
टांडा मेडिकल कॉलेज पार्किंग शुल्क मामला पहुंचा उपभोक्ता अदालत ।
शिकायतकर्ता अभिषेक पाधा ने उठाए अस्पताल परिसर में उपभोक्ताओं के शोषण के गंभीर सवाल ।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में पार्किंग शुल्क को लेकर शुरू हुआ विवाद अब जिला उपभोक्ता आयोग, धर्मशाला की अदालत में पहुंच गया है। ज्वालामुखी निवासी एवं अधिवक्ता अभिषेक पाधा ने अस्पताल परिसर में पार्किंग के नाम पर कथित अवैध वसूली, मनमाने शुल्क निर्धारण, त्रुटिपूर्ण रसीदें और उपभोक्ताओं के साथ हो रहे आर्थिक शोषण को चुनौती देते हुए उपभोक्ता शिकायत दायर की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल परिसर में आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और आम नागरिकों से पार्किंग के नाम पर निर्धारित समय से अधिक शुल्क वसूला जा रहा है। इसके अतिरिक्त पार्किंग के लिए जारी की जा रही रसीदों में पारदर्शिता का अभाव है तथा शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है।
मामले की सुनवाई के दौरान टांडा मेडिकल कॉलेज के विधि अधिकारी तथा पार्किंग ठेकेदार अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान माननीय आयोग ने विपक्षी पक्षों को शिकायतकर्ता द्वारा दायर शिकायत पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए तथा अगली सुनवाई के लिए 25 जुलाई की तिथि निर्धारित की।
सुनवाई के दौरान आयोग ने टांडा मेडिकल कॉलेज प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि अस्पताल परिसर की पार्किंग में किसी भी उपभोक्ता से निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूल न की जाए।
शिकायतकर्ता अभिषेक पाधा ने कहा कि यह मामला केवल उनके व्यक्तिगत हित का नहीं बल्कि उन हजारों मरीजों, परिजनों और आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है जो प्रतिदिन अस्पताल पहुंचते हैं और पार्किंग व्यवस्था के माध्यम से आर्थिक बोझ का सामना करते हैं।
उन्होंने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज कोई पर्यटन स्थल, मॉल या निजी व्यवसायिक परिसर नहीं है जहाँ एक मोटरसाइकिल वाले मरीज से रोज का ₹200 पार्किंग शुल्क वसूला जाए। अस्पताल वह स्थान है जहाँ व्यक्ति पहले से बीमारी, मानसिक तनाव और आर्थिक कठिनाइयों से जूझते हुए पहुंचता है। ऐसे स्थान पर जनसेवा की भावना सर्वोपरि होनी चाहिए, न कि आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्थाएँ।
अभिषेक पाधा ने कहा कि वह इस मामले को अपने स्तर पर उपभोक्ता अदालत तक लेकर गए हैं और उपभोक्ता आयोग जो भी निर्णय देगा, वह उन्हें स्वीकार होगा। उन्होंने कहा कि यदि मामले में अन्य गंभीर तथ्य सामने आते हैं, तो जनहित और कानून के दायरे में अन्य मंचों पर भी उचित कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों की प्राथमिकता मरीजों का उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ होनी चाहिए। यदि प्रशासन जनसेवा संस्थानों को राजस्व कमाने का माध्यम बनाने लगे तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। “अस्पताल जनसेवा के लिए हैं, कमाई के लिए नहीं — और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा हर परिस्थिति में होनी चाहिए।
टांडा मेडिकल कॉलेज की भूमि राय बहादुर जोधामल ने यह सोचकर दान नहीं की थी कि आने वाले वक्त में इस परिसर में मरीजो से नाजायज उगाही की जाएगी ।