हम उस वंश के ठाकुर हैं, लाला—
जहाँ लोगों ने मातृभूमि और आन-बान के लिए बलिदान दिए हैं।
उन माताओं के वंशज हैं, जिन्होंने अपने लाल खोए,
उन पत्नियों के वंशज हैं, जिनके सुहाग रणभूमि में शहीद हुए,
उन रानियों की विरासत से आते हैं, जिन्होंने सम्मान के लिए जौहर तक कर दिया।
हम उस वंश के वंशज हैं, जिसने अपनी रियासतें तक त्याग दीं,
लेकिन अपनी आन और स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया।
आज तुम गालियाँ देते हो, उंगली उठाते हो—
तो लाला, जरा इतिहास के पन्ने पलटकर देख लेना।
हमने हथियार चलाना छोड़ जरूर दिया है,
लेकिन यह मत समझना कि उन्हें चलाना भूल गए हैं।
इतिहास हमारी पहचान है,
स्वाभिमान हमारी विरासत है।