
आयुर्वेद की मां - हरितकी | SA News Chhattisgarh
22-08-2026: आयुर्वेद में 'हरितकी' यानी छोटी हरड़ को जड़ी-बूटियों की 'मां' कहा जाता है। जिस तरह एक मां अपने बच्चे की हर हाल में रक्षा करती है, उसी तरह हरड़ इंसान के शरीर को गंभीर बीमारियों से बचाती है। यह मशहूर 'त्रिफला' चूर्ण का सबसे मुख्य और ताकतवर हिस्सा है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खानपान की वजह से ज्यादातर लोग पेट की समस्याओं से परेशान हैं। ऐसे में हरड़ साक्षात अमृत की तरह काम करती है। यह आंतों के अंदर एक वैक्यूम क्लीनर की तरह काम करती है और चिपके हुए गंदे टॉक्सिन्स को शरीर से पूरी तरह बाहर निकाल फेंकती है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में आज भी बुजुर्ग और वैद्य इसे पेट के रोगों के लिए सबसे पहली दवा मानते हैं।
अगर आपका पेट सुबह एक बार में साफ नहीं होता, भयंकर कब्ज रहती है, गैस बनती है या बवासीर की शिकायत है, तो यह हरड़ आपके लिए किसी जादुई जड़ी-बूटी से कम नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह शरीर के तीनों दोषों वात, पित्त और कफ को एक साथ बैलेंस करती है। इसके नियमित सेवन से बुढ़ापा जल्दी नहीं आता, आंखों की रोशनी तेज होती है और याददाश्त भी बढ़ती है। बदलते मौसम में यह इम्युनिटी को इतना मजबूत कर देती है कि छोटी-मोटी बीमारियां शरीर के आसपास भी नहीं फटकतीं।
इसके सेवन का तरीका भी बेहद आसान है। कब्ज और गैस की समस्या से छुटकारा पाने के लिए रात को सोने से पहले आधा चम्मच हरड़ का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए। इससे अगली सुबह पेट एक झटके में एकदम साफ हो जाता है। वहीं, अगर किसी को बहुत तेज खांसी आ रही है या गले में भयंकर खराश है, तो छोटी हरड़ को गाय के घी में हल्का भूनकर टॉफी की तरह चूसने से तुरंत आराम मिलता है। यह एक अकेली प्राकृतिक दवा सौ से अधिक बीमारियों को जड़ से खत्म करने की ताकत रखती है। #Ayurveda #Haritaki #HealthTips #Chhattisgarh #Digestion #SANewsChhattisgarh