
रायबरेली में हर साल की तरह इस साल भी 10वीं मोहर्रम (यौम-ए-आशूरा) के मौके पर अंजुमन-ए-काज़मिया की जानिब से जुलूस-ए-अज़ा बरामद हुआ।
जुलूस में अज़ादारों ने पुरसोज़ नौहाख़्वानी और सीना-ज़नी के ज़रिए हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदा-ए-कर्बला की अज़ीम कुर्बानियों को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया।
जुलूस अपने कदीम रास्तों से होता हुआ कर्बला पहुँचा, जहाँ अज़ादारों ने नम आँखों के साथ इमाम हुसैन (अ.स.) की बारगाह में पुर्सा-ए-अक़ीदत पेश किया। पूरे जुलूस के दौरान "या हुसैन (अ.स.)" और "लब्बैक या हुसैन (अ.स.)" की सदाओं से फ़िज़ा गूंजती रही, जिससे ग़म-ए-कर्बला का मंज़र ताज़ा हो उठा।
इस मौके पर शिया और सुन्नी दोनों हज़रात ने बढ़-चढ़कर शिरकत कर आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस महकमे और प्रशासन का सराहनीय सहयोग रहा, जिसकी बदौलत जुलूस अमन-ओ-अमान और बेहतर इंतिज़ाम के साथ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर अरशद हुसैन काज़मी, परवेज़ काज़मी, अर्शी काज़मी, शारिब काज़मी, काशिफ़ मेहदी, शमशाद हुसैन, तनवीर हैदर, ज़ुल्फ़िकार हैदर, राशिद अली ज़ैदी, तनवीर काज़मी, रियाज़ुल हसनैन, इंतेख़ाब आलम आदि मौजूद रहे।