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19 साल बाद भी बाढ़ प्रभावित दुकानदारों को नहीं मिली दुकानें -पुल और पिचिंग बनने के बाद भी पुनर्वास का इंतजार -टपों में कारोबार करने को मजबूर व्यापारी अनोखा तीर, रहटगांव। नगर में 7 जुलाई 2007 को अजनाल नदी में आई भीषण बाढ़ में 15 से अधिक पक्की दुकानें पानी में समा गई थीं। साथ ही अजनाल नदी का पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद कुछ दुकानदारों ने टप रखकर अपना जीवन-यापन शुरू किया। वर्ष 2013 में फिर आई बाढ़ में वहां लगा हैंडपंप तथा कुछ अन्य दुकानें भी बह गईं। इसके बाद से दुकानदार आज तक ग्राम पंचायत से व्यवस्थित स्थान मिलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि दुकान बनाकर अपना रोजगार शुरू कर सकें। वर्ष 2015 में ग्राम पंचायत ने मौखिक रूप से सब्जी बाजार में बनी सात दुकानों में व्यापार करने की अनुमति दी थी, जिससे दुकानदार अपनी रोजी-रोटी चला रहे थे। बाद में पंचायत ने उन दुकानों की नीलामी कर दी। इस बीच बाजार क्षेत्र में अन्य टप भी लगा दिए गए। इस संबंध में जगदीश तंवर, बंटी मालवीय, बलवंत ठाकुर, साकिर खान, बृजेश गौर, गौरीशंकर सेन, केवल गौर, संतोष चौधरी सहित अन्य दुकानदारों ने बताया कि तत्कालीन कलेक्टर सुदामा खाड़े ने व्यापारियों को जल्द दुकान के लिए जगह उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। इसके लिए पूर्व में आवेदन भी दिए गए थे। उन्होंने मांग की कि ग्राम पंचायत उनकी समस्या को समझते हुए दुकान निर्माण के लिए स्थान उपलब्ध कराए, ताकि वे स्थायी रूप से अपना व्यवसाय कर सकें। दुकानदारों ने बताया कि 19 साल बाद भी वे अपनी दुकानों को लेकर चिंतित हैं। 7 जुलाई 2007 की बाढ़ का मंजर आज भी उन्हें भयभीत कर देता है। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने नदी के पुल के पास पिचिंग कर भराव करने के बाद दुकानों के निर्माण की बात कही थी, जिससे बस स्टैंड क्षेत्र का भी विस्तार हो सके और व्यापारियों का पुनर्वास किया जा सके। लेकिन पिचिंग बने भी दो वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसके चलते व्यापारी आज भी तंबू और टपों में दुकानें लगाने को मजबूर हैं।

Harda, Harda | Jul 8, 2026
19 साल बाद भी बाढ़ प्रभावित दुकानदारों को नहीं मिली दुकानें -पुल और पिचिंग बनने के बाद भी पुनर्वास का इंतजार -टपों में कारोबार करने को मजबूर व्यापारी अनोखा तीर, रहटगांव। नगर में 7 जुलाई 2007 को अजनाल नदी में आई भीषण बाढ़ में 15 से अधिक पक्की दुकानें पानी में समा गई थीं। साथ ही अजनाल नदी का पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद कुछ दुकानदारों ने टप रखकर अपना जीवन-यापन शुरू किया। वर्ष 2013 में फिर आई बाढ़ में वहां लगा हैंडपंप तथा कुछ अन्य दुकानें भी बह गईं। इसके बाद से दुकानदार आज तक ग्राम पंचायत से व्यवस्थित स्थान मिलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि दुकान बनाकर अपना रोजगार शुरू कर सकें। वर्ष 2015 में ग्राम पंचायत ने मौखिक रूप से सब्जी बाजार में बनी सात दुकानों में व्यापार करने की अनुमति दी थी, जिससे दुकानदार अपनी रोजी-रोटी चला रहे थे। बाद में पंचायत ने उन दुकानों की नीलामी कर दी। इस बीच बाजार क्षेत्र में अन्य टप भी लगा दिए गए। इस संबंध में जगदीश तंवर, बंटी मालवीय, बलवंत ठाकुर, साकिर खान, बृजेश गौर, गौरीशंकर सेन, केवल गौर, संतोष चौधरी सहित अन्य दुकानदारों ने बताया कि तत्कालीन कलेक्टर सुदामा खाड़े ने व्यापारियों को जल्द दुकान के लिए जगह उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। इसके लिए पूर्व में आवेदन भी दिए गए थे। उन्होंने मांग की कि ग्राम पंचायत उनकी समस्या को समझते हुए दुकान निर्माण के लिए स्थान उपलब्ध कराए, ताकि वे स्थायी रूप से अपना व्यवसाय कर सकें। दुकानदारों ने बताया कि 19 साल बाद भी वे अपनी दुकानों को लेकर चिंतित हैं। 7 जुलाई 2007 की बाढ़ का मंजर आज भी उन्हें भयभीत कर देता है। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने नदी के पुल के पास पिचिंग कर भराव करने के बाद दुकानों के निर्माण की बात कही थी, जिससे बस स्टैंड क्षेत्र का भी विस्तार हो सके और व्यापारियों का पुनर्वास किया जा सके। लेकिन पिचिंग बने भी दो वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसके चलते व्यापारी आज भी तंबू और टपों में दुकानें लगाने को मजबूर हैं। - Harda News