
अंबाला में जलभराव पर भड़के सामाजिक कार्यकर्ता पारुल नागपाल: कहा- कागजी मास्टर प्लान नहीं, धरातल पर तुरंत काम की जरूरत
अंबाला के सामाजिक कार्यकर्ता पारुल नागपाल ने शहर में हर साल होने वाली जलभराव की गंभीर समस्या और प्रशासनिक दावों पर तीखा तंज कसा है हाल ही में सामने आए सरकारी दावों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा, "यह बेहद हास्यास्पद है कि अंबाला के नालों का पानी निकालने के लिए अब 7 सरकारी विभाग मिलकर बैठेंगे और इसका मास्टर प्लान IIT रुड़की बनाएगा! हमारे स्थानीय प्रशासन को इतने सालों में खुद यह समझ नहीं आया कि शहर का पानी कहाँ अटकता है, इसके लिए भी अब देश के टॉप इंजीनियर्स की रिसर्च रिपोर्ट का इंतज़ार हो रहा है।"
पारुल नागपाल ने प्रशासनिक तैयारियों की टाइमिंग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 31 जुलाई की डेडलाइन तय की गई है, यानी तब तक सिर्फ कागजों पर मास्टर प्लान बनकर तैयार होगा। तब तक मानसून की मूसलाधार बारिश अंबाला को पूरी तरह जलमग्न कर चुकी होगी। सालों से एक ही ढर्रे पर चल रहे ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए 7 अलग-अलग विभागों की बैठकें बुलाना यह साबित करता है कि स्थानीय अधिकारी ज़मीनी हकीकत और शहर की भौगोलिक स्थिति से पूरी तरह अनजान हैं।
उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जनता को बड़े-बड़े विज्ञापनों और राजनीतिक दावों से गुमराह करना बंद किया जाए। क्रेडिट लेने की सियासत से ऊपर उठकर तुरंत धरातल पर जल निकासी का पुख्ता और स्थाई समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि अंबाला वासियों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।
Ambala, Ambala | Jul 10, 2026