यात्रा मंदिरों व पूजा पंडालों से शुरू हो कर धनार्जय नदी से जल भरकर बाजार होते हुए पुनः मंदिरों व पूजा पंडालों में पहुंच कर कलश को बिधीवत स्थापित की गई।दरअसल रविवार से नवरात्र का शुभारंभ हो गया है। यह पर्व नौ दिनों तक चलेगा।नौ दिनों तक मां दुर्गा के नवस्वरूपों की पूजा अर्जना होगी।देवी के नौ स्वरूपों में सबसे पहला स्वरूप प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है।शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इन का नाम शैलपुत्री रखा गया।नवरात्र में नौ दिन व्रत रहकर माता की पूजा बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ की जाती है।ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ नवरात्र में सिर्फ पहला और आखिरी व्रत रखते हैं,जो लोग नौ दिन व्रत नहीं रख पाते वे सिर्फ माता शैलपुत्री का पूजन कर नवरात्रि का फल पा सकते है।मौके पर गौतम कुमार , मुन्नी भगत व मनोज कुमार के साथ सैकड़ों महिला पुरुष उपस्थित थे।
Rajauli, Nawada | Oct 11, 2026